आयुष्मान कार्ड में परिवार का नाम न जुड़ने से परेशान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बेटी के इलाज में आ रही दिक्कत

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कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। हालांकि, योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचने में आ रही दिक्कतों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कानपुर देहात के सरवनखेड़ा विकासखंड क्षेत्र के इखलासपुर गांव की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनका आयुष्मान कार्ड तो बनाया गया, लेकिन परिवार के सदस्यों को उसमें शामिल नहीं किया गया। इसके चलते उनकी बीमार बेटी के उपचार को लेकर परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामला सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम कोरारी के मजरा इखलासपुर चितरीय का बताया जा रहा है। यहां कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सरोज सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज की सुविधा देने की बात कही गई थी। इस घोषणा से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों में उम्मीद जगी थी कि गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च का बोझ कम हो सकेगा।

लेकिन सरोज सिंह के अनुसार, जब आयुष्मान कार्ड बनवाया गया तो उसमें केवल उनका नाम दर्ज हुआ। उनके परिवार के अन्य सदस्यों को कार्ड की सुविधा से नहीं जोड़ा गया। उनका कहना है कि परिवार को योजना का लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दस्तावेज तैयार होने के बाद स्थिति अलग सामने आई।

बेटी के इलाज को लेकर बढ़ी चिंता

सरोज सिंह की बेटी निकिता सिंह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या से जूझ रही हैं। परिवार के मुताबिक निकिता को लीवर और किडनी से जुड़ी परेशानी है और उनके उपचार के लिए लगातार चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में इलाज का खर्च परिवार के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सरोज सिंह का कहना है कि यदि परिवार के सदस्यों को भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा में शामिल किया जाता, तो बेटी के इलाज में काफी मदद मिल सकती थी। बीमारी के उपचार के दौरान होने वाले विभिन्न खर्चों के बीच सरकारी स्वास्थ्य योजना परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है।

उन्होंने बताया कि इसी उम्मीद में उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विभागीय स्तर पर जानकारी लेने का प्रयास किया। उनका कहना है कि उन्होंने सरवनखेड़ा ब्लॉक स्थित सीएससी से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से उन्हें उनकी समस्या का कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिल सका।

योजना के लाभ को लेकर उठे सवाल

सरोज सिंह की समस्या केवल एक परिवार की परेशानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी सामने लाती है कि सरकारी योजना की घोषणा के बाद उसका वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक किस प्रकार पहुंच रहा है। किसी योजना का उद्देश्य तभी पूरा माना जा सकता है, जब पात्र व्यक्ति को निर्धारित सुविधा समय पर और बिना अनावश्यक परेशानी के उपलब्ध हो।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य लाभार्थियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा को लेकर बनाई गई सुविधा यदि तकनीकी या दस्तावेजी प्रक्रिया में अटक जाती है तो संबंधित कर्मचारी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सरोज सिंह का कहना है कि सरकार ने यदि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का निर्णय लिया है तो संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिवार के पात्र सदस्यों का नाम भी रिकॉर्ड में दर्ज हो और उन्हें योजना का लाभ मिल सके।

गंभीर बीमारी के बीच परिवार की चिंता

निकिता सिंह की बीमारी के कारण परिवार की चिंता और बढ़ गई है। लीवर और किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में समय पर चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलने में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो परिवार के सामने इलाज की व्यवस्था करना कठिन हो सकता है।

सरोज सिंह का कहना है कि वह अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन आयुष्मान कार्ड में परिवार के सदस्य का नाम नहीं होने से उन्हें परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि वह संबंधित कार्यालयों में संपर्क कर चुकी हैं, फिर भी अभी तक समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।

सरकारी घोषणा को धरातल पर उतारने की मांग

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके परिवार की पात्रता की जांच कराई जाए और यदि नियमों के अनुसार परिवार के सदस्य योजना के दायरे में आते हैं तो उनका नाम आयुष्मान कार्ड में जोड़ा जाए।

उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं की घोषणा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब जरूरतमंद लोगों को उसका लाभ मिले। कागजों पर सुविधा उपलब्ध होने और वास्तव में उसका लाभ मिलने के बीच किसी प्रकार की बाधा नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों से यह भी अपेक्षा जताई है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आयुष्मान योजना से संबंधित प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। यदि परिवार के सदस्यों को जोड़ने के लिए अलग से कोई दस्तावेज, सत्यापन या प्रक्रिया जरूरी है तो उसकी जानकारी संबंधित लाभार्थी को दी जानी चाहिए, ताकि वह समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सके।

