प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में कथित रिश्वतखोरी का आरोप, चुर्खी के ग्रामीणों ने डीएम से लगाई जांच की गुहार
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई (जालौन)। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की सरकारी व्यवस्था पर कालपी तहसील क्षेत्र के ग्राम चुर्खी के ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। गांव निवासी शिवदास पुत्र स्व. हरदयाल ने अन्य ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर योजना की पात्रता सूची में कथित अनियमितता और रिश्वतखोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और वास्तविक पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाया जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता शिवदास के अनुसार ग्राम पंचायत चुर्खी में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर पारदर्शिता नहीं बरती गई। उनका आरोप है कि पात्रता सूची तैयार करने में ग्राम पंचायत सचिव और पंचायत मित्र की भूमिका रही है। ग्रामीणों का दावा है कि सूची में कुछ ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो कथित तौर पर योजना के मानकों के अनुरूप पात्र नहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के नाम सूची से बाहर किए जाने का आरोप लगाया गया है।
गरीब परिवारों के नाम हटाने का आरोप
शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास रहने के लिए पर्याप्त पक्का आवास नहीं है। कुछ परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, जबकि कुछ परिवारों में दिव्यांग, बीमार और बुजुर्ग सदस्य भी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे परिवार सरकारी आवास योजना के माध्यम से सहायता मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन कथित तौर पर उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया।
शिवदास और उनके साथ पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पात्र परिवारों के नाम सूची में शामिल कराने अथवा अपात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए कथित रूप से पांच हजार से लेकर दस हजार रुपये तक की रकम मांगे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
पात्रता सूची की जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की वर्तमान पात्रता सूची की गहनता से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर मामले का निस्तारण करने के बजाय गांव में पहुंचकर प्रत्येक संबंधित परिवार का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक भौतिक सत्यापन के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि किन परिवारों के पास पहले से पक्का मकान है और किन परिवारों को वास्तव में आवास की आवश्यकता है। इसी तरह परिवार की आर्थिक स्थिति, आवास की स्थिति और योजना के निर्धारित मानकों के आधार पर पात्रता का परीक्षण किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सूची में शामिल प्रत्येक लाभार्थी की पात्रता की जांच की जाए। यदि जांच के दौरान किसी ऐसे व्यक्ति का नाम सामने आता है, जो योजना के नियमों के अनुसार पात्र नहीं है, तो उसके नाम को नियमानुसार हटाया जाए। साथ ही जिन वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के नाम कथित रूप से सूची से बाहर रह गए हैं, उनकी पात्रता की जांच कर उन्हें नियमानुसार योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
कथित लेनदेन की भी जांच की मांग
शिकायत का एक प्रमुख बिंदु कथित रिश्वतखोरी के आरोप हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों से आवास योजना की सूची में नाम शामिल कराने के नाम पर धनराशि लिए जाने की बात कही गई। इसी कारण उन्होंने मामले की केवल लाभार्थी सूची तक सीमित जांच न कर कथित लेनदेन से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी सरकारी योजना में लाभ दिलाने के बदले धन की मांग की जाती है, तो इससे शासन की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की समस्या से जूझ रहे पात्र परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव और निर्धारित नियमों के आधार पर मिलना चाहिए।
दोषी मिलने पर कार्रवाई की मांग
शिवदास ने जिलाधिकारी से मांग की है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा जाए। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार की गई सूची, पात्रता से संबंधित अभिलेखों और लाभार्थियों की वास्तविक आवासीय स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी कर्मचारी या पंचायत स्तर के जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका अनियमितता में सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने विशेष रूप से ग्राम पंचायत सचिव और पंचायत मित्र की भूमिका की जांच कराने की मांग रखी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देना है। इसलिए पात्रता तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि यदि प्रभावशाली या अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिल जाता है और जरूरतमंद परिवार पीछे रह जाते हैं तो इससे योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
चुर्खी गांव से सामने आई इस शिकायत में लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायतकर्ताओं के कथन पर आधारित हैं। इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से जांच कराए जाने पर लाभार्थी सूची, संबंधित दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि योजना के चयन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से जांच कराएंगे। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होने पर पात्र और अपात्र लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई संभव होगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि पात्रता का निर्धारण निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार होना चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंद परिवार को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े।
फिलहाल चुर्खी के ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामले में प्रशासनिक जांच और कार्रवाई का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पात्रता सूची में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों में कितनी सच्चाई है।