चित्रकूट के राजापुर तहसील में खतौनी के नाम पर अतिरिक्त वसूली का आरोप, किसानों ने बनाया वीडियो
लवलेश कुमार श्रीवास्तव चित्रकूट संवाददाता
हिट एंड हॉट न्यूज़
राजापुर/चित्रकूट। चित्रकूट जिले की राजापुर तहसील में खतौनी निकलवाने के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लिए जाने के आरोप ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि खतौनी प्राप्त करने के लिए सरकारी तौर पर निर्धारित शुल्क 15 रुपये है, लेकिन उनसे कथित तौर पर 20 रुपये प्रति खतौनी की मांग की जा रही है। यानी प्रत्येक खतौनी पर पांच रुपये अतिरिक्त लिए जाने का आरोप सामने आया है।

मामले को लेकर कुछ किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में किसानों की ओर से खतौनी के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लिए जाने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि जब वह अपनी जमीन से संबंधित अभिलेख प्राप्त करने के लिए तहसील पहुंचते हैं, तो उनसे अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है।
निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने का आरोप
किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, खतौनी निकालने के लिए निर्धारित शुल्क 15 रुपये है, लेकिन कथित रूप से उनसे 20 रुपये वसूले जा रहे हैं। किसानों ने इस अतिरिक्त पांच रुपये की वसूली को लेकर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि किसी सरकारी दस्तावेज के लिए शुल्क पहले से निर्धारित है तो उससे अधिक रकम लेने का आधार क्या है।
खतौनी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेख है। इसमें भूमि से संबंधित कई आवश्यक जानकारियां दर्ज होती हैं। जमीन के स्वामित्व, हिस्सेदारी और राजस्व संबंधी कार्यों में खतौनी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में किसानों को अक्सर तहसील और संबंधित राजस्व कार्यालयों में अपने दस्तावेजों के लिए जाना पड़ता है।
किसानों का आरोप है कि इसी जरूरत का फायदा उठाकर उनसे अतिरिक्त राशि ली जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
खतौनी निकलवाने पहुंचे किसानों ने बनाया वीडियो
बताया जा रहा है कि खतौनी निकलवाने के लिए तहसील पहुंचे कुछ किसानों ने कथित अतिरिक्त वसूली को लेकर वीडियो तैयार किया। किसानों का कहना है कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि उनके द्वारा बताई जा रही समस्या प्रशासन और आम लोगों के सामने आ सके।
वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। स्थानीय स्तर पर लोग इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्धारित शुल्क 15 रुपये है तो पांच रुपये अतिरिक्त लिए जाने की शिकायत की जांच क्यों न की जाए।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी होगा।
किसानों ने कार्रवाई और जांच की मांग उठाई
किसानों का कहना है कि खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए पहले ही विभिन्न सरकारी कामों में समय और संसाधन खर्च होते हैं। ऐसे में छोटे-छोटे सरकारी दस्तावेजों के लिए भी यदि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि देनी पड़े तो यह उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता है।
किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि खतौनी के लिए वास्तविक शुल्क कितना निर्धारित है तथा यदि कहीं उससे अधिक राशि ली जा रही है तो उसका कारण क्या है।
किसानों का यह भी कहना है कि तहसील में आने वाले लोगों को विभिन्न दस्तावेजों और सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति कम होगी और अतिरिक्त राशि लिए जाने की शिकायतों पर भी रोक लग सकती है।
तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
खतौनी जैसे राजस्व दस्तावेजों को लेकर सामने आई शिकायत ने तहसील स्तर पर संचालित व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता जरूरी है। यदि किसी सेवा के लिए शुल्क निर्धारित है तो लोगों से उसी के अनुरूप राशि ली जानी चाहिए।
मामले को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच का परिणाम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि जांच में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग भी उठ सकती है।
वहीं, यदि अतिरिक्त राशि लेने के आरोप किसी अन्य शुल्क या प्रक्रिया से संबंधित पाए जाते हैं तो प्रशासन को किसानों को उसकी स्पष्ट जानकारी देनी होगी। इससे गलतफहमी की स्थिति समाप्त हो सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा
सोशल मीडिया आज स्थानीय समस्याओं को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। राजापुर तहसील से जुड़ा यह वीडियो भी इसी वजह से लोगों तक तेजी से पहुंचा। वीडियो में किसानों की ओर से अतिरिक्त रकम लिए जाने का आरोप लगाया गया है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामले की चर्चा शुरू हो गई।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि और उसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए प्रशासनिक जांच इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
किसानों की मांग है कि राजापुर तहसील में खतौनी सहित अन्य राजस्व अभिलेखों को प्राप्त करने की प्रक्रिया और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए। साथ ही, यदि किसी कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लेने की शिकायत सही पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
किसानों को पारदर्शी व्यवस्था का इंतजार
राजापुर तहसील में सामने आई यह शिकायत केवल पांच रुपये के अतिरिक्त भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल भी जुड़ा हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्हें अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए अनावश्यक परेशानी या अतिरिक्त भुगतान का सामना नहीं करना चाहिए।
अब निगाहें तहसील प्रशासन की ओर हैं कि वह किसानों की शिकायत को किस तरह लेता है और क्या इस मामले की औपचारिक जांच कराई जाती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लिए जाने का आरोप सही है या इसके पीछे कोई अन्य प्रक्रिया अथवा शुल्क है।
फिलहाल किसानों द्वारा लगाए गए आरोप और वायरल वीडियो ने राजापुर तहसील की व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले की वास्तविकता सामने लाकर आवश्यक कदम उठाएगा और राजस्व अभिलेखों से जुड़ी सेवाओं में शुल्क तथा प्रक्रिया को लेकर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।