अन्य कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा

सरोज सिंह की शिकायत सामने आने के बाद यह विषय अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि योजना के तहत परिवार के सदस्यों को लाभ देने का प्रावधान है, तो सभी संबंधित लाभार्थियों को अपने आयुष्मान कार्ड और परिवार के सदस्यों की पात्रता की जानकारी समय रहते जांच लेनी चाहिए।

वहीं, यदि किसी पात्र लाभार्थी को कार्ड बनाने या परिवार के सदस्य का नाम जोड़ने में समस्या आती है तो संबंधित विभाग से लिखित रूप में जानकारी प्राप्त करना उपयोगी हो सकता है। इससे समस्या के समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सरोज सिंह की मांग भी यही है कि उनकी समस्या को केवल व्यक्तिगत शिकायत न मानकर सरकारी स्वास्थ्य सुविधा के क्रियान्वयन से जुड़े मामले के रूप में देखा जाए। उनका कहना है कि योजना का लाभ जरूरतमंद परिवार तक पहुंचना चाहिए, खासकर उस समय जब परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो।

निष्कर्ष

कानपुर देहात के सरवनखेड़ा क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरोज सिंह की परेशानी ने आयुष्मान कार्ड में परिवार के सदस्यों को जोड़ने से जुड़े मुद्दे को सामने ला दिया है। उनकी बेटी निकिता सिंह की स्वास्थ्य समस्या के बीच परिवार चाहता है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ वास्तविक रूप से उपलब्ध हो।

अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर यह स्पष्ट करें कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के परिवार के लिए निर्धारित स्वास्थ्य सुविधा के तहत कौन-कौन से सदस्य पात्र हैं और उनके नाम कार्ड में जोड़ने की प्रक्रिया क्या है। यदि परिवार पात्र है, तो आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे न केवल सरोज सिंह के परिवार को राहत मिल सकती है, बल्कि अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी योजना का लाभ लेने में स्पष्टता मिलेगी।

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आयुष्मान कार्ड में परिवार का नाम न जुड़ने से परेशान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बेटी के इलाज में आ रही दिक्कत

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 27, 2026

कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। हालांकि, योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचने में आ रही दिक्कतों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कानपुर देहात के सरवनखेड़ा विकासखंड क्षेत्र के इखलासपुर गांव की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनका आयुष्मान कार्ड तो बनाया गया, लेकिन परिवार के सदस्यों को उसमें शामिल नहीं किया गया। इसके चलते उनकी बीमार बेटी के उपचार को लेकर परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामला सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम कोरारी के मजरा इखलासपुर चितरीय का बताया जा रहा है। यहां कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सरोज सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज की सुविधा देने की बात कही गई थी। इस घोषणा से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों में उम्मीद जगी थी कि गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च का बोझ कम हो सकेगा।

लेकिन सरोज सिंह के अनुसार, जब आयुष्मान कार्ड बनवाया गया तो उसमें केवल उनका नाम दर्ज हुआ। उनके परिवार के अन्य सदस्यों को कार्ड की सुविधा से नहीं जोड़ा गया। उनका कहना है कि परिवार को योजना का लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दस्तावेज तैयार होने के बाद स्थिति अलग सामने आई।

बेटी के इलाज को लेकर बढ़ी चिंता

सरोज सिंह की बेटी निकिता सिंह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या से जूझ रही हैं। परिवार के मुताबिक निकिता को लीवर और किडनी से जुड़ी परेशानी है और उनके उपचार के लिए लगातार चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में इलाज का खर्च परिवार के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सरोज सिंह का कहना है कि यदि परिवार के सदस्यों को भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा में शामिल किया जाता, तो बेटी के इलाज में काफी मदद मिल सकती थी। बीमारी के उपचार के दौरान होने वाले विभिन्न खर्चों के बीच सरकारी स्वास्थ्य योजना परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है।

उन्होंने बताया कि इसी उम्मीद में उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विभागीय स्तर पर जानकारी लेने का प्रयास किया। उनका कहना है कि उन्होंने सरवनखेड़ा ब्लॉक स्थित सीएससी से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से उन्हें उनकी समस्या का कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिल सका।

