बहराइच में किसानों का प्रदर्शन: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर गहराई चिंता
कमलेश कुमार मौर्य बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
12 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के बैनर तले किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी आशंकाएं स्पष्ट कीं। उनका कहना है कि यदि इस समझौते को वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया, तो इसका सीधा असर देश की कृषि व्यवस्था और किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है।

किसानों की मुख्य आपत्तियाँ
प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, उनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और बीज नीति से जुड़े सवाल शामिल रहे।
1. एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर असर
किसानों का तर्क है कि व्यापारिक संतुलन के नाम पर यदि कृषि सब्सिडी में कमी की जाती है, तो इससे एमएसपी व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उनका मानना है कि भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली सरकारी खरीद और पीडीएस जैसे तंत्र पर टिकी है। यदि इन व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा, तो देश की आत्मनिर्भर कृषि संरचना प्रभावित हो सकती है।
2. बीज और बौद्धिक संपदा अधिकार का मुद्दा
ज्ञापन में यह आशंका भी जताई गई कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यदि अधिक अधिकार मिले, तो पेटेंट कानूनों के जरिए बीज बाजार पर उनका प्रभाव बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि इससे पारंपरिक बीज संरक्षण और आदान-प्रदान की संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो भारतीय कृषि की मूल पहचान रही है।
आंदोलन को डिजिटल स्वर देने की अपील
प्रदर्शन के दौरान एक किसान नेता ने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक समझौते का सवाल नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोज़गार और किसानों की आय से जुड़ा व्यापक विषय है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने खेतों में “मेरा देश, मेरा खेत, मेरा अधिकार” लिखकर तस्वीरें लें और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज़ व्यापक स्तर पर पहुंचाएँ। उनका मानना है कि डिजिटल माध्यम जनजागरण का सशक्त साधन बन सकता है।
आगे की रणनीति
किसानों ने संकेत दिया कि यदि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया जा सकता है। यूनियन नेताओं का कहना है कि वे संवाद के पक्षधर हैं, लेकिन कृषि हितों से समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
बहराइच का यह प्रदर्शन संकेत देता है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर जमीनी स्तर पर बहस तेज हो रही है। आने वाले समय में सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद की दिशा इस पूरे मुद्दे की अहम कड़ी साबित हो सकती है।

