फ़रवरी 14, 2026

भारत सरकार ने देश के स्टार्टअप तंत्र को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की घोषणा की है। यह पहल केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। इसका लक्ष्य उभरते उद्यमों को पूंजी उपलब्ध कराना और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

प्रमुख विशेषताएँ

₹10,000 करोड़ का समर्पित कोष
इस चरण के अंतर्गत दस हजार करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया गया है, जिसका उपयोग विशेष रूप से डीप-टेक, उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण तथा प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्टअप्स को समर्थन देने में किया जाएगा।

घरेलू निवेश को बढ़ावा
यह योजना देश के भीतर दीर्घकालिक पूंजी निर्माण पर जोर देती है। इससे वेंचर कैपिटल की पहुँच महानगरों के बाहर उभरते नवाचार केंद्रों तक भी संभव हो सकेगी।

उच्च जोखिम, उच्च नवाचार वाले क्षेत्रों पर फोकस
सरकार का उद्देश्य ऐसे उद्यमों को प्रोत्साहन देना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, ग्रीन टेक्नोलॉजी और उन्नत बायोटेक जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार
इस पहल से कुशल रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा को मजबूती मिलेगी। उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका और सशक्त बना सकेगा।

पहले चरण की उपलब्धियों पर अगला कदम
फंड ऑफ फंड्स के प्रारंभिक चरण ने 1,300 से अधिक स्टार्टअप्स को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान किया। अब दूसरा चरण इस दायरे को और विस्तृत करने का लक्ष्य लेकर आया है।


व्यापक प्रभाव और महत्व

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 यह दर्शाता है कि भारत अब केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि तकनीक-प्रधान नवाचार मॉडल की ओर बढ़ रहा है। यह योजना निजी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने, जोखिम पूंजी के प्रवाह को प्रोत्साहित करने और घरेलू अनुसंधान क्षमता को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सरकार की यह रणनीति आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप है, जिसमें स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।


निष्कर्ष

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 केवल एक वित्तीय पैकेज नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य को आकार देने वाला कदम है। यह पहल युवाओं, नवप्रवर्तकों और निवेशकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी और भारत को विश्व स्तरीय इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।

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