35 वर्ष बाद फिर जीवंत हुईं राम जन्मभूमि आंदोलन की स्मृतियां, श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने कमला रानी से की मुलाकात

0

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

गाजियाबाद, 28 सितंबर 2026। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संघर्ष और जनजागरण के दौर की पुरानी यादें उस समय एक बार फिर सामने आ गईं, जब सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर, गाजियाबाद के पीठाधीश्वर एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने कविनगर स्थित श्रीमती कमला रानी के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। करीब तीन दशक से अधिक समय बाद हुई इस आत्मीय भेंट के दौरान आंदोलन के दिनों की अनेक स्मृतियों पर चर्चा हुई।

श्रीमती कमला रानी राम जन्मभूमि आंदोलन के उस दौर में श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज की सहयोगी रही थीं। वर्ष 1990-91 में जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में जनजागरण गतिविधियां चल रही थीं, तब संत समाज, धर्माचार्यों और रामभक्तों को जोड़ने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी क्रम में महाराज श्री भी धर्माचार्य संपर्क प्रमुख के दायित्व से जुड़े हुए थे।

गांव-गांव पहुंचा था रामनाम संकीर्तन

उस समय श्रीमती कमला रानी ने पिलखुवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में धार्मिक एवं जनजागरण कार्यक्रमों के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। गांवों में रामनाम संकीर्तन, भजन, धार्मिक सभाओं और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया गया।

इन कार्यक्रमों में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण समाज की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। रामनाम संकीर्तन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक आंदोलन से जुड़ा संदेश पहुंचा। श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज के अनुसार, उस दौर में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अनेक लोगों ने अपने समय और संसाधनों को जनजागरण के लिए समर्पित किया था।

श्रीमती कमला रानी भी इसी सामाजिक और धार्मिक गतिविधि का हिस्सा थीं। उनके प्रयासों से पिलखुवा सहित आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए और रामभक्तों के बीच संपर्क मजबूत हुआ।

आंदोलन के दौरान कारावास की भी झेली कठिनाई

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज, श्रीमती कमला रानी तथा कई अन्य साधु-संतों और रामभक्तों को गिरफ्तार किया गया था। आंदोलन से जुड़े लोगों को करीब 40 दिनों तक कारागार में रहना पड़ा।

महाराज श्री ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जेल में रहने के दौरान परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन रामभक्तों का मनोबल कमजोर नहीं हुआ। कारावास में भी भजन और संकीर्तन के माध्यम से भगवान श्रीराम का स्मरण किया जाता रहा।

लगभग 35 वर्ष बाद जब आंदोलन के उस दौर के दो सहयोगी आमने-सामने बैठे तो स्वाभाविक रूप से जेल के दिन, ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए जनसंपर्क, धार्मिक कार्यक्रम और उस समय की परिस्थितियां चर्चा का विषय बनीं। लंबे अंतराल के बाद हुई इस मुलाकात ने पुराने संबंधों और स्मृतियों को फिर से जीवंत कर दिया।

85 वर्ष की उम्र में भी परिवार कर रहा सेवा

श्रीमती कमला रानी की आयु अब करीब 85 वर्ष बताई गई है। मुलाकात के दौरान श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिवार के सदस्यों से उनके संबंध में बातचीत की।

महाराज श्री ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर परिवार द्वारा जिस श्रद्धा और सेवाभाव से उनकी देखभाल की जा रही है, वह सराहनीय है। उन्होंने परिवार के सदस्यों की सेवा भावना की प्रशंसा की और भगवान श्री दूधेश्वर नाथ महादेव से श्रीमती कमला रानी के अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की प्रार्थना की।

मुलाकात का वातावरण बेहद आत्मीय रहा। वर्षों पुराने सहयोगियों ने उस दौर से जुड़ी कई घटनाओं और अनुभवों को याद किया। इस दौरान परिवार के लोगों ने भी पुराने संस्मरणों के बारे में जानकारी साझा की।

परिवार के सदस्यों से भी हुई आत्मीय मुलाकात

इस अवसर पर श्रीमती कमला रानी के सुपुत्र एवं नगर पालिका परिषद पिलखुवा के अध्यक्ष श्री विभू बंसल से भी श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज की मुलाकात हुई। परिवार की ओर से महाराज श्री का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में श्री गौरव गर्ग तथा यशोदा अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े श्री आशीष अग्रवाल भी मौजूद रहे। सभी ने महाराज श्री के साथ पुराने प्रसंगों और धार्मिक गतिविधियों को लेकर बातचीत की।

महाराज श्री ने परिवार के साथ भोजन-प्रसाद भी ग्रहण किया। उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को सुख, समृद्धि और धर्ममय जीवन का आशीर्वाद दिया। मुलाकात के दौरान धार्मिक आस्था, पुराने संबंध और आंदोलन के दिनों की यादों का विशेष भाव देखने को मिला।

