बस्तर में बाढ़ से हालात गंभीर, वायुसेना ने 16 लोगों को किया एयरलिफ्ट

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जगदलपुर, 28 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लगातार हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश, नदियों में बढ़ते जलस्तर और पड़ोसी क्षेत्र में जलाशयों से छोड़े गए पानी के कारण कई निचले इलाकों में पानी भर गया। बाढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ सड़क संपर्क को भी प्रभावित किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्सों पर आवागमन बाधित होने से कई वाहन रास्ते में फंस गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया है। भारतीय वायुसेना की मदद से बाढ़ में फंसे 16 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।

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लगातार बारिश से बिगड़ी स्थिति

बस्तर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में लगातार कई दिनों तक भारी बारिश दर्ज की गई। बारिश का असर केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में बसे गांव भी इसकी चपेट में आ गए। लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। प्रशासन को कई संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारी बारिश के साथ पड़ोसी ओडिशा के कुछ जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद भी बस्तर क्षेत्र में जलस्तर पर दबाव बढ़ा। इसके चलते इंद्रावती नदी में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई।

खतरे के निशान से ऊपर पहुंची इंद्रावती

बस्तर की बाढ़ में इंद्रावती नदी का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता का कारण बना। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था। एक रिपोर्ट में नदी का अधिकतम स्तर 12.39 मीटर तक पहुंचने की जानकारी दी गई, जबकि खतरे का निशान 8.3 मीटर बताया गया। बाद में जलस्तर में धीरे-धीरे कमी के संकेत मिलने लगे, जिससे प्रशासन को कुछ राहत मिली।

हालांकि जलस्तर कम होने की शुरुआत के बावजूद प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी जारी रखी। बाढ़ के दौरान परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए राहत दलों को सतर्क रखा गया।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पड़ा असर

बाढ़ का असर बस्तर की सड़क व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दिया। कई इलाकों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित होने से यातायात व्यवस्था बाधित हुई। बीजापुर और सुकमा समेत कुछ क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ, जबकि रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर भी बारिश के कारण कई वाहन फंसने की जानकारी सामने आई।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी आने के कारण यात्रियों और मालवाहक वाहनों के लिए मुश्किलें बढ़ गईं। कुछ ट्रक चालक और उनके सहायक भी बाढ़ के पानी के बीच फंस गए थे। राहत दलों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। ऐसी परिस्थितियों में सड़क संपर्क टूटना राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित गांवों तक बचाव दलों की पहुंच के लिए भी चुनौती बन जाता है।

वायुसेना ने संभाला मोर्चा

बाढ़ की गंभीर स्थिति में भारतीय वायुसेना की सहायता महत्वपूर्ण साबित हुई। डोंगाघाट क्षेत्र में कुछ लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए थे और सामान्य रास्तों से उन तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। ऐसे में हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 16 नागरिकों को भारतीय वायुसेना की सहायता से एयरलिफ्ट किया गया। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। एक अभियान में बाढ़ के पानी के बीच एक कच्चे मकान की छत पर फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से निकाला गया। बचाव दल ने जोखिम वाले स्थान तक पहुंचकर लोगों को सुरक्षित हेलीकॉप्टर में पहुंचाया।

यह अभियान उस समय चलाया गया जब बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था और जमीन के रास्ते बचाव कार्य करना कठिन हो गया था। वायुसेना की हवाई क्षमता के कारण ऐसे इलाकों तक पहुंच संभव हुई जहां नाव या सड़क के माध्यम से राहत दलों का पहुंचना मुश्किल था।

हजारों लोगों तक पहुंची राहत

बस्तर में केवल हवाई बचाव अभियान ही नहीं चलाया गया, बल्कि प्रशासन, राज्य आपदा मोचन बल और अन्य राहत टीमों ने भी बड़े स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बस्तर में एक हजार से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों में दो दिनों के दौरान करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी भी सामने आई है।

प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में भोजन, पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बाढ़ के कारण घरों से बाहर आने को मजबूर हुए लोगों के लिए राहत शिविर फिलहाल सुरक्षित आश्रय का प्रमुख माध्यम बने हुए हैं।

गांवों का संपर्क प्रभावित

बस्तर के कई ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। पानी बढ़ने से कुछ गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल-पुलियों पर पानी आने से आवाजाही में परेशानी हुई। प्रशासन को कई स्थानों पर लोगों को निकालने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा।

