भारत के प्रमुख पठार: भौगोलिक विविधता की अद्भुत छवि

भारत एक विविध भौगोलिक संरचना वाला देश है, जहाँ पर्वत, मैदान, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्र के साथ-साथ विस्तृत पठारी क्षेत्र भी पाए जाते हैं। ये पठार न केवल भारत की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं, बल्कि खनिज, कृषि और वन संसाधनों का भी प्रमुख स्रोत हैं। इस लेख में हम भारत के प्रमुख पठारों की विशेषताओं, स्थिति और महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।
1. दक्कन पठार (Deccan Plateau)
स्थिति: यह पठार भारत के दक्षिणी भाग में स्थित है और देश का सबसे बड़ा पठार माना जाता है। यह तीन ओर से पर्वतों से घिरा हुआ है — पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और सतपुड़ा पर्वतमाला।
विशेषताएं:
- यह त्रिभुजाकार आकार का है।
- यहाँ कठोर बेसाल्टिक चट्टानों की प्रधानता है, जो इसे प्राचीन लावा प्रवाह से बना दर्शाती हैं।
- दक्कन पठार कृषि और खनिज संसाधनों के लिए समृद्ध है, विशेष रूप से काली मिट्टी (रेगुर) यहाँ कपास की खेती के लिए उपयुक्त है।
2. मालवा पठार (Malwa Plateau)
स्थिति: यह मध्य भारत में स्थित है, मुख्यतः मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है।
विशेषताएं:
- यह पठार विंध्याचल और अरावली पर्वतों के बीच बसा है।
- यहाँ की भूमि जलोढ़ और लैटराइट मिट्टी से बनी है।
- इस क्षेत्र में गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी फसलें प्रमुख हैं।
- यह पठार नर्मदा और चंबल नदियों से पोषित होता है।
3. छोटा नागपुर पठार (Chotanagpur Plateau)
स्थिति: यह झारखंड राज्य का प्रमुख भू-आकृतिक क्षेत्र है और इसके कुछ हिस्से पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में भी फैले हैं।
विशेषताएं:
- यह पठार खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है और इसे “भारत का खनिज भंडार” भी कहा जाता है।
- यहाँ लौह अयस्क, बॉक्साइट, कोयला, तांबा जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- यहाँ की प्रमुख नदियाँ दामोदर, स्वर्णरेखा और कोयल हैं।
4. बुंदेलखंड पठार (Bundelkhand Plateau)
स्थिति: यह पठार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच स्थित है।
विशेषताएं:
- यहाँ की भौगोलिक संरचना पुरानी चट्टानों और शुष्क मिट्टी से बनी है।
- सिंचाई की सुविधा सीमित होने के कारण यह क्षेत्र कृषि के लिए कठिन माना जाता है।
- हालाँकि, खनिजों और पत्थरों की दृष्टि से यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है।
5. राजमहल पठार (Rajmahal Hills/Plateau)
स्थिति: यह झारखंड के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है।
विशेषताएं:
- यह क्षेत्र ज्वालामुखी गतिविधियों का प्राचीन प्रमाण है।
- यहाँ की चट्टानों से डाइनोसोर के अंडों के जीवाश्म भी पाए गए हैं।
- यह पठार विशेष प्रकार की अग्नि शैलियों (volcanic rocks) के लिए प्रसिद्ध है।
पठारी क्षेत्रों का राष्ट्रीय महत्त्व
भारत के पठारी क्षेत्र केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं:
- खनिज संसाधन: देश के अधिकांश लौह, कोयला, बॉक्साइट जैसे खनिज इन्हीं क्षेत्रों से प्राप्त होते हैं।
- वन एवं जैव विविधता: पठारी क्षेत्र घने वनों से आच्छादित हैं, जो जैव विविधता के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- नदी जल स्रोत: यहाँ से निकलने वाली नदियाँ सिंचाई, जलविद्युत और पेयजल आपूर्ति में योगदान देती हैं।
- पर्यटन एवं संस्कृति: कई पठारी क्षेत्र आदिवासी संस्कृति के केंद्र हैं और पर्यटन के आकर्षण का प्रमुख स्रोत हैं।
निष्कर्ष
भारत के प्रमुख पठार न केवल देश की भौगोलिक विविधता को दर्शाते हैं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक नींव को भी मज़बूती प्रदान करते हैं। ये पठार भारतीय उपमहाद्वीप की संरचनात्मक परतों का गौरवशाली प्रतीक हैं, जिनकी महत्ता समय के साथ और अधिक बढ़ती जा रही है। इनके संरक्षण, सतत दोहन और समुचित विकास से ही भारत की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।