त्याग और संघर्ष को किया याद

श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अनेक संतों, कारसेवकों, महिलाओं और रामभक्तों ने लंबे समय तक अपनी भूमिका निभाई।

महाराज श्री ने श्रीमती कमला रानी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उस समय गांव-गांव जाकर रामनाम संकीर्तन और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करना आसान कार्य नहीं था। महिलाओं और ग्रामीण समाज को जोड़ने में ऐसी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक-सामाजिक अभियान के पीछे केवल प्रमुख चेहरों का योगदान नहीं होता, बल्कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले असंख्य लोगों का परिश्रम भी जुड़ा रहता है। श्रीमती कमला रानी जैसी महिलाओं ने अपने स्तर पर लोगों को जोड़ने और धार्मिक चेतना को मजबूत करने का काम किया।

35 साल बाद मुलाकात बनी स्मृतियों का अवसर

करीब 35 वर्षों के अंतराल के बाद हुई यह मुलाकात अपने आप में विशेष रही। एक ओर उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी श्रीमती कमला रानी थीं, तो दूसरी ओर आंदोलन के पुराने सहयोगी श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज उनके घर पहुंचे थे।

इस मुलाकात में उस समय के सामाजिक वातावरण, गांवों में हुए कार्यक्रमों, रामनाम संकीर्तन और कारावास के दिनों की यादें साझा की गईं। पुराने सहयोगियों के बीच हुई बातचीत ने बीते दौर की कई घटनाओं को फिर से चर्चा में ला दिया।

महाराज श्री ने इस भेंट को केवल व्यक्तिगत मुलाकात तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार, यह उन लोगों के योगदान को याद करने का अवसर भी था, जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अपने स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोगों की स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए उस दौर के सामाजिक और धार्मिक वातावरण को समझने का माध्यम बन सकती हैं। श्रीमती कमला रानी के परिवार ने भी इस मुलाकात को भावनात्मक और स्मरणीय अवसर बताया।

इस प्रकार, गाजियाबाद में हुई यह भेंट करीब तीन दशक पुराने संबंधों को फिर से सामने ले आई। गांवों में किए गए जनजागरण से लेकर कारावास के दिनों तक की यादों ने मुलाकात को खास बना दिया। श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज और श्रीमती कमला रानी की यह मुलाकात राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पुराने सहयोगियों के बीच बने संबंधों और उस दौर की स्मृतियों को फिर से जीवंत करने वाला अवसर रही।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें

ताज़ा खबरें • ब्रेकिंग न्यूज़ • नेशनल और इंटरनेशनल अपडेट

35 वर्ष बाद फिर जीवंत हुईं राम जन्मभूमि आंदोलन की स्मृतियां, श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने कमला रानी से की मुलाकात

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 29, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

गाजियाबाद, 28 सितंबर 2026। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संघर्ष और जनजागरण के दौर की पुरानी यादें उस समय एक बार फिर सामने आ गईं, जब सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर, गाजियाबाद के पीठाधीश्वर एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने कविनगर स्थित श्रीमती कमला रानी के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। करीब तीन दशक से अधिक समय बाद हुई इस आत्मीय भेंट के दौरान आंदोलन के दिनों की अनेक स्मृतियों पर चर्चा हुई।

श्रीमती कमला रानी राम जन्मभूमि आंदोलन के उस दौर में श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज की सहयोगी रही थीं। वर्ष 1990-91 में जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में जनजागरण गतिविधियां चल रही थीं, तब संत समाज, धर्माचार्यों और रामभक्तों को जोड़ने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी क्रम में महाराज श्री भी धर्माचार्य संपर्क प्रमुख के दायित्व से जुड़े हुए थे।

गांव-गांव पहुंचा था रामनाम संकीर्तन

उस समय श्रीमती कमला रानी ने पिलखुवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में धार्मिक एवं जनजागरण कार्यक्रमों के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। गांवों में रामनाम संकीर्तन, भजन, धार्मिक सभाओं और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया गया।

इन कार्यक्रमों में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण समाज की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। रामनाम संकीर्तन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक आंदोलन से जुड़ा संदेश पहुंचा। श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज के अनुसार, उस दौर में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अनेक लोगों ने अपने समय और संसाधनों को जनजागरण के लिए समर्पित किया था।

श्रीमती कमला रानी भी इसी सामाजिक और धार्मिक गतिविधि का हिस्सा थीं। उनके प्रयासों से पिलखुवा सहित आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए और रामभक्तों के बीच संपर्क मजबूत हुआ।

आंदोलन के दौरान कारावास की भी झेली कठिनाई

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज, श्रीमती कमला रानी तथा कई अन्य साधु-संतों और रामभक्तों को गिरफ्तार किया गया था। आंदोलन से जुड़े लोगों को करीब 40 दिनों तक कारागार में रहना पड़ा।

