चीन में सैटेलाइट आधारित खेती से उत्पादन बढ़ाने का प्रयोग, कम इनपुट में बढ़ी चावल की पैदावार
बीजिंग/जियामुसी, 25 सितंबर 2026। चीन के उत्तर-पूर्वी प्रांत हेइलोंगजियांग में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग सामने आया है। यहां सैटेलाइट और डिजिटल तकनीकों पर आधारित कृषि प्रदर्शन में खेती के दौरान इस्तेमाल होने वाले कृषि इनपुट में लगभग 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। साथ ही कृषि कार्यों की

संचालन क्षमता में 20 प्रतिशत से अधिक सुधार और चावल की उपज में करीब 750 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। यह जानकारी जियामुसी में आयोजित सैटेलाइट उद्योग विकास सम्मेलन में प्रस्तुत की गई।
इस प्रयोग की खासियत यह है कि इसमें केवल खेत में किसी एक मशीन या उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि अंतरिक्ष, हवाई और जमीन आधारित तकनीकों को एक साथ जोड़कर कृषि प्रबंधन को डिजिटल बनाने की कोशिश की गई। इसका उद्देश्य किसान को खेत की वास्तविक स्थिति से जुड़ा अधिक सटीक डेटा उपलब्ध कराना और उसके आधार पर खेती से संबंधित फैसले लेने में मदद करना है।
खेती में सैटेलाइट तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
पारंपरिक खेती में किसान अक्सर मौसम, मिट्टी, फसल की स्थिति और सिंचाई जैसी चीजों का आकलन अपने अनुभव के आधार पर करते हैं। बड़े कृषि क्षेत्रों में हर खेत की स्थिति को लगातार देख पाना भी मुश्किल होता है। ऐसे में सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग तकनीक कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त निगरानी क्षमता उपलब्ध करा सकती है।
हेइलोंगजियांग के प्रदर्शन में अंतरिक्ष-हवाई-जमीन एकीकृत रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य फसल उत्पादन के अलग-अलग चरणों की जानकारी एकत्र करना और उसका डिजिटल विश्लेषण करना है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, तकनीक को बुवाई से लेकर फसल की देखभाल और कटाई तक की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया गया।
सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और अन्य सेंसर आधारित आंकड़ों के माध्यम से खेतों की स्थिति का व्यापक स्तर पर आकलन किया जा सकता है। इसके बाद इन आंकड़ों को डिजिटल कृषि प्रणालियों के साथ जोड़कर कृषि कार्यों की योजना तैयार करने में सहायता मिलती है।
18 प्रतिशत तक कृषि इनपुट में कमी
इस प्रदर्शन से सामने आया सबसे उल्लेखनीय परिणाम कृषि इनपुट में लगभग 18 प्रतिशत की कमी है। कृषि इनपुट में बीज, उर्वरक, पानी, कीटनाशक और अन्य उत्पादन संसाधनों का उपयोग शामिल हो सकता है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में इस 18 प्रतिशत कमी के प्रत्येक घटक का अलग-अलग आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन कुल कृषि इनपुट में कमी का परिणाम संसाधन-कुशल खेती की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
किसी बड़े कृषि क्षेत्र में यदि जरूरत के अनुसार ही संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए तो अनावश्यक खर्च कम किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, जिस खेत के हिस्से में फसल की स्थिति बेहतर है वहां समान मात्रा में इनपुट देना आवश्यक नहीं हो सकता, जबकि कमजोर हिस्से में अलग प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है।
डिजिटल कृषि प्रणालियां इसी तरह खेत को एक समान इकाई मानने के बजाय अलग-अलग हिस्सों की परिस्थितियों को समझने की दिशा में काम करती हैं।
संचालन दक्षता में 20 प्रतिशत से ज्यादा सुधार
प्रदर्शन के दौरान कृषि संचालन की दक्षता में 20 प्रतिशत से अधिक सुधार की भी जानकारी दी गई। इसका संबंध खेती के विभिन्न कार्यों की योजना, निगरानी और संचालन में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से है।
कृषि क्षेत्र में समय का विशेष महत्व होता है। बुवाई, सिंचाई, खाद प्रबंधन और कटाई जैसे काम यदि उचित समय पर किए जाएं तो उत्पादन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। डिजिटल डेटा के इस्तेमाल से किसानों और कृषि प्रबंधकों को खेतों की स्थिति के बारे में अधिक तेजी से जानकारी मिल सकती है।
हेइलोंगजियांग में पहले से ही कृषि क्षेत्र में उपग्रह नेविगेशन, रिमोट सेंसिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। प्रांत में स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने की योजनाओं में कृषि उत्पादन डेटा संग्रह और उच्च-सटीकता वाले कृषि उपकरणों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।
चावल की उपज में 750 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी
इस प्रयोग का सबसे सीधा प्रभाव चावल उत्पादन से जुड़ा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन क्षेत्र में चावल की उपज में लगभग 750 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई।
उपज में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हेइलोंगजियांग चीन के प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। प्रांत की कृषि व्यवस्था में चावल की महत्वपूर्ण भूमिका है और यहां बड़े पैमाने पर आधुनिक मशीनरी तथा डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हेइलोंगजियांग सरकार के अनुसार, प्रांत में कृषि उत्पादन को डिजिटल तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और उच्च-सटीकता वाले कृषि उपकरणों के साथ जोड़ने की दिशा में लंबे समय से काम किया जा रहा है।
केवल सैटेलाइट नहीं, पूरी डिजिटल व्यवस्था
इस प्रयोग को केवल ‘सैटेलाइट से खेती’ के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। आधुनिक डिजिटल कृषि में अलग-अलग तकनीकों का संयोजन महत्वपूर्ण है। सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग खेत की व्यापक स्थिति का डेटा उपलब्ध करा सकती है, जबकि जमीन पर लगे सेंसर मिट्टी और नमी जैसी स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी दे सकते हैं।
इसके अलावा ड्रोन फसल की निगरानी में मदद कर सकते हैं और कृषि मशीनों में उपग्रह आधारित नेविगेशन से काम की सटीकता बढ़ाई जा सकती है। इन सभी स्रोतों से मिलने वाले डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकत्र कर विश्लेषण किया जा सकता है।
हेइलोंगजियांग में कृषि क्षेत्र से संबंधित मौजूदा डिजिटल पहलों में मिट्टी की स्थिति, फसल वृद्धि, मौसम और कृषि मशीनों की गतिविधियों से संबंधित डेटा के इस्तेमाल की दिशा में भी काम हो रहा है।
किसानों के लिए क्या बदल सकता है?
