पौधरोपण के बाद संरक्षण पर प्रशासन का फोकस, हर ग्राम पंचायत में तैनात होगा ‘वन मित्र’

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे पौधरोपण अभियान को अब केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रशासन ने पौधरोपण के बाद उनकी सुरक्षा, नियमित देखभाल और जीवित रहने की स्थिति की निगरानी को अभियान का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी समीर ने अधिकारियों को वर्षाकाल 2026 के दौरान कराए गए पौधरोपण की शत-प्रतिशत जियो टैगिंग 30 सितंबर तक पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पौधरोपण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर विकसित हों और आने वाले वर्षों में पर्यावरण को लाभ पहुंचाएं। इसके लिए प्रशासन ने पिछले तीन वर्षों के दौरान विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा किए गए पौधरोपण का भी सत्यापन कराने पर जोर दिया है। संबंधित अधिकारियों को पौधों की स्थिति की नियमित निगरानी करने और जहां आवश्यक हो, वहां संरक्षण के अतिरिक्त इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्यावरण संबंधी समितियों की बैठक में हुई विस्तृत समीक्षा

विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति तथा जिला पर्यावरण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में चल रहे पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान पौधरोपण, पौधों की सुरक्षा, वन क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण और ठोस कचरा प्रबंधन सहित कई विषयों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों की सहभागिता जरूरी है। जब स्थानीय स्तर पर लोगों को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा, तभी पौधरोपण अभियान का स्थायी प्रभाव दिखाई देगा।

30 सितंबर तक पूरी होगी पौधरोपण की जियो टैगिंग

बैठक में वर्षाकाल 2026 के दौरान कराए गए पौधरोपण की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन स्थानों पर पौधे लगाए गए हैं, उनकी शत-प्रतिशत जियो टैगिंग 30 सितंबर तक पूरी की जाए।

जियो टैगिंग के माध्यम से पौधरोपण वाले स्थानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। इससे भविष्य में संबंधित स्थानों की पहचान करने, पौधों की स्थिति की निगरानी करने और पौधरोपण के दावों का सत्यापन करने में सुविधा होगी। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पौधरोपण का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहे और इसकी निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।

तीन वर्षों के पौधरोपण का होगा सत्यापन

बैठक में केवल इस वर्ष लगाए गए पौधों की निगरानी तक ही बात सीमित नहीं रही। जिलाधिकारी ने पिछले तीन वर्षों में हुए पौधरोपण का भी सत्यापन कराने के निर्देश दिए।

इस सत्यापन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पूर्व में लगाए गए पौधों में से कितने पौधे वर्तमान समय में सुरक्षित हैं और कितने विकसित हो चुके हैं। साथ ही जिन स्थानों पर पौधे खराब हो गए हैं या उनकी देखभाल में कमी सामने आती है, वहां आवश्यक कदम उठाने पर भी जोर दिया गया।

प्रशासन का मानना है कि पौधरोपण की सफलता का आकलन केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि लगाए गए पौधों में कितने लंबे समय तक जीवित रहते हैं और भविष्य में हरित क्षेत्र के विस्तार में योगदान देते हैं।

प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनेगा ‘वन मित्र’

पर्यावरण संरक्षण को गांवों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक ‘वन मित्र’ बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर पर्यावरण और वन संरक्षण की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

‘वन मित्र’ अपने क्षेत्र में लगाए गए पौधों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सहयोग करेगा। इसके अलावा वन क्षेत्र की सुरक्षा, पौधों को होने वाले नुकसान तथा वन्यजीवों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में भी उसकी भूमिका रहेगी।

स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से प्रशासन को जमीनी स्तर की स्थिति की जानकारी अपेक्षाकृत तेजी से मिल सकेगी। इससे पौधों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कार्रवाई की संभावना भी बढ़ेगी।

नगर निकायों में विकसित होंगे ‘कपि वन’

बैठक में शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में इस वर्ष ‘कपि वन’ विकसित करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में उपलब्ध खाली अथवा उपयोग में न आ रही भूमि को चिह्नित कर वहां सघन वन विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया। इससे ऐसी जमीनों का पर्यावरणीय उपयोग किया जा सकेगा और स्थानीय स्तर पर हरित क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सघन वन विकसित करने का उद्देश्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसे हरित क्षेत्र तैयार करना है, जो लंबे समय तक स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान दें।

