भारत की तपेदिक के खिलाफ बढ़ती कामयाबी: WHO ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2024 में भारत की प्रगति को मिली सराहना

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 29 अक्टूबर 2024 को जारी की गई ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2024 में भारत की तपेदिक (टीबी) के मामलों की पहचान और उपचार में तेजी से हुई प्रगति की सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2015 से टीबी मामलों की पहचान के अंतर को तेजी से कम किया है, जिससे देश की उपचार कवरेज में बड़ा सुधार हुआ है।
2023 में, भारत में टीबी के कुल 27 लाख मामलों का अनुमान लगाया गया था, जिनमें से 25.1 लाख लोगों की पहचान कर उन्हें उपचार मुहैया कराया गया। इस प्रगति के साथ भारत की उपचार कवरेज 2015 में 72 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 89 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे टीबी के गुमशुदा मामलों की कमी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
रिपोर्ट में टीबी की घटना दर में गिरावट का उल्लेख किया गया है। 2015 में जहां प्रति लाख आबादी पर 237 मामले दर्ज किए गए थे, 2023 में यह संख्या घटकर प्रति लाख पर 195 मामले रह गई। यह 17.7 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है, जो वैश्विक औसत 8.3 प्रतिशत के मुकाबले दोगुनी से अधिक है। इस उपलब्धि का श्रेय भारत के टीबी मामले की पहचान में बढ़ती सतर्कता और स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण को दिया गया है। देशभर में 1.7 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंडलों की मदद से इस विकेंद्रीकरण को प्रभावी बनाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, टीबी से होने वाली मृत्यु दर में भी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। जहां 2015 में प्रति लाख आबादी पर 28 लोगों की मौतें होती थीं, 2023 में यह संख्या घटकर प्रति लाख पर 22 रह गई है। यह 21 प्रतिशत की गिरावट है, जो भारत के टीबी उन्मूलन प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।
इस रिपोर्ट ने भारत की टीबी के खिलाफ प्रतिबद्धता और इसके उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा किए गए व्यापक प्रयासों को एक सकारात्मक दिशा में बढ़ता हुआ पाया है। यह सफलता भारत के लिए एक नई प्रेरणा है, जो टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।
