फ़रवरी 14, 2026

असम में ऐतिहासिक दिन: मोरान बाईपास से आसमान तक ताकत की उड़ान

0

14 फरवरी 2026 को एक विशेष क्षण का साक्षी बना, जब की मौजूदगी में के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने मोरान बाईपास पर निर्मित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) से सफल संचालन किया। यह उत्तर-पूर्व भारत का पहला ऐसा हाईवे-आधारित इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप है, जिसे जरूरत पड़ने पर सैन्य और नागरिक विमानों के उपयोग के लिए तैयार किया गया है।

आसमान में शक्ति प्रदर्शन

कार्यक्रम के दौरान और जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस दृश्य ने उपस्थित लोगों में उत्साह और गौरव की भावना जगाई। वायुसेना के परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों ने भी अभ्यास कर यह संदेश दिया कि आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए पूरी तैयारी है।

इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। उन्होंने इस परियोजना को उत्तर-पूर्व की सुरक्षा और विकास के लिए मील का पत्थर बताया।


क्यों अहम है यह ELF?

मोरान बाईपास पर तैयार की गई यह आपातकालीन लैंडिंग सुविधा रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर-पूर्व भारत भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। प्राकृतिक आपदाओं—जैसे बाढ़ और भूकंप—की स्थिति में तेज़ राहत एवं बचाव कार्य के लिए ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

यह सुविधा तीन प्रमुख स्तरों पर उपयोगी सिद्ध होगी:

  1. सैन्य दृष्टि से – आपातकाल या सामरिक परिस्थितियों में तेज़ तैनाती।
  2. आपदा प्रबंधन में – राहत सामग्री और बचाव दल की शीघ्र आवाजाही।
  3. नागरिक उड्डयन के लिए – अप्रत्याशित परिस्थितियों में वैकल्पिक रनवे।

विकास परियोजनाओं की सौगात

इस कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री ने ₹5,450 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं की आधारशिला भी रखी। इन परियोजनाओं में डिजिटल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार, शहरी परिवहन में सुधार और बेहतर कनेक्टिविटी शामिल हैं।

इन पहलों का लक्ष्य केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति देना है। बेहतर सड़क, शिक्षा और डिजिटल सुविधाएँ स्थानीय युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेंगी।


उत्तर-पूर्व के लिए नया आत्मविश्वास

मोरान बाईपास पर विमानों की गूंज केवल तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि उत्तर-पूर्व भारत अब रणनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से केंद्र में है। मजबूत अवसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा तंत्र क्षेत्र को राष्ट्रीय मुख्यधारा के और करीब लाते हैं।

निष्कर्ष

डिब्रूगढ़ में आयोजित यह आयोजन रक्षा क्षमता, आपदा तैयारी और क्षेत्रीय विकास—तीनों का संगम साबित हुआ। सुखोई और राफेल की उड़ान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए सजग है, बल्कि दूरदराज़ क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है।

यह क्षण उत्तर-पूर्व भारत के उभरते आत्मविश्वास और सशक्त भविष्य का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें