जर्जर बिजली तार और क्षतिग्रस्त पोल बने खतरा, बरहा के ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई (जालौन)। विकासखंड डकोर क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरहा जालौन में विद्युत व्यवस्था की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। गांव में कई स्थानों पर पुराने और जर्जर विद्युत तार ढीले होकर लटक रहे हैं, जबकि कुछ विद्युत पोल क्षतिग्रस्त अवस्था में खड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के कारण किसी भी समय गंभीर हादसा हो सकता है। खासकर खेतों के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइनों को लेकर किसानों में सबसे अधिक चिंता है, क्योंकि इस समय खेतों में धान की फसल तैयार हो रही है।

ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान एवं जिला पंचायत प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में जिलाधिकारी को पत्र देकर गांव की विद्युत व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जर्जर तारों को हटाकर सुरक्षित केबल लगाने तथा पुराने और टूटे विद्युत पोलों को बदलने की मांग उठाई है।
खेतों और आबादी के बीच से गुजर रहे पुराने तार
ग्रामीणों के अनुसार बरहा गांव के कई हिस्सों में विद्युत आपूर्ति के लिए लगाए गए तार काफी पुराने हो चुके हैं। समय बीतने के साथ तारों की स्थिति खराब होती गई और कई जगह वे नीचे की ओर झुक गए हैं। कुछ स्थानों पर तारों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं होने तथा उनके आसपास पेड़-पौधों की मौजूदगी से भी खतरा बढ़ जाता है।
गांव के लोगों का कहना है कि विद्युत लाइनें केवल खेतों के ऊपर से ही नहीं गुजरतीं, बल्कि कुछ स्थानों पर रिहायशी क्षेत्रों के आसपास भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। ऐसे में तेज हवा, बारिश या अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों में तारों के टूटने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे क्षेत्र का विद्युत विभाग द्वारा स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और जहां भी लाइन या पोल खराब स्थिति में हों, उन्हें चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाए।
फसल तैयार होने से किसानों की बढ़ी चिंता
इस समय गांव और आसपास के क्षेत्रों में किसानों के खेतों में धान की फसल तैयार खड़ी है। कुछ दिनों बाद फसल पकने के बाद कटाई का कार्य शुरू होना है। ऐसे समय में बिजली के जर्जर तारों को लेकर किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत तारों में होने वाली स्पार्किंग से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंच सकता है। यदि किसी खेत के ऊपर से गुजर रही लाइन में खराबी के कारण चिंगारी निकलती है और वह तैयार फसल तक पहुंचती है तो आग तेजी से फैल सकती है। खेतों में धान सहित अन्य फसलें बड़ी मात्रा में खड़ी होने के कारण आग लगने की स्थिति में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि एक फसल तैयार करने में उन्हें कई महीनों तक मेहनत करनी पड़ती है। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च करने के बाद जब फसल तैयार होती है, तब बिजली लाइन से होने वाली एक छोटी सी लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। इसलिए विद्युत विभाग को फसल कटाई से पहले ही आवश्यक सुधार कार्य पूरा करना चाहिए।
टूटे पोल भी बने परेशानी
ग्रामीणों ने केवल तारों की समस्या ही नहीं, बल्कि विद्युत पोलों की खराब हालत को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। उनका कहना है कि गांव में कई विद्युत पोल पुराने और क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर पोल टूटने की स्थिति में हैं, जबकि उन पर विद्युत तार लगे हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार कमजोर पोलों पर विद्युत तारों का भार बना हुआ है। ऐसे में यदि किसी कारण से पोल गिरता है तो आसपास मौजूद लोगों, पशुओं, मकानों और खेतों को नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्युत विभाग की टीम गांव में पहुंचकर सभी पोलों की स्थिति का परीक्षण करे और जो पोल सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें तत्काल हटाकर नए पोल लगाए जाएं।
बंच केबल लगाने की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में जर्जर और खुले विद्युत तारों के स्थान पर बंच केबल यानी एबी केबल लगाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षित विद्युत व्यवस्था के लिए पुराने तारों को हटाकर आधुनिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित प्रणाली अपनाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक बंच केबल लगाए जाने से खुले तारों से जुड़ी कई समस्याओं को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही जिन स्थानों पर विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हैं, वहां नए पोल लगाने की आवश्यकता है। ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग केवल अस्थायी मरम्मत तक सीमित न रहे, बल्कि समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से संबंधित विद्युत अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग समय रहते गांव की विद्युत लाइनों और पोलों की मरम्मत कर देता है तो संभावित दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई है कि शिकायत को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। गांव में विद्युत विभाग की टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए और जरूरत के अनुसार तार, केबल तथा विद्युत पोल बदलने का काम कराया जाए।
जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा मामला
बरहा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल बिजली आपूर्ति से संबंधित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर, बच्चे और ग्रामीण आबादी सभी विद्युत लाइनों के आसपास से गुजरते हैं। यदि किसी समय तार टूटकर जमीन पर गिरता है या कोई क्षतिग्रस्त पोल गिर जाता है तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात के बाद और फसल कटाई से पहले विद्युत व्यवस्था की विशेष जांच कराई जाए। जहां भी खतरे की स्थिति है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि विद्युत व्यवस्था सुरक्षित होने से किसानों को अपनी फसल को लेकर राहत मिलेगी और ग्रामीणों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
किसानों की मेहनत बचाने की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि किसानों के लिए तैयार फसल वर्षभर की मेहनत और आर्थिक निवेश का परिणाम होती है। ऐसे में विद्युत तारों की खराब स्थिति के कारण यदि आग जैसी घटना होती है तो इसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इसी को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत विभाग द्वारा समय रहते जर्जर तारों को बदलने, सुरक्षित बंच केबल लगाने और क्षतिग्रस्त पोलों को नए पोल से बदलने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि बरहा गांव की विद्युत व्यवस्था का व्यापक सर्वे कराकर कमियों की सूची तैयार की जाए और चरणबद्ध तरीके से सभी आवश्यक कार्य पूरे किए जाएं। इससे संभावित विद्युत दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और किसानों की खड़ी फसल की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बरहा के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए गए पत्र के माध्यम से उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश देगा। अब ग्रामीणों की नजर विद्युत विभाग की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते जर्जर तारों और क्षतिग्रस्त पोलों को बदल दिया जाता है तो गांव में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ किसानों और आम ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है।