जिला कारागार उरई में विधिक जागरूकता शिविर, बंदियों की समस्याओं पर हुई चर्चा
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन की ओर से जिला कारागार उरई में साप्ताहिक निरीक्षण एवं विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने कारागार का भ्रमण कर विभिन्न बैरकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, कानूनी मामलों और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता के बारे में जानकारी हासिल की।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने जेल प्रशासन से बंदियों की मौजूदा स्थिति और उनके न्यायालयों में चल रहे मामलों की जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से ऐसे बंदियों के संबंध में जानकारी जुटाने पर जोर दिया, जिनके पक्ष में सक्षम न्यायालय द्वारा जमानत का आदेश पारित किया जा चुका है, लेकिन आवश्यक जमानतगीर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे अभी भी जेल से बाहर नहीं आ सके हैं।
जमानत मंजूर होने के बाद भी जेल में बंद बंदियों की मांगी सूची
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसे सभी बंदियों की सूची तैयार कर तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए, जिनकी जमानत अदालत से स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर की व्यवस्था न हो पाने के कारण उनकी रिहाई लंबित है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों के मामलों में भी नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन बंदियों के पास जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं, उनके मामलों में जिला अधिकार प्राप्त समिति, जालौन के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई कराई जाए।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल आर्थिक कठिनाइयों अथवा आवश्यक कानूनी सहायता के अभाव में कोई पात्र बंदी अनावश्यक रूप से जेल में न रहे। सचिव ने संबंधित अधिकारियों से ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी और समयबद्ध कार्रवाई करने को कहा।
बंदियों से बातचीत कर जानी कानूनी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान श्रीमती मनाली चन्द्रा ने अलग-अलग बैरकों में जाकर बंदियों से बातचीत की। उन्होंने उनके मुकदमों की स्थिति, अधिवक्ता की उपलब्धता और न्यायालय में होने वाली पैरवी के संबंध में जानकारी प्राप्त की। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें अपने मामलों से संबंधित आवश्यक कानूनी जानकारी और सहायता मिल रही है।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता उपलब्ध नहीं हैं अथवा जो किसी कारण से अपने मुकदमे की समुचित पैरवी नहीं करा पा रहे हैं, उन्हें नियमानुसार निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति न्याय पाने में बाधा नहीं बननी चाहिए और पात्र बंदियों को विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
महिला बंदियों और बच्चों की व्यवस्थाओं की ली जानकारी
कारागार निरीक्षण के दौरान महिला बंदियों की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया। सचिव ने महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की सुविधाओं के बारे में जेल प्रशासन से जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं, भोजन, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने जेल प्रशासन से कहा कि महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की आवश्यक जरूरतों का नियमानुसार ध्यान रखा जाए। स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने तथा बच्चों की देखभाल से जुड़े आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
लीगल एड हेल्प डेस्क का निरीक्षण
जिला कारागार के मुलाकाती क्षेत्र में बंदियों और उनके परिजनों की सहायता के लिए स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का भी सचिव ने निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध कराई जा रही कानूनी सहायता की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।
इस दौरान कुछ बंदियों से उनकी व्यक्तिगत समस्याओं और जेल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर बातचीत की गई। पूछताछ में बंदियों ने किसी विशेष समस्या की जानकारी नहीं दी। सचिव ने विधिक सहायता व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने और जरूरतमंद बंदियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जेल के मुख्य द्वार पर मरम्मत का कार्य भी चल रहा था। संबंधित व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया।
प्ली बार्गेनिंग और लीगल एड क्लीनिक पर हुआ विधिक जागरूकता कार्यक्रम
कारागार निरीक्षण के बाद प्ली बार्गेनिंग एवं लीगल एड क्लीनिक के लाभ और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने की।
शिविर में बंदियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई। डिप्टी चीफ एलएडीसी श्री उमेश मिश्रा ने संविधान के अनुच्छेद 39ए के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराना तथा सभी लोगों के लिए न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है और अपनी आर्थिक स्थिति के कारण न्यायिक प्रक्रिया से वंचित नहीं होना चाहिए।
समानता और विधिक अधिकारों की दी जानकारी
असिस्टेंट एलएडीसी श्री अभिषेक पाठक ने शिविर में संविधान के अनुच्छेद 14 और 22(1) से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कानून के समक्ष समानता तथा गिरफ्तार व्यक्ति के कानूनी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझाया।
बंदियों को बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति को कानून के तहत अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने विधिक सहायता की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी।
प्ली बार्गेनिंग की अवधारणा समझाई
शिविर में प्ली बार्गेनिंग की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कुछ निर्धारित परिस्थितियों में प्ली बार्गेनिंग न्यायिक प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल बनाने का एक कानूनी माध्यम है। इसका उद्देश्य पात्र मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचने, न्यायालय के समय और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा मामलों के निस्तारण में सहायता करना है।
कार्यक्रम में बताया गया कि भारत में प्ली बार्गेनिंग से संबंधित व्यवस्था आपराधिक कानून में वर्ष 2005 के संशोधन के माध्यम से लाई गई थी। बंदियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी कानूनी विकल्प का उपयोग संबंधित कानून और न्यायालय में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाता है।
विधिक जागरूकता से बढ़ती है अधिकारों की समझ
जिला कारागार में आयोजित इस तरह के विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, उपलब्ध विधिक सेवाओं और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी देना है। खासकर ऐसे बंदियों के लिए निःशुल्क विधिक सहायता महत्वपूर्ण है, जो निजी अधिवक्ता की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं हैं।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बंदियों की समस्याओं को सुनना और पात्र मामलों में आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराना विधिक सेवा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेल प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच समन्वय के माध्यम से जरूरतमंद बंदियों तक कानूनी सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने बंदियों को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी विधिक समस्या की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक प्रशान्त मौर्य, कारापाल प्रदीप कुमार, उपकारापाल अमर सिंह, सुखवती देवी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के लिपिक शुभम् शुक्ला सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।