रिटायरमेंट पर जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का बड़ा संकल्प, GPF की 1.01 करोड़ राशि PM CARES को देने का ऐलान
जबलपुर, 19 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की सेवानिवृत्ति का अवसर सामान्य विदाई समारोह से अलग और यादगार बन गया। 17 सितंबर 2026 को करीब 36 वर्षों की न्यायिक सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए जस्टिस सिंह ने अपने विदाई समारोह में ऐसे दो महत्वपूर्ण संकल्पों की घोषणा की, जिनकी चर्चा अब व्यापक रूप से हो रही है। उन्होंने अपने जनरल प्रोविडेंट फंड यानी GPF से मिलने वाली लगभग 1.01 करोड़ रुपये की राशि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष यानी PM CARES Fund में देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी इंदिरा सिंह के साथ मृत्यु के बाद देहदान का पंजीयन कराने की जानकारी भी साझा की।

36 साल की न्यायिक सेवा के बाद भावुक विदाई
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने 1990 में सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी। लगभग तीन दशक से अधिक समय तक न्यायपालिका में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने 1 मई 2023 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। 17 सितंबर 2026 को उनका हाईकोर्ट न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल समाप्त हुआ।
उनके सम्मान में हाईकोर्ट में फुल कोर्ट फेयरवेल कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की मौजूदगी रही। विदाई के दौरान जस्टिस सिंह ने अपने न्यायिक सफर को याद करते हुए सहयोगियों और अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
लेकिन समारोह का सबसे भावुक हिस्सा तब आया, जब उन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद किए जाने वाले सामाजिक कार्यों से जुड़े दो बड़े संकल्पों की जानकारी दी।
GPF की 1.01 करोड़ रुपये की राशि PM CARES Fund को देने का ऐलान
जस्टिस सिंह ने बताया कि उनके GPF में जमा राशि रिटायरमेंट के बाद उन्हें प्राप्त होगी। उन्होंने घोषणा की कि इस राशि में से करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपये PM CARES Fund में दान किए जाएंगे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि राशि खाते में प्राप्त होने के बाद इसे फंड में देने का संकल्प लिया गया है।
यह रकम उनकी लंबी न्यायिक सेवा से जुड़ी व्यक्तिगत बचत का हिस्सा है। ऐसे समय में जब अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति के बाद अपनी बचत और भविष्य की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जस्टिस सिंह ने अपनी GPF राशि का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक सहायता के लिए समर्पित करने की घोषणा की।
उनकी घोषणा ने समारोह में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अपने विचार को समाज के प्रति जिम्मेदारी और योगदान की भावना से जोड़ा।
पत्नी के साथ देहदान का भी संकल्प
जस्टिस सिंह ने केवल आर्थिक योगदान की घोषणा नहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी इंदिरा सिंह ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए पंजीयन कराया है। रिपोर्टों के अनुसार यह पंजीयन उनकी सेवानिवृत्ति से करीब दो दिन पहले कराया गया था।
उनका उद्देश्य यह है कि मृत्यु के बाद उनका शरीर मेडिकल शिक्षा और वैज्ञानिक अध्ययन में उपयोगी हो सके। मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना समझने में ऐसे दान का शैक्षणिक महत्व होता है। इसी विचार को जस्टिस सिंह ने अपने संबोधन में सामाजिक उपयोगिता से जोड़कर प्रस्तुत किया।
उनके अनुसार, जिस शरीर ने जीवनभर अपने दायित्व निभाए, वह जीवन के बाद भी किसी भावी चिकित्सक की शिक्षा और ज्ञान में योगदान दे सके, तो यह समाज के लिए उपयोगी कार्य होगा।
‘अपने लिए जिए तो क्या जिए’ का संदेश
