रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ा तनाव: ओरेश्निक मिसाइल पर हंगामा, नाटो की इमरजेंसी बैठक आज

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक नया मोड़ आ गया है। रूस द्वारा पहली बार हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल ‘ओरेश्निक’ के इस्तेमाल के बाद पश्चिमी देशों में तनाव गहरा गया है। इस घटना के बाद नाटो और यूक्रेन ने मंगलवार, 26 नवंबर को आपातकालीन बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की अपील पर हो रही है।
रूस का निप्रो पर हमला: नया खतरा
गुरुवार को रूस ने यूक्रेन के निप्रो शहर पर इंटरमीडिएट रेंज की हाइपरसोनिक मिसाइल ‘ओरेश्निक’ दागी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने इस हमले को मिसाइल टेस्टिंग बताया, लेकिन इसे पश्चिमी देशों और यूक्रेन ने उकसाने वाला कदम माना। यह पहली बार है जब 33 महीनों से चल रहे इस युद्ध में रूस ने इस प्रकार की मिसाइल का इस्तेमाल किया है।
पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया और नाटो की भूमिका
इस हमले के बाद पश्चिमी देशों में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ अमेरिकी हथियारों के इस्तेमाल की मंजूरी पहले ही दे दी थी। इस कदम ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। नाटो महासचिव ने कहा है कि “इस हमले से वैश्विक सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है, और हम इस पर ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हैं।”
यूक्रेन की प्रतिक्रिया: पलटवार की तैयारी
यूक्रेन ने भी रूस पर पश्चिमी देशों से मिले एडवांस हथियारों का इस्तेमाल करते हुए पलटवार करने का दावा किया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे रूस के खिलाफ अपनी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया।
पुतिन की धमकी: और मिसाइल टेस्ट होंगे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने एक बैठक के दौरान कहा कि “ओरेश्निक मिसाइल का टेस्ट हमारी सैन्य क्षमताओं को दर्शाता है। अगर पश्चिमी देश इसे उकसावे की कार्रवाई मानते हैं, तो उन्हें भविष्य में और भी बड़े परीक्षणों के लिए तैयार रहना चाहिए।”
बैठक का महत्व
नाटो और यूक्रेन के बीच हो रही यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें रूस के खिलाफ रणनीतिक कदम उठाने और यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य सहायता प्रदान करने पर चर्चा हो सकती है।
युद्ध के बढ़ते प्रभाव
इस ताजा हमले ने रूस-यूक्रेन युद्ध को एक नई दिशा में धकेल दिया है। जहां एक ओर यूक्रेन पश्चिमी देशों के समर्थन से अपने रक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है, वहीं रूस की नई मिसाइल तकनीक ने वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नाटो और पश्चिमी देश इस हमले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इससे युद्ध का दायरा और बढ़ेगा।