ठोस कचरा प्रबंधन पर भी प्रशासन गंभीर

बैठक में पौधरोपण के साथ-साथ ठोस कचरा प्रबंधन के विषय पर भी विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस अपशिष्ट के उचित प्रबंधन को जरूरी बताया।

उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झांसी को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम-2026 के प्रावधानों तथा सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

प्रशासन की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था मजबूत हो और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

विभागों के बीच समन्वय पर जोर

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में बहु-विभागीय समन्वय की आवश्यकता है। वन विभाग के साथ विकास, पंचायत, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, श्रम एवं रोजगार और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप कुमार ने जिले में वन क्षेत्र की स्थिति तथा वन विभाग की ओर से संचालित गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने वर्षाकाल 2026 में विभिन्न विभागों द्वारा कराए गए पौधरोपण की प्रगति से भी जिलाधिकारी को अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि पौधरोपण के बाद उसकी देखभाल को प्राथमिकता दी जाए और निर्धारित जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी एचएन प्रसाद, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार रामेन्द्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी गगनदीप, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद, जिला उद्यान अधिकारी परवेज खान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

पौधरोपण से आगे बढ़कर संरक्षण की ओर कदम

जालौन प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णयों से यह संकेत मिलता है कि जिले में पर्यावरण अभियान को अब केवल वार्षिक पौधरोपण कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है। पौधों की जियो टैगिंग, पुराने पौधरोपण का सत्यापन, ग्राम पंचायत स्तर पर ‘वन मित्र’ की व्यवस्था, नगर निकायों में ‘कपि वन’ और खाली भूमि पर सघन वन विकसित करने जैसे कदम संरक्षण की निरंतर व्यवस्था तैयार करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।

यदि इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो आने वाले समय में जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही स्थानीय लोगों की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान का रूप देने की संभावना भी मजबूत होगी।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन निर्देशों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी, ताकि पौधरोपण के आंकड़ों के साथ-साथ वास्तविक रूप से सुरक्षित और विकसित पौधों की संख्या भी बढ़े। यही पौधरोपण अभियान को दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

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पौधरोपण के बाद संरक्षण पर प्रशासन का फोकस, हर ग्राम पंचायत में तैनात होगा ‘वन मित्र’

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 29, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे पौधरोपण अभियान को अब केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रशासन ने पौधरोपण के बाद उनकी सुरक्षा, नियमित देखभाल और जीवित रहने की स्थिति की निगरानी को अभियान का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी समीर ने अधिकारियों को वर्षाकाल 2026 के दौरान कराए गए पौधरोपण की शत-प्रतिशत जियो टैगिंग 30 सितंबर तक पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पौधरोपण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर विकसित हों और आने वाले वर्षों में पर्यावरण को लाभ पहुंचाएं। इसके लिए प्रशासन ने पिछले तीन वर्षों के दौरान विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा किए गए पौधरोपण का भी सत्यापन कराने पर जोर दिया है। संबंधित अधिकारियों को पौधों की स्थिति की नियमित निगरानी करने और जहां आवश्यक हो, वहां संरक्षण के अतिरिक्त इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्यावरण संबंधी समितियों की बैठक में हुई विस्तृत समीक्षा

विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति तथा जिला पर्यावरण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में चल रहे पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान पौधरोपण, पौधों की सुरक्षा, वन क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण और ठोस कचरा प्रबंधन सहित कई विषयों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों की सहभागिता जरूरी है। जब स्थानीय स्तर पर लोगों को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा, तभी पौधरोपण अभियान का स्थायी प्रभाव दिखाई देगा।

30 सितंबर तक पूरी होगी पौधरोपण की जियो टैगिंग

बैठक में वर्षाकाल 2026 के दौरान कराए गए पौधरोपण की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन स्थानों पर पौधे लगाए गए हैं, उनकी शत-प्रतिशत जियो टैगिंग 30 सितंबर तक पूरी की जाए।

जियो टैगिंग के माध्यम से पौधरोपण वाले स्थानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। इससे भविष्य में संबंधित स्थानों की पहचान करने, पौधों की स्थिति की निगरानी करने और पौधरोपण के दावों का सत्यापन करने में सुविधा होगी। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पौधरोपण का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहे और इसकी निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।

