फ़रवरी 19, 2026

किसान महापंचायत बहराइच: का संदेश—संघर्ष भी, समाधान भी

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कमलेश कुमार बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

18 फरवरी 2026 को बहराइच में आयोजित किसान महापंचायत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश के किसान अपने मुद्दों पर संगठित और सजग हैं। इस कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भाग लिया और किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं तथा संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की।

महापंचायत के बाद टिकैत सुजौली क्षेत्र के मटेही ग्राम सभा पहुँचे, जहाँ प्रदेश महासचिव मलकीत सिंह के आवास पर उन्होंने किसानों से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान खेतों का दौरा कर फसलों का निरीक्षण भी किया गया, जिसने स्थानीय कृषि संभावनाओं की नई दिशा की ओर संकेत किया।


जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम

अपने संबोधन में टिकैत ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैविक खेती को अपनाने पर विशेष बल दिया। उनका कहना था कि आज के समय में उपभोक्ता स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं, ऐसे में हल्दी, दालें और सब्जियों जैसी फसलों की जैविक खेती किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती है।

मटेही में हल्दी की बेहतर पैदावार देखकर उन्होंने सुझाव दिया कि यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और प्रेसिंग यूनिट स्थापित हो जाए, तो किसानों को कच्चा माल बेचने के बजाय तैयार उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


गन्ना भुगतान—सबसे बड़ा सवाल

महापंचायत में गन्ना भुगतान का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। किसानों ने बताया कि लंबे समय से बकाया भुगतान के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

टिकैत ने विशेष रूप से की खंभारखेरा (लखीमपुर) इकाई का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान अपनी मेहनत का हक लेने के लिए शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत रणनीति अपनाएंगे।


सामाजिक सहभागिता और एकजुटता

दौरे के दौरान टिकैत ने प्रदेश उपाध्यक्ष गुरवंत सिंह के यहाँ आयोजित अखंड पाठ में भी भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने किसानों के साथ अनौपचारिक बातचीत कर उनके अनुभव और सुझाव सुने।

इस महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण समाज में एकजुटता की भावना मजबूत हो रही है। किसान अब केवल समस्याएँ उठाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाधान आधारित सोच और सामूहिक प्रयास की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।


आगे की राह

यह दौरा केवल भाषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि के भविष्य पर ठोस विचार-विमर्श का मंच बना।

  • जैविक खेती को बढ़ावा
  • स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना
  • गन्ना भुगतान जैसी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए दबाव

इन बिंदुओं ने स्पष्ट किया कि किसान अब अपने आर्थिक अधिकारों और टिकाऊ खेती—दोनों को साथ लेकर चलना चाहते हैं।

बहराइच की यह महापंचायत आने वाले समय में किसान आंदोलन की रणनीति और ग्रामीण विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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