डिजिटल खेती का सबसे बड़ा संभावित बदलाव निर्णय लेने की प्रक्रिया में दिखाई देता है। किसान को केवल अनुभव और सामान्य मौसम जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय अपने खेत से संबंधित डेटा भी उपलब्ध हो सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी खेत में फसल की वृद्धि अपेक्षित गति से नहीं हो रही है तो डिजिटल निगरानी प्रणाली उस क्षेत्र को अलग से चिन्हित करने में मदद कर सकती है। इसके बाद कृषि विशेषज्ञ या किसान वहां आवश्यक जांच कर सकता है।
इसी तरह मौसम से जुड़ी जानकारी को फसल के आंकड़ों के साथ जोड़कर कृषि कार्यों की बेहतर योजना बनाई जा सकती है। इससे संसाधनों के इस्तेमाल को अधिक लक्षित बनाने की संभावना बढ़ती है।
हाल के वर्षों में हेइलोंगजियांग में स्मार्ट कृषि के विभिन्न मॉडल सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ क्षेत्रों में सेंसर, बीडौ नेविगेशन, डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म और स्मार्ट मशीनों को खेती के अलग-अलग चरणों में जोड़ा गया है।
खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रयोग
दुनिया की बढ़ती आबादी और कृषि भूमि पर बढ़ते दबाव के बीच कम संसाधनों में अधिक उत्पादन हासिल करना कृषि क्षेत्र की बड़ी चुनौती है। ऐसे में सैटेलाइट और डिजिटल तकनीक आधारित खेती का प्रयोग खाद्य सुरक्षा के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
उत्तर-पूर्वी चीन में उपग्रह आधारित अध्ययनों का इस्तेमाल पहले भी चावल की खेती के क्षेत्र, फसल वृद्धि और उत्पादन का आकलन करने के लिए किया गया है। वैज्ञानिक अध्ययनों में रिमोट सेंसिंग और कृषि मॉडल के माध्यम से चावल उत्पादन की निगरानी तथा अनुमान लगाने की क्षमता पर भी शोध हुआ है।
इससे संकेत मिलता है कि सैटेलाइट तकनीक केवल खेतों की तस्वीर लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े कृषि क्षेत्रों के विश्लेषण और उत्पादन प्रबंधन में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है।
आगे बढ़ाने की चुनौती
हालांकि हेइलोंगजियांग का यह प्रदर्शन उत्साहजनक आंकड़े प्रस्तुत करता है, लेकिन किसी एक प्रदर्शन के परिणामों को हर क्षेत्र की खेती पर सीधे लागू करना उचित नहीं होगा। मिट्टी, मौसम, फसल की किस्म, सिंचाई व्यवस्था, किसान की तकनीकी क्षमता और खेत का आकार अलग-अलग होने के कारण परिणामों में अंतर हो सकता है।
इसके अलावा डिजिटल कृषि के विस्तार के लिए तकनीकी ढांचे, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेंसर और उपकरणों की लागत तथा किसानों को प्रशिक्षण देने जैसी जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं।
फिर भी हेइलोंगजियांग से सामने आए आंकड़े यह दिखाते हैं कि सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और डिजिटल कृषि को पारंपरिक खेती के साथ जोड़कर संसाधन उपयोग तथा उत्पादन दोनों में सुधार की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है।
निष्कर्ष
चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत में सैटेलाइट आधारित डिजिटल कृषि प्रदर्शन ने आधुनिक खेती की संभावनाओं को एक नए तरीके से सामने रखा है। रिपोर्ट किए गए परिणामों के अनुसार कृषि इनपुट में करीब 18 प्रतिशत कमी, संचालन दक्षता में 20 प्रतिशत से अधिक सुधार और चावल की उपज में लगभग 750 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस प्रयोग का महत्व केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग, डिजिटल डेटा, सेंसर, नेविगेशन और स्मार्ट मशीनरी को एक साथ इस्तेमाल करके खेती को अधिक डेटा-आधारित बनाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में ऐसे प्रयोगों के विस्तृत और अलग-अलग कृषि क्षेत्रों में परीक्षण से यह समझने में मदद मिल सकती है कि डिजिटल तकनीक टिकाऊ और संसाधन-कुशल खेती में किस स्तर तक योगदान दे सकती है।