तीन वर्षों के पौधरोपण का होगा सत्यापन

बैठक में केवल इस वर्ष लगाए गए पौधों की निगरानी तक ही बात सीमित नहीं रही। जिलाधिकारी ने पिछले तीन वर्षों में हुए पौधरोपण का भी सत्यापन कराने के निर्देश दिए।

इस सत्यापन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पूर्व में लगाए गए पौधों में से कितने पौधे वर्तमान समय में सुरक्षित हैं और कितने विकसित हो चुके हैं। साथ ही जिन स्थानों पर पौधे खराब हो गए हैं या उनकी देखभाल में कमी सामने आती है, वहां आवश्यक कदम उठाने पर भी जोर दिया गया।

प्रशासन का मानना है कि पौधरोपण की सफलता का आकलन केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि लगाए गए पौधों में कितने लंबे समय तक जीवित रहते हैं और भविष्य में हरित क्षेत्र के विस्तार में योगदान देते हैं।

प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनेगा ‘वन मित्र’

पर्यावरण संरक्षण को गांवों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक ‘वन मित्र’ बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर पर्यावरण और वन संरक्षण की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

‘वन मित्र’ अपने क्षेत्र में लगाए गए पौधों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सहयोग करेगा। इसके अलावा वन क्षेत्र की सुरक्षा, पौधों को होने वाले नुकसान तथा वन्यजीवों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में भी उसकी भूमिका रहेगी।

स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से प्रशासन को जमीनी स्तर की स्थिति की जानकारी अपेक्षाकृत तेजी से मिल सकेगी। इससे पौधों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कार्रवाई की संभावना भी बढ़ेगी।

नगर निकायों में विकसित होंगे ‘कपि वन’

बैठक में शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में इस वर्ष ‘कपि वन’ विकसित करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में उपलब्ध खाली अथवा उपयोग में न आ रही भूमि को चिह्नित कर वहां सघन वन विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया। इससे ऐसी जमीनों का पर्यावरणीय उपयोग किया जा सकेगा और स्थानीय स्तर पर हरित क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सघन वन विकसित करने का उद्देश्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसे हरित क्षेत्र तैयार करना है, जो लंबे समय तक स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान दें।

ठोस कचरा प्रबंधन पर भी प्रशासन गंभीर

बैठक में पौधरोपण के साथ-साथ ठोस कचरा प्रबंधन के विषय पर भी विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस अपशिष्ट के उचित प्रबंधन को जरूरी बताया।

उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झांसी को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम-2026 के प्रावधानों तथा सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

प्रशासन की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था मजबूत हो और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

विभागों के बीच समन्वय पर जोर

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में बहु-विभागीय समन्वय की आवश्यकता है। वन विभाग के साथ विकास, पंचायत, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, श्रम एवं रोजगार और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप कुमार ने जिले में वन क्षेत्र की स्थिति तथा वन विभाग की ओर से संचालित गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने वर्षाकाल 2026 में विभिन्न विभागों द्वारा कराए गए पौधरोपण की प्रगति से भी जिलाधिकारी को अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि पौधरोपण के बाद उसकी देखभाल को प्राथमिकता दी जाए और निर्धारित जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी एचएन प्रसाद, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार रामेन्द्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी गगनदीप, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद, जिला उद्यान अधिकारी परवेज खान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

पौधरोपण से आगे बढ़कर संरक्षण की ओर कदम

जालौन प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णयों से यह संकेत मिलता है कि जिले में पर्यावरण अभियान को अब केवल वार्षिक पौधरोपण कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है। पौधों की जियो टैगिंग, पुराने पौधरोपण का सत्यापन, ग्राम पंचायत स्तर पर ‘वन मित्र’ की व्यवस्था, नगर निकायों में ‘कपि वन’ और खाली भूमि पर सघन वन विकसित करने जैसे कदम संरक्षण की निरंतर व्यवस्था तैयार करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।

यदि इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो आने वाले समय में जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही स्थानीय लोगों की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान का रूप देने की संभावना भी मजबूत होगी।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन निर्देशों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी, ताकि पौधरोपण के आंकड़ों के साथ-साथ वास्तविक रूप से सुरक्षित और विकसित पौधों की संख्या भी बढ़े। यही पौधरोपण अभियान को दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगा।