CPGRAMS: जनता की शिकायतों के समाधान का मजबूत डिजिटल माध्यम, एक दशक में बदली शिकायत निवारण व्यवस्था
विशेषज्ञों के नजरिए से, CPGRAMS में शिकायतों के निस्तारण की अवधि में आई बड़ी कमी डिजिटल प्रशासन और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार का संकेत है। शिकायतों की बढ़ती संख्या यह भी बताती है कि नागरिक अब अपनी समस्याओं को सरकारी तंत्र तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

नई दिल्ली। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और नागरिकों के बीच सीधा संवाद सुशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक माना जाता है। जब किसी नागरिक को सरकारी सेवा, योजना, विभागीय प्रक्रिया या प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी परेशानी होती है, तो उसकी शिकायत का समय पर समाधान सरकार की जवाबदेही और कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पैमाना बन जाता है। इसी उद्देश्य को मजबूत करने में केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) की भूमिका लगातार बढ़ी है।
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) हिंदी के सोशल मीडिया पोस्ट में CPGRAMS की कार्यप्रणाली और पिछले एक दशक में इसके माध्यम से हुए बदलावों को रेखांकित किया गया है। पोस्ट के अनुसार, प्रभावी और समयबद्ध शिकायत निवारण जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन की बुनियाद को मजबूत करता है। CPGRAMS नागरिकों को सरकारी सेवाओं से संबंधित अपनी शिकायतें और सुझाव दर्ज कराने का एक प्रभावी माध्यम उपलब्ध कराता है।
नागरिक और सरकार के बीच सीधा संपर्क
CPGRAMS को केवल शिकायत दर्ज कराने वाले पोर्टल के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसका व्यापक उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं को संबंधित सरकारी विभाग तक पहुंचाना, शिकायत की प्रगति पर निगरानी रखना और समाधान के बाद नागरिक की प्रतिक्रिया प्राप्त करना है।
इस व्यवस्था के जरिए नागरिक अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकता है। शिकायत संबंधित विभाग या संगठन तक पहुंचती है और वहां उसके समाधान की प्रक्रिया शुरू होती है। शिकायत के निस्तारण के बाद नागरिक को समाधान की जानकारी दी जाती है। यदि नागरिक समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार वह आगे अपील या समीक्षा की प्रक्रिया का सहारा ले सकता है।
इस तरह CPGRAMS सरकार के प्रशासनिक ढांचे और आम नागरिक के बीच एक डिजिटल कड़ी का काम करता है।
एक दशक में शिकायत निवारण व्यवस्था में बड़ा बदलाव
PIB की ओर से साझा किए गए आंकड़ों में वर्ष 2014 और 2025 के बीच CPGRAMS की यात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में जहां लगभग 3.01 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 23 लाख हो गई।
शिकायतों की संख्या में वृद्धि को केवल समस्याओं के बढ़ने के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसका एक अर्थ यह भी है कि अधिक से अधिक नागरिक डिजिटल माध्यम से सरकारी तंत्र तक अपनी बात पहुंचाने लगे हैं। जैसे-जैसे पोर्टल की पहुंच और जागरूकता बढ़ी, वैसे-वैसे लोगों ने शिकायत दर्ज कराने के इस माध्यम का उपयोग अधिक किया।
यह बदलाव डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार का भी संकेत देता है।
शिकायत निवारण अधिकारियों की संख्या में वृद्धि
CPGRAMS की प्रभावशीलता केवल शिकायतें प्राप्त करने से तय नहीं होती। शिकायत मिलने के बाद उसके समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
PIB के साझा किए गए ग्राफिक में वर्ष 2014 के मुकाबले 2025 तक शिकायत निवारण से जुड़े अधिकारियों की संख्या में लगभग 11 गुना वृद्धि दिखाई गई है। आंकड़ों में यह संख्या 2014 में करीब 10,232 से बढ़कर 2025 में लगभग 1.11 लाख तक पहुंचती दिखाई गई है।
इस विस्तार का सीधा संबंध शिकायतों के बेहतर प्रबंधन से है। अधिक संख्या में अधिकारियों और संबंधित इकाइयों के जुड़ने से शिकायतों को सही स्तर पर भेजने, उनकी निगरानी करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाने में सहायता मिलती है।
157 दिन से घटकर 15 दिन हुआ औसत समय
CPGRAMS के विकास का सबसे उल्लेखनीय पहलू शिकायतों के समाधान में लगने वाले औसत समय में कमी है।
उपलब्ध ग्राफिक के अनुसार, वर्ष 2014 में शिकायतों के निस्तारण में औसतन करीब 157 दिन लगते थे। वर्ष 2025 तक यह अवधि घटकर लगभग 15 दिन रह गई। यानी शिकायतों के समाधान की गति में बड़ा सुधार दर्ज किया गया।