विदाई समारोह में जस्टिस सिंह की बातों का केंद्रीय भाव समाज के लिए कुछ करने का रहा। रिपोर्टों में उनके संबोधन से यह विचार सामने आया कि मनुष्य का जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘अपने लिए जिए तो क्या जिए’ की भावना व्यक्त की।
उनके दोनों संकल्पों में एक समान विचार दिखाई देता है—जीवन में अर्जित संसाधनों और जीवन के बाद शरीर को भी किसी सामाजिक या शैक्षणिक उद्देश्य के लिए उपयोगी बनाने की इच्छा।
देहदान और धनदान की उनकी घोषणाएं उनके रिटायरमेंट समारोह को एक अलग संदेश देने वाला अवसर बना गईं। समारोह में मौजूद लोगों ने उनके निर्णय को सम्मान के साथ सुना और उनकी सराहना की।
न्यायिक करियर की शुरुआत से हाईकोर्ट तक का सफर
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का न्यायिक करियर 31 मई 1990 से शुरू हुआ था। उन्होंने न्यायिक सेवा के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाईं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर न्यायिक दायित्वों का निर्वहन किया और बाद में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया।
मई 2023 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। हाईकोर्ट में करीब तीन वर्षों की सेवा के बाद 17 सितंबर 2026 को उन्होंने न्यायिक जीवन से विदाई ली।
कुछ रिपोर्टों में उनके हाईकोर्ट कार्यकाल के दौरान हजारों मामलों के निराकरण का उल्लेख भी किया गया है। हालांकि, अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में आंकड़ों और राशि के उल्लेख में मामूली अंतर दिखाई देता है, इसलिए इन संख्याओं को आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग सत्यापित मानने के बजाय प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार ही देखना उचित है।
रिटायरमेंट के बाद भी समाज से जुड़े रहने का संदेश
आमतौर पर सेवानिवृत्ति को लंबे पेशेवर जीवन के बाद आराम और व्यक्तिगत जीवन की ओर लौटने का समय माना जाता है। जस्टिस सिंह के मामले में विदाई समारोह में सामने आए संकल्पों ने इस अवसर को सामाजिक योगदान के संदेश से जोड़ दिया।
GPF की बड़ी राशि PM CARES Fund को देने की घोषणा तत्काल आर्थिक योगदान से जुड़ी है, जबकि देहदान का संकल्प भविष्य में मेडिकल शिक्षा और शोध के लिए उपयोगी होने की संभावना से जुड़ा है। दोनों फैसलों की प्रकृति अलग है, लेकिन जस्टिस सिंह ने इन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी की भावना के साथ जोड़ा।
उनकी पत्नी इंदिरा सिंह का इस संकल्प में साथ होना भी उल्लेखनीय रहा। दोनों ने मिलकर देहदान के लिए पंजीयन कराया है।
विदाई समारोह में बनी यादगार तस्वीर
17 सितंबर का समारोह जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह के 36 वर्षों के न्यायिक सफर के समापन का अवसर था, लेकिन उनकी घोषणाओं ने इसे सामाजिक संदेश से भी जोड़ दिया। एक ओर उन्होंने न्यायिक सेवा के दौरान निभाई जिम्मेदारियों को पीछे छोड़ा, वहीं दूसरी ओर अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर समाज के लिए योगदान से जुड़े फैसले सामने रखे।
उनके GPF से करीब 1.01 करोड़ रुपये PM CARES Fund को देने की घोषणा और पत्नी के साथ देहदान का पंजीयन इस समारोह की प्रमुख बातें रहीं।
जस्टिस सिंह की विदाई का यह प्रसंग इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने के बाद भी सामाजिक योगदान के अलग-अलग रास्ते चुने जा सकते हैं। उनके द्वारा घोषित दोनों संकल्पों का वास्तविक प्रभाव संबंधित प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सामने आएगा, लेकिन विदाई समारोह में व्यक्त उनका विचार पहले ही चर्चा का विषय बन चुका है।
36 वर्षों की न्यायिक सेवा के बाद अदालत से विदाई लेते हुए जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपनी बचत और मृत्यु के बाद देह के उपयोग को समाज से जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया। यही वजह है कि उनका सेवानिवृत्ति समारोह केवल एक न्यायिक अधिकारी की विदाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और योगदान की चर्चा का अवसर भी बन गया।