महाराज श्री ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जेल में रहने के दौरान परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन रामभक्तों का मनोबल कमजोर नहीं हुआ। कारावास में भी भजन और संकीर्तन के माध्यम से भगवान श्रीराम का स्मरण किया जाता रहा।

लगभग 35 वर्ष बाद जब आंदोलन के उस दौर के दो सहयोगी आमने-सामने बैठे तो स्वाभाविक रूप से जेल के दिन, ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए जनसंपर्क, धार्मिक कार्यक्रम और उस समय की परिस्थितियां चर्चा का विषय बनीं। लंबे अंतराल के बाद हुई इस मुलाकात ने पुराने संबंधों और स्मृतियों को फिर से जीवंत कर दिया।

85 वर्ष की उम्र में भी परिवार कर रहा सेवा

श्रीमती कमला रानी की आयु अब करीब 85 वर्ष बताई गई है। मुलाकात के दौरान श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिवार के सदस्यों से उनके संबंध में बातचीत की।

महाराज श्री ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर परिवार द्वारा जिस श्रद्धा और सेवाभाव से उनकी देखभाल की जा रही है, वह सराहनीय है। उन्होंने परिवार के सदस्यों की सेवा भावना की प्रशंसा की और भगवान श्री दूधेश्वर नाथ महादेव से श्रीमती कमला रानी के अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की प्रार्थना की।

मुलाकात का वातावरण बेहद आत्मीय रहा। वर्षों पुराने सहयोगियों ने उस दौर से जुड़ी कई घटनाओं और अनुभवों को याद किया। इस दौरान परिवार के लोगों ने भी पुराने संस्मरणों के बारे में जानकारी साझा की।

परिवार के सदस्यों से भी हुई आत्मीय मुलाकात

इस अवसर पर श्रीमती कमला रानी के सुपुत्र एवं नगर पालिका परिषद पिलखुवा के अध्यक्ष श्री विभू बंसल से भी श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज की मुलाकात हुई। परिवार की ओर से महाराज श्री का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में श्री गौरव गर्ग तथा यशोदा अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े श्री आशीष अग्रवाल भी मौजूद रहे। सभी ने महाराज श्री के साथ पुराने प्रसंगों और धार्मिक गतिविधियों को लेकर बातचीत की।

महाराज श्री ने परिवार के साथ भोजन-प्रसाद भी ग्रहण किया। उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को सुख, समृद्धि और धर्ममय जीवन का आशीर्वाद दिया। मुलाकात के दौरान धार्मिक आस्था, पुराने संबंध और आंदोलन के दिनों की यादों का विशेष भाव देखने को मिला।

त्याग और संघर्ष को किया याद

श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अनेक संतों, कारसेवकों, महिलाओं और रामभक्तों ने लंबे समय तक अपनी भूमिका निभाई।

महाराज श्री ने श्रीमती कमला रानी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उस समय गांव-गांव जाकर रामनाम संकीर्तन और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करना आसान कार्य नहीं था। महिलाओं और ग्रामीण समाज को जोड़ने में ऐसी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक-सामाजिक अभियान के पीछे केवल प्रमुख चेहरों का योगदान नहीं होता, बल्कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले असंख्य लोगों का परिश्रम भी जुड़ा रहता है। श्रीमती कमला रानी जैसी महिलाओं ने अपने स्तर पर लोगों को जोड़ने और धार्मिक चेतना को मजबूत करने का काम किया।

35 साल बाद मुलाकात बनी स्मृतियों का अवसर

करीब 35 वर्षों के अंतराल के बाद हुई यह मुलाकात अपने आप में विशेष रही। एक ओर उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी श्रीमती कमला रानी थीं, तो दूसरी ओर आंदोलन के पुराने सहयोगी श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज उनके घर पहुंचे थे।

इस मुलाकात में उस समय के सामाजिक वातावरण, गांवों में हुए कार्यक्रमों, रामनाम संकीर्तन और कारावास के दिनों की यादें साझा की गईं। पुराने सहयोगियों के बीच हुई बातचीत ने बीते दौर की कई घटनाओं को फिर से चर्चा में ला दिया।

महाराज श्री ने इस भेंट को केवल व्यक्तिगत मुलाकात तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार, यह उन लोगों के योगदान को याद करने का अवसर भी था, जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अपने स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोगों की स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए उस दौर के सामाजिक और धार्मिक वातावरण को समझने का माध्यम बन सकती हैं। श्रीमती कमला रानी के परिवार ने भी इस मुलाकात को भावनात्मक और स्मरणीय अवसर बताया।

इस प्रकार, गाजियाबाद में हुई यह भेंट करीब तीन दशक पुराने संबंधों को फिर से सामने ले आई। गांवों में किए गए जनजागरण से लेकर कारावास के दिनों तक की यादों ने मुलाकात को खास बना दिया। श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज और श्रीमती कमला रानी की यह मुलाकात राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पुराने सहयोगियों के बीच बने संबंधों और उस दौर की स्मृतियों को फिर से जीवंत करने वाला अवसर रही।