अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान: सपा सरकार बनी तो पुरानी पेंशन पर काम, शिक्षामित्रों और मदरसा शिक्षकों के लिए भी किए वादे
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
लखनऊ, 29 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कर्मचारियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, मदरसा शिक्षकों और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी पार्टी की प्रस्तावित नीतियों को सामने रखा। उनके बयान में खास तौर पर पुरानी पेंशन योजना, शिक्षामित्रों की स्थिति, मदरसा शिक्षकों के लंबित वेतन और संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का उल्लेख रहा।

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो कर्मचारियों की पुरानी मांगों पर काम किया जाएगा। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की बात कही और संकेत दिया कि इस संबंध में वित्तीय व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि आगामी घोषणापत्र में इस विषय को शामिल किया जाएगा और योजना के वित्तीय पक्ष पर पहले से मंथन किया जाएगा।
पुरानी पेंशन योजना को लेकर बड़ा वादा
सरकारी कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता में कहा कि सत्ता में आने की स्थिति में उनकी पार्टी पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की दिशा में कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि योजना को लेकर कर्मचारियों के संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की गई है और वित्तीय प्रबंधन के पहलू पर विचार किया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने संभावित मुद्दों और नीतिगत प्राथमिकताओं को जनता के सामने रखने लगे हैं। पुरानी पेंशन का मुद्दा विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा हुआ है, इसलिए अखिलेश यादव के बयान को चुनावी एजेंडे के एक हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, योजना को लागू करने की वास्तविक प्रक्रिया, पात्रता और वित्तीय ढांचे की विस्तृत जानकारी पार्टी के आगामी घोषणापत्र और नीतिगत दस्तावेज में स्पष्ट हो सकती है।
शिक्षामित्रों को शिक्षक का सम्मान देने की बात
प्रेसवार्ता में शिक्षामित्रों से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में सम्मान देने और उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में काम किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने शिक्षामित्रों को बेहतर सुविधाएं और सम्मान देने की बात कही।
शिक्षामित्र लंबे समय से सेवा संबंधी परिस्थितियों, मानदेय और नियमित शिक्षक के समान सुविधाओं को लेकर अपनी मांगें उठाते रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने बयान में इस वर्ग की समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया। उनके अनुसार सरकार बनने पर शिक्षामित्रों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी राजनीतिक दल की ओर से किया गया चुनावी वादा भविष्य की सरकारी नीति का प्रस्ताव होता है। इसे लागू करने की अंतिम स्थिति सत्ता गठन, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक प्रक्रिया और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगी।
आधुनिक मदरसा शिक्षकों के बकाया वेतन का मुद्दा
अखिलेश यादव ने आधुनिक मदरसा शिक्षकों के वेतन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर आधुनिक मदरसा शिक्षकों के वेतन को बहाल करने और बकाया भुगतान की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने मदरसों से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान की भी बात कही।
रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश यादव ने मदरसा शिक्षा से जुड़े मामलों में सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठाए और कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर इन संस्थानों तथा शिक्षकों से संबंधित समस्याओं को दूर करने का प्रयास करेगी।
इस घोषणा का संबंध केवल वेतन भुगतान से नहीं बल्कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक प्रशासनिक और शैक्षिक मुद्दों से भी बताया गया है। आने वाले समय में सपा के घोषणापत्र में इस संबंध में अधिक विस्तृत प्रावधान सामने आने की संभावना है।
संस्कृत विद्यालयों की समस्याएं दूर करने का आश्वासन
अखिलेश यादव ने संस्कृत विद्यालयों को भी अपनी घोषणाओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर संस्कृत विद्यालयों से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों में उनके हवाले से संस्कृत शिक्षकों और विद्यालयों से जुड़े विषयों पर भी कदम उठाने की बात कही गई है।
उत्तर प्रदेश में संस्कृत शिक्षा का अपना अलग संस्थागत ढांचा है। ऐसे में इन विद्यालयों में शिक्षकों की सेवा शर्तों, संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं। अखिलेश यादव की घोषणा में इन्हीं समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया है।
वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मानदेय की बात
प्रेसवार्ता में वित्तविहीन शिक्षकों का विषय भी सामने आया। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बनने की स्थिति में वित्तविहीन संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के लिए मानदेय की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और कुछ सेवा संबंधी प्रावधानों को बहाल करने की बात भी मीडिया रिपोर्टों में दर्ज की गई है।
इस घोषणा से स्पष्ट है कि सपा ने अपने प्रस्तावित चुनावी एजेंडे में शिक्षा क्षेत्र के अलग-अलग वर्गों को शामिल करने की कोशिश की है। सरकारी कर्मचारी, शिक्षामित्र, वित्तविहीन शिक्षक, मदरसा शिक्षक और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े कर्मचारी—इन सभी के मुद्दों को अलग-अलग तरीके से उठाया गया।
चुनाव से पहले शिक्षा और कर्मचारियों पर फोकस
अखिलेश यादव की सोमवार की प्रेसवार्ता को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। बैठक के बाद उन्होंने पार्टी के चुनावी मुद्दों और विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक पुरानी पेंशन, शिक्षामित्रों, मदरसा शिक्षकों, संस्कृत विद्यालयों और वित्तविहीन शिक्षकों से जुड़े विषय उनके संबोधन के प्रमुख हिस्सों में रहे।
इन घोषणाओं के बाद अब निगाहें समाजवादी पार्टी के आगामी घोषणापत्र पर रहेंगी। घोषणापत्र में इन प्रस्तावों के लिए वित्तीय स्रोत, क्रियान्वयन की समयसीमा, पात्रता और प्रशासनिक व्यवस्था जैसी जानकारियां सामने आने पर इन योजनाओं का स्वरूप अधिक स्पष्ट होगा।
फिलहाल अखिलेश यादव की ओर से दिए गए बयानों का मुख्य केंद्र कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े पुराने मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देना है। पुरानी पेंशन की बहाली, शिक्षामित्रों को शिक्षक का सम्मान, मदरसा शिक्षकों के लंबित वेतन का भुगतान और संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं के समाधान जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार बनने की स्थिति में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।