बाढ़ के पानी से घिरे कई गांव, नाव बनी आवागमन का सहारा; तीन दिन से बिजली गुल
कमलेश कुमार बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
सुजौली/जंगल गुलरिया, 27 सितंबर 2026।
लगातार हो रही बारिश ने जंगल गुलरिया क्षेत्र के कई गांवों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बारिश के बाद आसपास के इलाकों में पानी का स्तर बढ़ने से कई गांवों के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि ग्रामीणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए सामान्य रास्तों के बजाय नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। पानी बढ़ने के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हैं और लोगों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

क्षेत्र के सम्पत पुरवा गांव के मुख्य मार्ग पर लगातार पानी बढ़ने से स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। इस मार्ग से होकर धर्मपुर, रेतिया और सम्पत पुरवा समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आवागमन करते हैं। सड़क पर पानी भर जाने के कारण पैदल अथवा अन्य सामान्य साधनों से निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में नाव ही ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आवागमन का प्रमुख माध्यम बन गई है।
मुख्य रास्ते पर बढ़ता पानी, गांवों की बढ़ी परेशानी
बारिश के कारण जलभराव का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर पानी गांवों के आसपास तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों के लिए भी अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है। खेती-किसानी से जुड़े काम, बाजार से जरूरी सामान लाना और अन्य आवश्यक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी है। रास्तों पर पानी होने के कारण बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना कठिन हो गया है। अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। जलभराव लंबे समय तक रहने की स्थिति में शिक्षा व्यवस्था पर इसका और अधिक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में जिन रास्तों से लोग आसानी से बाजार, स्कूल और अन्य स्थानों तक पहुंच जाते थे, वही रास्ते अब पानी से घिरे हुए हैं। इससे गांवों का संपर्क प्रभावित हो रहा है और लोगों को आवश्यक कार्यों के लिए भी वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
मरीजों और जरूरतमंदों के लिए बढ़ी चुनौती
बाढ़ जैसी स्थिति में सबसे गंभीर समस्या उन लोगों के सामने आती है जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। जलभराव के कारण मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और संसाधन लग रहे हैं। सामान्य वाहनों का गांवों तक पहुंचना मुश्किल होने की स्थिति में नाव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि रास्ते पानी में डूबे रहें तो मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक पहुंचाने में मुश्किल हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय बनी हुई है।
ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन जलभराव वाले क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार नावों की व्यवस्था और अन्य आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराए, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में लोगों को तत्काल मदद मिल सके।
तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित
बाढ़ और जलभराव की समस्या के बीच करिकोट न्याय पंचायत क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित होने की बात सामने आई है। लगातार बिजली नहीं आने से ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। बारिश के कारण पहले से ही जनजीवन प्रभावित है और बिजली संकट ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
बिजली नहीं होने से घरों में रोशनी की समस्या के साथ मोबाइल फोन चार्ज करने, जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलाने और अन्य दैनिक कार्यों में भी दिक्कत हो रही है। रात के समय अंधेरा रहने के कारण जलभराव वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति में बिजली व्यवस्था का सुचारु रहना बेहद जरूरी है। यदि किसी स्थान पर आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो सूचना देने और संपर्क बनाए रखने में मोबाइल फोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से यह व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
वन क्षेत्र से जुड़े गांवों में सुरक्षा की चिंता
जंगल गुलरिया क्षेत्र वन क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण यहां बाढ़ और बिजली संकट का असर सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश और जलभराव के बीच वन क्षेत्र से लगे इलाकों में जंगली जानवरों की गतिविधियों को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से गांवों के आसपास निगरानी करना मुश्किल हो रहा है। जलभराव के कारण कई स्थानों पर लोगों की आवाजाही सीमित है, जिससे वन क्षेत्र के नजदीक रहने वाले परिवार अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।
हालांकि जंगली जानवरों की गतिविधियों को लेकर किसी विशेष घटना की पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन ग्रामीण संभावित जोखिम को देखते हुए वन विभाग और प्रशासन से निगरानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से तत्काल राहत की मांग
बाढ़ और बिजली संकट से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन तथा संबंधित विभागों से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि जिन रास्तों पर पानी भर गया है, वहां लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए। जरूरत वाले स्थानों पर नावों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
इसके अलावा करिकोट न्याय पंचायत क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को जल्द बहाल करने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और बाढ़ की स्थिति में बिजली संकट लंबे समय तक रहने से समस्याएं कई गुना बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने, जलभराव वाले मार्गों की स्थिति पर निगरानी रखने और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने की भी मांग कर रहे हैं।
बारिश जारी रही तो बढ़ सकती है परेशानी
क्षेत्र में यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है। पानी का स्तर बढ़ने पर अन्य मार्गों के प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने आवागमन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
फिलहाल जंगल गुलरिया क्षेत्र के प्रभावित गांवों में ग्रामीण पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। नावों के सहारे जरूरी आवाजाही की जा रही है। वहीं बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को दिन और रात दोनों समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की ओर है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जलभराव वाले इलाकों में जल्द राहत एवं बचाव संबंधी व्यवस्थाएं मजबूत की जाएंगी, बिजली आपूर्ति बहाल होगी और प्रभावित गांवों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी। लगातार बारिश के बीच क्षेत्र में हालात पर निगरानी रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बनी हुई है।