कठुआ में CISF कैंप में साथी जवानों पर फायरिंग, असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार की मौत

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कठुआ, 30 सितंबर 2026। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली इलाके में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कैंप में हुई फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर की शाम CISF के जवानों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद एक जवान ने अपने ही साथियों पर गोली चला दी। घटना में असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार CISF कर्मियों की मौत हो गई। पुलिस और CISF की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

AI Generated photo

सेवा जलविद्युत परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे जवान

यह घटना कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र के मश्का इलाके में स्थित सेवा जलविद्युत परियोजना से जुड़े CISF कैंप में हुई। अधिकारियों के अनुसार, यहां CISF के जवान परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे। यह इलाका हिमाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक स्थित है।

मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे कैंप में अचानक तनाव की स्थिति पैदा हुई। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया है कि कुछ जवानों के बीच बहस हुई और इसके बाद स्थिति गंभीर हो गई। इसी दौरान एक CISF कर्मी ने अपने साथियों पर फायरिंग कर दी। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे।

चार CISF कर्मियों की मौत

घटना में घायल हुए चार जवानों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि इलाज के दौरान चारों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है।

इनमें असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे परियोजना में कंपनी कमांडर के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके साथ सब-इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल की भी जान चली गई। एक ही सुरक्षा इकाई के चार कर्मियों की मौत से CISF में शोक का माहौल है।

घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने कैंप और घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है।

आरोपी जवान पुलिस की हिरासत में

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, फायरिंग के आरोप में CISF के एक हेड कांस्टेबल को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्टों में आरोपी की पहचान अभिदेश कुमार के रूप में बताई गई है। घटना के बाद उसे पुलिस के हवाले किया गया। मामले में इस्तेमाल की गई सरकारी सेवा हथियार को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। शुरुआती रिपोर्टों में जवानों के बीच विवाद की बात कही गई है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

इसलिए घटना के कारणों को लेकर सामने आ रही अलग-अलग जानकारियों को फिलहाल जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

CISF ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए

घटना की गंभीरता को देखते हुए CISF मुख्यालय ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य घटना के पूरे घटनाक्रम, उससे पहले की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच करना है। CISF के महानिदेशक भी मामले की निगरानी कर रहे हैं।

जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि विवाद किस वजह से शुरू हुआ, घटनास्थल पर उस समय कौन-कौन से कर्मी मौजूद थे और घटना को रोकने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए। इसके साथ ही कैंप में सुरक्षा प्रोटोकॉल और हथियारों की निगरानी से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा सकती है।

पुलिस जांच भी जारी

कठुआ पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रारंभिक जानकारी जुटाई। घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

किसी भी सुरक्षा बल के कैंप में इस तरह की घटना सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना से अलग महत्व रखती है। ऐसे स्थानों पर तैनात कर्मियों के बीच अनुशासन, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपसी समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यही वजह है कि इस मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ विभागीय जांच भी की जा रही है।

घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कठुआ की घटना ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। सुरक्षा बलों के जवान कठिन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण संस्थानों और परियोजनाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में किसी कैंप के भीतर हिंसक घटना होना गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षा प्रश्न खड़े करता है।

हालांकि इस घटना के आधार पर पूरे सुरक्षा बल की व्यवस्था पर कोई सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

विशेषज्ञों के स्तर पर सुरक्षा बलों में तनाव प्रबंधन, शिकायत निवारण और अधिकारियों तथा जवानों के बीच संवाद जैसे विषयों पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। कठुआ की घटना के बाद भी इन पहलुओं की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

परिवारों में शोक का माहौल

घटना में जान गंवाने वाले चारों कर्मियों के परिवारों के लिए यह बेहद कठिन समय है। जिन जवानों की ड्यूटी महत्वपूर्ण परियोजना की सुरक्षा में लगी थी, वे अचानक इस दुखद घटना का शिकार हो गए।

CISF और प्रशासन की ओर से मृतक कर्मियों के परिवारों तक आवश्यक सहायता और आधिकारिक प्रक्रिया से जुड़ी कार्रवाई की जा रही है। जवानों की सेवा और उनके परिवारों की स्थिति को देखते हुए आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल कठुआ की इस घटना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच अभी जारी है। शुरुआती जानकारी में आपसी विवाद को घटना से पहले की परिस्थिति बताया गया है, लेकिन विवाद की वास्तविक वजह और घटनाओं का पूरा क्रम आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

CISF की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी और पुलिस जांच से यह पता चलने की उम्मीद है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं।

कठुआ के बसोहली क्षेत्र में हुई इस घटना में चार CISF कर्मियों की मौत ने सुरक्षा बलों और उनके परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान जांच पूरी करने, घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने और कैंप की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पर है।

