डीएम की जनसुनवाई में त्वरित कार्रवाई, बुजुर्ग को कान की मशीन और जलभराव की समस्या के समाधान के निर्देश
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई। आम नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी की जनसुनवाई आयोजित की गई। जिलाधिकारी समीर ने अपने कार्यालय कक्ष से जिलास्तरीय अधिकारियों को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ते हुए दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की शिकायतें सुनीं। इस दौरान उन्होंने फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके की स्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई के दौरान अलग-अलग विभागों से संबंधित कई शिकायतें सामने आईं। इनमें स्वास्थ्य, जलभराव, रास्ते से संबंधित विवाद, पारिवारिक समस्याएं और अन्य जनहित के मामले शामिल रहे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायत को केवल औपचारिक रूप से दर्ज करने के बजाय उसकी वास्तविक स्थिति को समझकर समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
75 वर्षीय बुजुर्ग ने सुनने की समस्या बताई
जनसुनवाई में कुठौंद क्षेत्र से आए करीब 75 वर्षीय प्रताप शुक्ला ने अपनी सुनने की समस्या जिलाधिकारी के सामने रखी। उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र के कारण उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो गई है। आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देने के कारण उन्हें रोजमर्रा के कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बुजुर्ग की समस्या सुनने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को तत्काल संज्ञान में लिया। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि प्रताप शुक्ला को उसी दिन कार्यालय बुलाकर आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। जांच के बाद यदि कान की मशीन की आवश्यकता सामने आती है तो उन्हें आवश्यकतानुसार श्रवण यंत्र उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी के इस निर्देश से जनसुनवाई में मौजूद लोगों के बीच यह संदेश गया कि बुजुर्गों और जरूरतमंद नागरिकों से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर लिया जा सकता है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि स्वास्थ्य संबंधी मामलों में पात्र व्यक्ति को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बारिश के बाद जलभराव से ग्रामीण परेशान
जनसुनवाई में ग्राम दशहरी निवासी ज्ञान सिंह ने बारिश के बाद उत्पन्न जलभराव की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि हाल में हुई बारिश के कारण गांव में कई स्थानों पर पानी जमा हो गया है। नालियों की उचित निकासी नहीं होने से पानी लंबे समय तक जमा रहने की स्थिति बन गई है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
ग्रामीण की शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संबंधित अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने खंड विकास अधिकारी कदौरा को निर्देशित किया कि वह गांव पहुंचकर मौके का निरीक्षण करें और जलभराव की वास्तविक स्थिति का जायजा लें। इसके साथ ही आवश्यक कदम उठाकर पानी की निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रशासन का मानना है कि बारिश के बाद जलभराव की समस्या केवल आवागमन को प्रभावित नहीं करती, बल्कि लंबे समय तक पानी जमा रहने पर ग्रामीण क्षेत्र में अन्य परेशानियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में जल निकासी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त करना आवश्यक है।
चकरोड और पारिवारिक विवाद से जुड़ी शिकायतें भी पहुंचीं
जनसुनवाई में चकरोड से संबंधित शिकायतें भी अधिकारियों के समक्ष रखी गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में रास्तों और चकरोड से जुड़े विवादों का सीधा असर लोगों के आवागमन और कृषि कार्यों पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों को लेकर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तथ्यों की जांच करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा पारिवारिक कलह से संबंधित मामले भी जनसुनवाई में सामने आए। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक मामले को उसकी प्रकृति के अनुसार देखा जाए और निर्धारित प्रक्रिया के तहत समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण में सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी करना पर्याप्त नहीं है। जिन मामलों में मौके की वास्तविक स्थिति जानना आवश्यक हो, वहां अधिकारी या संबंधित कर्मचारी स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत का प्रभावी समाधान तभी संभव है जब शिकायत के पीछे मौजूद वास्तविक समस्या को समझा जाए। इसलिए अधिकारियों को शिकायतकर्ता की बात सुनने के साथ-साथ उपलब्ध तथ्यों की जांच भी करनी चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो। जिन मामलों में दूसरे विभागों की भूमिका हो, उनमें आपसी समन्वय बनाकर कार्रवाई पूरी की जाए।
जनसुनवाई को प्रभावी बनाने पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि जनसुनवाई में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी समस्या और उम्मीद के साथ प्रशासन के पास पहुंचता है। ऐसे में उसकी बात को ध्यानपूर्वक सुनना और समस्या का उचित समाधान तलाशना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फरियादियों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए। विशेष रूप से बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाएं और अन्य जरूरतमंद लोग अपनी समस्या लेकर जब सरकारी कार्यालय पहुंचते हैं तो उनकी परिस्थितियों को समझते हुए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि जनसुनवाई को केवल शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना और उनका व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करना है।
शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर
जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी शिकायत को जल्दबाजी में निस्तारित दिखाने के बजाय यह देखा जाए कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिली है या नहीं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहनी चाहिए। यदि किसी मामले में जांच की आवश्यकता है तो जांच पूरी करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। इसी प्रकार मौके पर समाधान संभव होने पर अनावश्यक रूप से मामले को लंबित न रखा जाए।
जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी द्वारा एक बुजुर्ग की स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर तत्काल निर्देश देना और बारिश से उत्पन्न जलभराव के मामले में मौके पर निरीक्षण कर निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश देना प्रशासन की प्राथमिकता को दर्शाता है।
आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए संबंधित अधिकारी शिकायत प्राप्त होते ही आवश्यक कार्रवाई शुरू करें।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास तभी मजबूत होगा जब शिकायतों पर कार्रवाई दिखाई देगी। इसके लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और समयबद्धता के साथ काम करना होगा।
कलेक्ट्रेट में आयोजित इस जनसुनवाई में सामने आए मामलों ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों के बीच समन्वय जरूरी है। स्वास्थ्य सुविधा से जुड़े मामले में चिकित्सा विभाग को कार्रवाई करनी है, जबकि जलभराव जैसी समस्या के लिए विकास विभाग और स्थानीय स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था को सक्रिय होना पड़ता है।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा करें और निस्तारण की स्थिति की जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि जिन मामलों में मौके पर कार्रवाई आवश्यक है, वहां बिना विलंब के निरीक्षण और आवश्यक व्यवस्था की जाए।
जनसुनवाई के अंत में जिलाधिकारी ने दोहराया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि नागरिकों को वास्तविक और समयबद्ध राहत उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनसमस्याओं को संवेदनशीलता से समझते हुए नियमों के दायरे में प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें। इससे आम नागरिकों का प्रशासन के प्रति भरोसा मजबूत होगा और सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।