स्विस बैंकों में भारतीय धन में एक दशक में 18% की गिरावट: स्विस नेशनल बैंक रिपोर्ट

नई दिल्ली, 20 जून 2025 — स्विस नेशनल बैंक (SNB) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों और कंपनियों द्वारा जमा धनराशि में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह परिवर्तन वैश्विक बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और सख्त वित्तीय नियमन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
🔍 क्या कहती है रिपोर्ट?
2015 में भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा राशि लगभग 425 मिलियन स्विस फ्रैंक थी। यह आंकड़ा 2024 तक घटकर 346 मिलियन फ्रैंक रह गया है। हालांकि कोविड-19 महामारी के दौरान जमा धन में एक अस्थायी उछाल देखा गया था — 2021-22 के आसपास यह आंकड़ा 602 मिलियन फ्रैंक तक पहुंच गया — लेकिन उसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई।
2023 में यह धनराशि गिरकर 309 मिलियन फ्रैंक तक पहुंच गई थी। हालांकि 2024 में इसमें थोड़ी बढ़त देखी गई और यह आंकड़ा 346 मिलियन फ्रैंक तक पहुंच गया — यानी सालाना आधार पर करीब 37 मिलियन फ्रैंक की वृद्धि हुई।
🌐 वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा
स्विट्जरलैंड में केवल भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के नागरिकों द्वारा भी जमा धनराशि में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन के नागरिकों द्वारा 2015 में स्विस बैंकों में लगभग 44 अरब फ्रैंक जमा थे, जो 2024 में घटकर 31 अरब फ्रैंक रह गए हैं।
🧾 क्यों घट रहे हैं विदेशी जमा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं:
वैश्विक टैक्स नियमों में कड़ाई
ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इनफॉर्मेशन (AEOI) जैसे समझौतों का कार्यान्वयन
आर्थिक पारदर्शिता में वृद्धि
देशों द्वारा विदेशों में जमा पूंजी पर निगरानी बढ़ाना
काले धन पर कार्रवाई और धन को देश में वापस लाने के प्रयास
🏦 क्या इसका असर स्विस बैंकिंग सिस्टम पर पड़ेगा?
स्विट्जरलैंड लंबे समय से एक “टैक्स हेवन” के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब वहां का बैंकिंग सिस्टम अधिक पारदर्शी और विनियमित होता जा रहा है। इससे न केवल भारतीय, बल्कि अन्य देशों के ग्राहक भी अपनी संपत्ति को अन्य निवेश माध्यमों या घरेलू बैंकिंग विकल्पों में स्थानांतरित कर रहे हैं।
📌 निष्कर्ष
पिछले दशक में स्विस बैंकों में भारतीय धन में आई गिरावट यह दर्शाती है कि अब लोग पारंपरिक गुप्त बैंकिंग केंद्रों पर कम निर्भर हो रहे हैं। इससे भारत सरकार की काले धन के खिलाफ मुहिम, धन की निगरानी और आर्थिक सुधार की दिशा में हो रहे प्रयासों को मजबूती मिलती है।
