फ़रवरी 12, 2026

चित्रकूट: अतिवृष्टि से गिरे मकानों के मुआवजे में अनियमितता का आरोप ग्रमीणों द्वारा

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अनूप सिंह [ रिपोर्टर चित्रकूट ]

चित्रकूट। 17 सितंबर 2024 को हुई अतिवृष्टि के कारण जनपद के कई गांवों में भारी तबाही हुई, जिससे कई ग्रामीणों के कच्चे मकान धराशायी हो गए। आपदा राहत के तहत प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने का दावा किया गया था, लेकिन अब इस मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप सामने आ रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील प्रशासन को सूचना देने के बावजूद, कई मकान मालिकों को अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। बताया गया कि क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा गिरे मकानों का सर्वे किया गया और जांच आख्या आपदा राहत कार्यालय में भेजी गई थी। सर्वे के मुताबिक, साईपुरमाफी, गढीघाट, कहेटामाफी और कौहारी सहित अन्य गांवों में करीब 40 मकान गिरने की सूचना दी गई थी।

हालांकि, मुआवजे के वितरण में राजस्व निरीक्षक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि राजस्व निरीक्षक सुधीर सिंह द्वारा आपदा राहत कार्यालय में नियुक्त उनके बेटे द्वारा कमीशन की मांग की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार, सुधीर सिंह के बेटे ने मकान गिरने की सूचना को फर्जी करार देते हुए मुआवजे की प्रक्रिया को रोक दिया, और ग्रामीणों से “कुछ खर्चा” देने की मांग की, जिसके बाद ही मुआवजा राशि जारी होने की बात कही गई।

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व निरीक्षक और उनके बेटे द्वारा कमीशनबाजी का खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसमें जरूरतमंद ग्रामीणों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। मुआवजा पाने के लिए ग्रामीणों को बार-बार आपदा कार्यालय और तहसील का चक्कर काटने को मजबूर किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की है और मांग की है कि गिरे मकानों के मुआवजे में हो रही अनियमितता की जांच की जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की इस तरह की कार्यशैली से जरूरतमंदों को राहत मिलने में देरी हो रही है और उनके सामने आर्थिक संकट और भी गहरा हो रहा है।

अब जिलाधिकारी से उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिन ग्रामीणों के मकान गिरे हैं, उन्हें शीघ्र मुआवजा दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

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