योजना के लाभ को लेकर उठे सवाल

सरोज सिंह की समस्या केवल एक परिवार की परेशानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी सामने लाती है कि सरकारी योजना की घोषणा के बाद उसका वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक किस प्रकार पहुंच रहा है। किसी योजना का उद्देश्य तभी पूरा माना जा सकता है, जब पात्र व्यक्ति को निर्धारित सुविधा समय पर और बिना अनावश्यक परेशानी के उपलब्ध हो।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य लाभार्थियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा को लेकर बनाई गई सुविधा यदि तकनीकी या दस्तावेजी प्रक्रिया में अटक जाती है तो संबंधित कर्मचारी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सरोज सिंह का कहना है कि सरकार ने यदि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का निर्णय लिया है तो संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिवार के पात्र सदस्यों का नाम भी रिकॉर्ड में दर्ज हो और उन्हें योजना का लाभ मिल सके।

गंभीर बीमारी के बीच परिवार की चिंता

निकिता सिंह की बीमारी के कारण परिवार की चिंता और बढ़ गई है। लीवर और किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में समय पर चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलने में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो परिवार के सामने इलाज की व्यवस्था करना कठिन हो सकता है।

सरोज सिंह का कहना है कि वह अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन आयुष्मान कार्ड में परिवार के सदस्य का नाम नहीं होने से उन्हें परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि वह संबंधित कार्यालयों में संपर्क कर चुकी हैं, फिर भी अभी तक समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।

सरकारी घोषणा को धरातल पर उतारने की मांग

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके परिवार की पात्रता की जांच कराई जाए और यदि नियमों के अनुसार परिवार के सदस्य योजना के दायरे में आते हैं तो उनका नाम आयुष्मान कार्ड में जोड़ा जाए।

उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं की घोषणा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब जरूरतमंद लोगों को उसका लाभ मिले। कागजों पर सुविधा उपलब्ध होने और वास्तव में उसका लाभ मिलने के बीच किसी प्रकार की बाधा नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों से यह भी अपेक्षा जताई है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आयुष्मान योजना से संबंधित प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। यदि परिवार के सदस्यों को जोड़ने के लिए अलग से कोई दस्तावेज, सत्यापन या प्रक्रिया जरूरी है तो उसकी जानकारी संबंधित लाभार्थी को दी जानी चाहिए, ताकि वह समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सके।

अन्य कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा

सरोज सिंह की शिकायत सामने आने के बाद यह विषय अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि योजना के तहत परिवार के सदस्यों को लाभ देने का प्रावधान है, तो सभी संबंधित लाभार्थियों को अपने आयुष्मान कार्ड और परिवार के सदस्यों की पात्रता की जानकारी समय रहते जांच लेनी चाहिए।

वहीं, यदि किसी पात्र लाभार्थी को कार्ड बनाने या परिवार के सदस्य का नाम जोड़ने में समस्या आती है तो संबंधित विभाग से लिखित रूप में जानकारी प्राप्त करना उपयोगी हो सकता है। इससे समस्या के समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सरोज सिंह की मांग भी यही है कि उनकी समस्या को केवल व्यक्तिगत शिकायत न मानकर सरकारी स्वास्थ्य सुविधा के क्रियान्वयन से जुड़े मामले के रूप में देखा जाए। उनका कहना है कि योजना का लाभ जरूरतमंद परिवार तक पहुंचना चाहिए, खासकर उस समय जब परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो।

निष्कर्ष

कानपुर देहात के सरवनखेड़ा क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरोज सिंह की परेशानी ने आयुष्मान कार्ड में परिवार के सदस्यों को जोड़ने से जुड़े मुद्दे को सामने ला दिया है। उनकी बेटी निकिता सिंह की स्वास्थ्य समस्या के बीच परिवार चाहता है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ वास्तविक रूप से उपलब्ध हो।

अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर यह स्पष्ट करें कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के परिवार के लिए निर्धारित स्वास्थ्य सुविधा के तहत कौन-कौन से सदस्य पात्र हैं और उनके नाम कार्ड में जोड़ने की प्रक्रिया क्या है। यदि परिवार पात्र है, तो आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे न केवल सरोज सिंह के परिवार को राहत मिल सकती है, बल्कि अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी योजना का लाभ लेने में स्पष्टता मिलेगी।