यह परिवर्तन नागरिकों के लिए विशेष महत्व रखता है। सरकारी विभाग से जुड़ी शिकायत का समाधान यदि लंबे समय तक लंबित रहे तो नागरिक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। डिजिटल शिकायत प्रणाली और समयबद्ध निगरानी इस परेशानी को कम करने में मदद कर सकती है।
हालांकि, शिकायतों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि समाधान केवल औपचारिक न हो, बल्कि नागरिक की वास्तविक समस्या का समाधान करे।
2026 में भी जारी है शिकायतों का सिलसिला
PIB द्वारा साझा किए गए आंकड़ों में वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। ग्राफिक के अनुसार जनवरी से जून 2026 के दौरान कुल 2,92,581 शिकायतें दर्ज हुईं।
मासिक आंकड़ों में जनवरी में 67,728, फरवरी में 72,357, मार्च में 75,853, अप्रैल में 76,643, मई में 65,174 और जून में 83,544 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि CPGRAMS का इस्तेमाल लगातार जारी है और बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याओं को डिजिटल माध्यम से सरकारी संस्थानों तक पहुंचा रहे हैं।
शिकायत दर्ज होने से समाधान तक की प्रक्रिया
CPGRAMS की प्रक्रिया को एक चरणबद्ध व्यवस्था के तौर पर समझा जा सकता है। नागरिक शिकायत दर्ज करता है, जिसके बाद शिकायत संबंधित विभाग या संगठन तक पहुंचाई जाती है। विभागीय स्तर पर शिकायत की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
समाधान की स्थिति में नागरिक को इसकी जानकारी दी जाती है। इसके बाद नागरिक से प्रतिक्रिया या फीडबैक लेने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि नागरिक समाधान से संतुष्ट है, तो शिकायत बंद की जा सकती है। असंतुष्टि की स्थिति में निर्धारित अपील व्यवस्था नागरिक को आगे अपनी बात रखने का अवसर देती है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायत केवल दर्ज होकर समाप्त न हो जाए, बल्कि उसकी पूरी यात्रा पर निगरानी बनी रहे।
पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा
लोक शिकायत निवारण व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत किया जा सकता है। जब शिकायत डिजिटल रूप से दर्ज होती है और उसकी स्थिति की निगरानी की जाती है, तो संबंधित विभाग के सामने उस शिकायत को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाने की जिम्मेदारी रहती है।
इसके साथ ही शिकायतों के आंकड़े सरकार को यह समझने में भी मदद कर सकते हैं कि किन विभागों, सेवाओं या योजनाओं से संबंधित समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं। इस जानकारी के आधार पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार किया जा सकता है।
डिजिटल शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिक और सरकार के बीच संवाद के तरीके भी बदल रहे हैं। पहले शिकायत दर्ज कराने के लिए नागरिक को संबंधित सरकारी कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाना पड़ सकता था। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम किया है।
हालांकि डिजिटल व्यवस्था की सफलता के लिए केवल ऑनलाइन पोर्टल पर्याप्त नहीं है। इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच, भाषा की सुविधा, शिकायत की सही श्रेणीकरण व्यवस्था, विभागीय प्रतिक्रिया और समाधान की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
आगे की चुनौती समाधान की गुणवत्ता
CPGRAMS के आंकड़े शिकायत निवारण की गति में सुधार की ओर संकेत करते हैं, लेकिन आगे की चुनौती समाधान की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाए रखने की है। किसी शिकायत को जल्दी बंद कर देना और नागरिक की समस्या का वास्तविक समाधान करना दो अलग-अलग बातें हैं।
इसलिए आने वाले समय में शिकायतों के विश्लेषण, नागरिक फीडबैक, विभागीय जवाबदेही और अपील व्यवस्था को और मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, बार-बार आने वाली शिकायतों की पहचान करके उनके मूल कारणों को दूर करने पर भी ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष
CPGRAMS ने पिछले एक दशक में भारत की लोक शिकायत निवारण व्यवस्था को डिजिटल और अधिक निगरानी-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिकायतों की संख्या में बढ़ोतरी, शिकायत निवारण अधिकारियों के नेटवर्क का विस्तार और औसत निस्तारण समय में कमी इस बदलाव के प्रमुख संकेतक हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत निवारण को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर नागरिक-केंद्रित सुशासन का हिस्सा बनाया जाए। यदि शिकायत दर्ज कराने से लेकर अंतिम समाधान और नागरिक फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनी रहती है, तो CPGRAMS सरकार और जनता के बीच भरोसे की डिजिटल कड़ी को और मजबूत कर सकता है।