फ़रवरी 17, 2026

रुपौली के यीशु बाबा धाम में महाशिवरात्रि पर विराट दंगल: कुश्ती को मिला नया आयाम

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लवलेश कुमार चित्रकूट

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

चित्रकूट जनपद के ग्राम पंचायत रुपौली स्थित पावन यीशु बाबा धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर 15 और 16 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय विराट दंगल ने इस वर्ष एक नया इतिहास रच दिया। यह दंगल हर वर्ष परंपरागत रूप से आयोजित होता है, लेकिन इस बार इसका स्वरूप पहले से कहीं अधिक भव्य और संगठित रहा।

देशभर के नामी पहलवानों की उपस्थिति

इस बार के आयोजन में भारत के विभिन्न राज्यों से गोल्ड मेडलिस्ट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके पहलवानों ने भाग लिया। विश्व हैवीवेट श्रेणी में प्रतिस्पर्धा कर चुके कई नामी रेसलर भी अखाड़े में उतरे। दो दिनों में लगभग ढाई सौ जोड़ी कुश्तियाँ विभिन्न भार वर्गों में संपन्न हुईं, जिसने दर्शकों में उत्साह और रोमांच भर दिया।

कुश्ती फेडरेशन के नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल

इस दंगल को इस बार नई पहचान मिली, जब इसे चित्रकूट कुश्ती फेडरेशन के नाम से संगठित किया गया। आयोजन की अध्यक्षता राकेश द्विवेदी ने की, जबकि सचिव के रूप में कुंवर शशि बाल सिंह की नियुक्ति की गई। एक सुदृढ़ समिति का भी गठन किया गया, जिसमें अनेक सक्रिय सदस्यों को जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। आयोजन में वंदना आयरलैंड फ्लोर मिल का विशेष सहयोग रहा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में बृजभूषण शरण सिंह की उपस्थिति

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद एवं भारतीय कुश्ती संघ के वर्तमान अध्यक्ष पधारे। वह अपने हेलीकॉप्टर से शिवरात्रि के पावन अवसर पर रुपौली पहुँचे। दीप प्रज्वलन कर उन्होंने प्रतियोगिता का शुभारंभ कराया, जिसके बाद अखाड़े में जोरदार मुकाबलों का सिलसिला शुरू हुआ।

समापन समारोह और सम्मान

दो दिनों तक चली रोमांचक कुश्तियों का समापन ब्लॉक प्रमुख गंगाधर मिश्रा द्वारा किया गया। विजेता और उपविजेता पहलवानों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया गया। पूरे आयोजन में ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

रुपौली का यह दंगल न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन है, बल्कि ग्रामीण खेल संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर से जोड़ने का माध्यम भी बनता जा रहा है। इस वर्ष कुश्ती फेडरेशन के गठन और राष्ट्रीय स्तर के पहलवानों की भागीदारी ने इसे नई दिशा दी है।

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आयोजित यह दंगल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और खेल परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है, जो आने वाले वर्षों में और भी बड़े आयाम हासिल करने की संभावना रखता है।

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