बाढ़ जैसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती दूर-दराज के गांवों तक राहत पहुंचाने की होती है। बस्तर का भौगोलिक क्षेत्र कई जगहों पर वन क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों से घिरा हुआ है। ऐसे में लगातार बारिश और नदी के उफान के बीच राहत दलों को अतिरिक्त सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।

राहत शिविरों में बढ़ी व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने राहत शिविरों में व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं। शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन और साफ पानी उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती भी की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ के बाद किसी तरह की बीमारी या संक्रमण फैलने की स्थिति पैदा न हो।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, पीने के पानी और चिकित्सा सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है।

प्रशासन की लगातार निगरानी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में पानी के स्तर पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी रखी गई है। अधिकारियों और बचाव दलों को निचले तथा नदी किनारे वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

बारिश कम होने के बाद भी ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी और जलाशयों से छोड़े गए पानी का असर कुछ समय तक बना रह सकता है। इसलिए केवल बारिश रुकना ही बाढ़ का खतरा पूरी तरह समाप्त होने का संकेत नहीं माना जा सकता।

सड़क और जनजीवन सामान्य होने में लगेगा समय

बस्तर में बाढ़ का पानी घटने के साथ राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटने में समय लग सकता है। सड़कों पर जमा पानी और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण यातायात बहाल करने में प्रशासन को काम करना होगा। जिन गांवों में लंबे समय तक पानी जमा रहा, वहां घरों, खेतों और स्थानीय सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और जरूरतमंदों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है। इसके बाद सड़क संपर्क बहाल करने, प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता देने और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बस्तर में राहत अभियान जारी

बस्तर में आई बाढ़ ने एक बार फिर यह दिखाया है कि लगातार भारी बारिश और नदी-जलाशयों के बढ़ते प्रवाह का असर कितनी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। इस दौरान प्रशासन, आपदा राहत दल, स्थानीय बचावकर्मी और भारतीय वायुसेना ने अलग-अलग स्तर पर राहत अभियान चलाया। 16 लोगों का हवाई बचाव और बड़ी संख्या में लोगों को नावों तथा अन्य साधनों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

फिलहाल बस्तर में राहत और निगरानी का काम जारी है। जलस्तर में कमी आने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि पानी दोबारा बढ़ने की स्थिति में प्रभावित लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

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बस्तर में बाढ़ से हालात गंभीर, वायुसेना ने 16 लोगों को किया एयरलिफ्ट

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 28, 2026

जगदलपुर, 28 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लगातार हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश, नदियों में बढ़ते जलस्तर और पड़ोसी क्षेत्र में जलाशयों से छोड़े गए पानी के कारण कई निचले इलाकों में पानी भर गया। बाढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ सड़क संपर्क को भी प्रभावित किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्सों पर आवागमन बाधित होने से कई वाहन रास्ते में फंस गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया है। भारतीय वायुसेना की मदद से बाढ़ में फंसे 16 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।

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लगातार बारिश से बिगड़ी स्थिति

बस्तर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में लगातार कई दिनों तक भारी बारिश दर्ज की गई। बारिश का असर केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में बसे गांव भी इसकी चपेट में आ गए। लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। प्रशासन को कई संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारी बारिश के साथ पड़ोसी ओडिशा के कुछ जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद भी बस्तर क्षेत्र में जलस्तर पर दबाव बढ़ा। इसके चलते इंद्रावती नदी में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई।

खतरे के निशान से ऊपर पहुंची इंद्रावती

बस्तर की बाढ़ में इंद्रावती नदी का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता का कारण बना। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था। एक रिपोर्ट में नदी का अधिकतम स्तर 12.39 मीटर तक पहुंचने की जानकारी दी गई, जबकि खतरे का निशान 8.3 मीटर बताया गया। बाद में जलस्तर में धीरे-धीरे कमी के संकेत मिलने लगे, जिससे प्रशासन को कुछ राहत मिली।

हालांकि जलस्तर कम होने की शुरुआत के बावजूद प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी जारी रखी। बाढ़ के दौरान परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए राहत दलों को सतर्क रखा गया।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पड़ा असर

बाढ़ का असर बस्तर की सड़क व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दिया। कई इलाकों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित होने से यातायात व्यवस्था बाधित हुई। बीजापुर और सुकमा समेत कुछ क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ, जबकि रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर भी बारिश के कारण कई वाहन फंसने की जानकारी सामने आई।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी आने के कारण यात्रियों और मालवाहक वाहनों के लिए मुश्किलें बढ़ गईं। कुछ ट्रक चालक और उनके सहायक भी बाढ़ के पानी के बीच फंस गए थे। राहत दलों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। ऐसी परिस्थितियों में सड़क संपर्क टूटना राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित गांवों तक बचाव दलों की पहुंच के लिए भी चुनौती बन जाता है।

