दुर्गा पूजा से पहले अयोध्या में मूर्तिकार के फरार होने से बढ़ी चिंता, 105 प्रतिमाओं का निर्माण अधूरा
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
अयोध्या। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच अयोध्या में मूर्ति निर्माण से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने पूजा समितियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक, दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे मूर्तिकार उत्तम पाल पर एडवांस

रकम लेने के बाद अचानक गायब होने का आरोप है। उनके लापता होने के बाद करीब 105 दुर्गा प्रतिमाओं का काम अधूरा रह गया है। पूजा का समय नजदीक आने के कारण समितियों के सामने अब अधूरी प्रतिमाओं को समय पर पूरा कराने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बताया जा रहा है कि उत्तम पाल ने अलग-अलग पूजा समितियों के लिए बड़ी संख्या में दुर्गा प्रतिमाएं बनाने का काम लिया था। प्रतिमाओं के निर्माण के लिए संबंधित पक्षों से अग्रिम धनराशि भी ली गई थी। निर्माण कार्य आगे बढ़ने के बाद अचानक उनके संपर्क से बाहर होने की बात सामने आई। इसके बाद समितियों के पदाधिकारियों और आयोजकों के बीच बेचैनी बढ़ गई।
105 प्रतिमाओं का काम अधूरा
मिली जानकारी के अनुसार, उत्तम पाल द्वारा तैयार की जा रही लगभग 105 दुर्गा प्रतिमाएं अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी हैं। इनमें से कई प्रतिमाओं का ढांचा और मूर्तिकला का प्रमुख हिस्सा तैयार हो चुका है, लेकिन रंग-रोगन, सजावट और अंतिम रूप देने जैसे महत्वपूर्ण काम बाकी बताए जा रहे हैं।
दुर्गा पूजा के आयोजन में प्रतिमाओं को समय पर तैयार कराकर पूजा स्थल तक पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में मूर्तिकार के अचानक गायब होने की खबर सामने आने के बाद आयोजकों को समय की चिंता सताने लगी है। पूजा समितियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधूरी प्रतिमाओं को निर्धारित समय के भीतर किस तरह अंतिम रूप दिया जाए।
70 से 80 प्रतिशत तक तैयार बताई गईं प्रतिमाएं
केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष मनोज जायसवाल के अनुसार, अधिकांश प्रतिमाएं करीब 70 से 80 प्रतिशत तक तैयार हो चुकी हैं। यानी प्रतिमाओं का काफी काम पूरा हो चुका है और अब मुख्य रूप से उन्हें अंतिम रूप देने की आवश्यकता है।
उनके मुताबिक, यदि शेष काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराया जाए तो प्रतिमाओं को पूजा से पहले तैयार करने की संभावना बनी हुई है। इसी उद्देश्य से समिति और प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
अधूरी प्रतिमाओं को पूरा करने के लिए दूसरे स्थानीय कारीगरों की मदद लेने की योजना पर भी चर्चा की जा रही है। इससे उन पूजा समितियों को राहत मिल सकती है, जिनकी प्रतिमाएं निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
दूसरे मूर्तिकार को जिम्मेदारी देने की तैयारी
उत्तम पाल के उपलब्ध नहीं होने के बाद अधूरी प्रतिमाओं को पूरा कराने के लिए बस्ती निवासी संदीप प्रजापति को विकल्प के तौर पर जिम्मेदारी देने की बात सामने आई है। उनका सहयोग लेकर अधूरे कार्य को जल्द पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।
मूर्ति निर्माण केवल प्रतिमा तैयार करने तक सीमित नहीं रहता। इसमें मिट्टी से आकृति तैयार करने, सूखने के बाद आवश्यक सुधार, रंग-रोगन, वस्त्र एवं आभूषणों की सजावट और अंतिम रूप देने जैसे कई चरण शामिल होते हैं। ऐसे में पहले से तैयार प्रतिमाओं को पूरा करने के लिए अनुभवी कारीगरों की आवश्यकता होती है।
यदि संदीप प्रजापति और अन्य कारीगरों की टीम को काम सौंपा जाता है, तो अधूरी प्रतिमाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिल सकती है। समिति की प्राथमिकता फिलहाल यही बताई जा रही है कि किसी भी पूजा समिति को प्रतिमा के कारण परेशानी न उठानी पड़े।
पुलिस ने शुरू की मूर्तिकार की तलाश
मामला सामने आने के बाद अयोध्या पुलिस उत्तम पाल की तलाश कर रही है। जानकारी के अनुसार पुलिस ने उसके मूल स्थान और संबंधित लोगों से संपर्क साधने की कोशिश की है। उत्तम पाल पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस की ओर से उसके गांव के प्रधान से भी संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा उसके संभावित ठिकानों और संपर्क सूत्रों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक उत्तम पाल का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है।
बताया गया है कि गोरखपुर जीआरपी से भी संपर्क किया गया है, ताकि उसके संभावित आवागमन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सके। पुलिस अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाकर उसके बारे में पता लगाने का प्रयास कर रही है।
मूर्ति निर्माण स्थल पर प्रशासन की निगरानी
दुर्गा पूजा से जुड़ी तैयारियों को देखते हुए प्रशासन ने मूर्ति निर्माण स्थल पर भी निगरानी बढ़ाई है। जानकारी के मुताबिक, वहां पुलिस के साथ राजस्वकर्मियों की तैनाती की गई है। इसका उद्देश्य निर्माण कार्य को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना और किसी तरह की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने देना है।
प्रशासन की निगरानी में अब अधूरी प्रतिमाओं को पूरा कराने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कारीगरों और समिति के पदाधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश भी की जा रही है।
पूजा समितियों के सामने समय की चुनौती
दुर्गा पूजा का पर्व नजदीक होने के कारण आयोजकों के पास बहुत अधिक समय नहीं बचा है। प्रतिमाओं को तैयार करने के बाद उन्हें पूजा स्थलों तक पहुंचाने, पंडालों में स्थापित करने और अन्य धार्मिक तैयारियां पूरी करने में भी समय लगता है।
ऐसे में 105 प्रतिमाओं का अधूरा रहना एक बड़ी व्यवस्थागत चुनौती माना जा रहा है। हालांकि प्रतिमाओं का अधिकांश हिस्सा तैयार होने की जानकारी से समितियों को कुछ राहत मिली है। यदि अंतिम चरण का काम तेजी से पूरा कराया जाता है तो स्थिति संभाली जा सकती है।
समिति और प्रशासन की कोशिश बताई जा रही है कि किसी भी परिस्थिति में पूजा आयोजन प्रभावित न हो। इसके लिए वैकल्पिक मूर्तिकारों की सहायता लेने और अधूरे काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी स्थिति
उत्तम पाल के अचानक गायब होने के मामले में पुलिस की जांच जारी है। एडवांस राशि लेने के बाद उनके लापता होने के आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस उनके बारे में जानकारी जुटाने और संभावित स्थानों पर संपर्क करने में लगी है।
दूसरी ओर, पूजा समितियां प्रतिमाओं को समय पर पूरा कराने की तैयारी में जुटी हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रशासन, समिति और स्थानीय कारीगरों के बीच समन्वय बनाकर काम आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
दुर्गा पूजा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से जुड़ी तैयारियों में प्रतिमाओं की समय पर उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अयोध्या में सामने आए इस मामले ने आयोजकों के सामने अचानक नई चुनौती जरूर खड़ी कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस फरार बताए जा रहे मूर्तिकार तक कब पहुंचती है और अधूरी 105 प्रतिमाओं को पूजा से पहले किस तरह अंतिम रूप दिया जाता है।