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कठुआ में CISF कैंप में साथी जवानों पर फायरिंग, असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार की मौत

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 30, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कठुआ, 30 सितंबर 2026। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली इलाके में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कैंप में हुई फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर की शाम CISF के जवानों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद एक जवान ने अपने ही साथियों पर गोली चला दी। घटना में असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार CISF कर्मियों की मौत हो गई। पुलिस और CISF की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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सेवा जलविद्युत परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे जवान

यह घटना कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र के मश्का इलाके में स्थित सेवा जलविद्युत परियोजना से जुड़े CISF कैंप में हुई। अधिकारियों के अनुसार, यहां CISF के जवान परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे। यह इलाका हिमाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक स्थित है।

मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे कैंप में अचानक तनाव की स्थिति पैदा हुई। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया है कि कुछ जवानों के बीच बहस हुई और इसके बाद स्थिति गंभीर हो गई। इसी दौरान एक CISF कर्मी ने अपने साथियों पर फायरिंग कर दी। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे।

चार CISF कर्मियों की मौत

घटना में घायल हुए चार जवानों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि इलाज के दौरान चारों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है।

इनमें असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे परियोजना में कंपनी कमांडर के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके साथ सब-इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल की भी जान चली गई। एक ही सुरक्षा इकाई के चार कर्मियों की मौत से CISF में शोक का माहौल है।

घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने कैंप और घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है।

आरोपी जवान पुलिस की हिरासत में

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, फायरिंग के आरोप में CISF के एक हेड कांस्टेबल को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्टों में आरोपी की पहचान अभिदेश कुमार के रूप में बताई गई है। घटना के बाद उसे पुलिस के हवाले किया गया। मामले में इस्तेमाल की गई सरकारी सेवा हथियार को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। शुरुआती रिपोर्टों में जवानों के बीच विवाद की बात कही गई है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

इसलिए घटना के कारणों को लेकर सामने आ रही अलग-अलग जानकारियों को फिलहाल जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

CISF ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए

घटना की गंभीरता को देखते हुए CISF मुख्यालय ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य घटना के पूरे घटनाक्रम, उससे पहले की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच करना है। CISF के महानिदेशक भी मामले की निगरानी कर रहे हैं।

जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि विवाद किस वजह से शुरू हुआ, घटनास्थल पर उस समय कौन-कौन से कर्मी मौजूद थे और घटना को रोकने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए। इसके साथ ही कैंप में सुरक्षा प्रोटोकॉल और हथियारों की निगरानी से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा सकती है।

पुलिस जांच भी जारी

कठुआ पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रारंभिक जानकारी जुटाई। घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

किसी भी सुरक्षा बल के कैंप में इस तरह की घटना सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना से अलग महत्व रखती है। ऐसे स्थानों पर तैनात कर्मियों के बीच अनुशासन, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपसी समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यही वजह है कि इस मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ विभागीय जांच भी की जा रही है।

घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कठुआ की घटना ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। सुरक्षा बलों के जवान कठिन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण संस्थानों और परियोजनाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में किसी कैंप के भीतर हिंसक घटना होना गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षा प्रश्न खड़े करता है।

हालांकि इस घटना के आधार पर पूरे सुरक्षा बल की व्यवस्था पर कोई सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

विशेषज्ञों के स्तर पर सुरक्षा बलों में तनाव प्रबंधन, शिकायत निवारण और अधिकारियों तथा जवानों के बीच संवाद जैसे विषयों पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। कठुआ की घटना के बाद भी इन पहलुओं की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

परिवारों में शोक का माहौल

घटना में जान गंवाने वाले चारों कर्मियों के परिवारों के लिए यह बेहद कठिन समय है। जिन जवानों की ड्यूटी महत्वपूर्ण परियोजना की सुरक्षा में लगी थी, वे अचानक इस दुखद घटना का शिकार हो गए।

CISF और प्रशासन की ओर से मृतक कर्मियों के परिवारों तक आवश्यक सहायता और आधिकारिक प्रक्रिया से जुड़ी कार्रवाई की जा रही है। जवानों की सेवा और उनके परिवारों की स्थिति को देखते हुए आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल कठुआ की इस घटना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच अभी जारी है। शुरुआती जानकारी में आपसी विवाद को घटना से पहले की परिस्थिति बताया गया है, लेकिन विवाद की वास्तविक वजह और घटनाओं का पूरा क्रम आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

CISF की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी और पुलिस जांच से यह पता चलने की उम्मीद है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं।

कठुआ के बसोहली क्षेत्र में हुई इस घटना में चार CISF कर्मियों की मौत ने सुरक्षा बलों और उनके परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान जांच पूरी करने, घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने और कैंप की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पर है।