वायुसेना ने संभाला मोर्चा

बाढ़ की गंभीर स्थिति में भारतीय वायुसेना की सहायता महत्वपूर्ण साबित हुई। डोंगाघाट क्षेत्र में कुछ लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए थे और सामान्य रास्तों से उन तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। ऐसे में हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 16 नागरिकों को भारतीय वायुसेना की सहायता से एयरलिफ्ट किया गया। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। एक अभियान में बाढ़ के पानी के बीच एक कच्चे मकान की छत पर फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से निकाला गया। बचाव दल ने जोखिम वाले स्थान तक पहुंचकर लोगों को सुरक्षित हेलीकॉप्टर में पहुंचाया।

यह अभियान उस समय चलाया गया जब बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था और जमीन के रास्ते बचाव कार्य करना कठिन हो गया था। वायुसेना की हवाई क्षमता के कारण ऐसे इलाकों तक पहुंच संभव हुई जहां नाव या सड़क के माध्यम से राहत दलों का पहुंचना मुश्किल था।

हजारों लोगों तक पहुंची राहत

बस्तर में केवल हवाई बचाव अभियान ही नहीं चलाया गया, बल्कि प्रशासन, राज्य आपदा मोचन बल और अन्य राहत टीमों ने भी बड़े स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बस्तर में एक हजार से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों में दो दिनों के दौरान करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी भी सामने आई है।

प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में भोजन, पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बाढ़ के कारण घरों से बाहर आने को मजबूर हुए लोगों के लिए राहत शिविर फिलहाल सुरक्षित आश्रय का प्रमुख माध्यम बने हुए हैं।

गांवों का संपर्क प्रभावित

बस्तर के कई ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। पानी बढ़ने से कुछ गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल-पुलियों पर पानी आने से आवाजाही में परेशानी हुई। प्रशासन को कई स्थानों पर लोगों को निकालने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा।

बाढ़ जैसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती दूर-दराज के गांवों तक राहत पहुंचाने की होती है। बस्तर का भौगोलिक क्षेत्र कई जगहों पर वन क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों से घिरा हुआ है। ऐसे में लगातार बारिश और नदी के उफान के बीच राहत दलों को अतिरिक्त सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।

राहत शिविरों में बढ़ी व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने राहत शिविरों में व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं। शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन और साफ पानी उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती भी की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ के बाद किसी तरह की बीमारी या संक्रमण फैलने की स्थिति पैदा न हो।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, पीने के पानी और चिकित्सा सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है।

प्रशासन की लगातार निगरानी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में पानी के स्तर पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी रखी गई है। अधिकारियों और बचाव दलों को निचले तथा नदी किनारे वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

बारिश कम होने के बाद भी ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी और जलाशयों से छोड़े गए पानी का असर कुछ समय तक बना रह सकता है। इसलिए केवल बारिश रुकना ही बाढ़ का खतरा पूरी तरह समाप्त होने का संकेत नहीं माना जा सकता।

सड़क और जनजीवन सामान्य होने में लगेगा समय

बस्तर में बाढ़ का पानी घटने के साथ राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटने में समय लग सकता है। सड़कों पर जमा पानी और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण यातायात बहाल करने में प्रशासन को काम करना होगा। जिन गांवों में लंबे समय तक पानी जमा रहा, वहां घरों, खेतों और स्थानीय सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और जरूरतमंदों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है। इसके बाद सड़क संपर्क बहाल करने, प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता देने और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बस्तर में राहत अभियान जारी

बस्तर में आई बाढ़ ने एक बार फिर यह दिखाया है कि लगातार भारी बारिश और नदी-जलाशयों के बढ़ते प्रवाह का असर कितनी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। इस दौरान प्रशासन, आपदा राहत दल, स्थानीय बचावकर्मी और भारतीय वायुसेना ने अलग-अलग स्तर पर राहत अभियान चलाया। 16 लोगों का हवाई बचाव और बड़ी संख्या में लोगों को नावों तथा अन्य साधनों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

फिलहाल बस्तर में राहत और निगरानी का काम जारी है। जलस्तर में कमी आने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि पानी दोबारा बढ़ने की स्थिति में प्रभावित लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।