पॉक्सो एक्ट और बाल सुरक्षा को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक, कानूनी अधिकारों की दी जानकारी
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, जालौन। बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को विनायक एकेडमी इंटर कॉलेज, उरई में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश और जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता अभियान के तहत आयोजित हुआ।

अहिंसा दिवस के अवसर पर 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रहे इस अभियान का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों को कानून की सामान्य जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और किसी भी तरह की समस्या अथवा अपराध की स्थिति में उचित सहायता प्राप्त कर सकें।
पॉक्सो कानून के बारे में दी गई जानकारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल जज (14वां वित्त आयोग) जूनियर डिवीजन सुश्री शैलजा ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पॉक्सो एक्ट-2012 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों, यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील सामग्री से जुड़े अपराधों से सुरक्षा देने के लिए पॉक्सो कानून बनाया गया है।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बच्चों से संबंधित अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है और कानून में अलग-अलग परिस्थितियों तथा अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि उनके साथ या उनके किसी परिचित बच्चे के साथ कोई अनुचित घटना होती है तो उसे छिपाने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति अथवा संबंधित सहायता तंत्र को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
सिविल जज ने बच्चों को यह भी समझाया कि कानूनी जानकारी केवल अपराध होने के बाद काम आने वाली चीज नहीं है, बल्कि अधिकारों और जिम्मेदारियों की समझ बच्चों को पहले से सतर्क रहने में भी मदद करती है।
निशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने विद्यार्थियों को उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कानूनी सहायता लेने में असमर्थ व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क विधिक सहायता की जानकारी प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने बताया कि जनपद न्यायालय परिसर जालौन, उरई स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस पर संपर्क करके कानूनी सहायता और उससे जुड़ी सेवाओं की जानकारी ली जा सकती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल-फ्री नंबर 15100 के माध्यम से भी विधिक सहायता संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
इस दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि कानून से संबंधित किसी समस्या को लेकर अनावश्यक भय या संकोच रखने की आवश्यकता नहीं है। सही समय पर उचित माध्यम से सहायता मांगना समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग
विद्यालय के प्रधानाचार्य विवेक शुक्ला ने बच्चों को आपात परिस्थितियों में उपयोगी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी बच्चे को तत्काल सहायता की जरूरत होने पर 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और आपात स्थिति में 112 नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी अपने माता-पिता, अभिभावक या शिक्षक को दें। बच्चों को यह भी बताया गया कि किसी परेशानी को अकेले सहने के बजाय विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से बातचीत करना अधिक सुरक्षित कदम है।
गुड टच और बैड टच की समझ जरूरी
जागरूकता शिविर में विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर भी समझाया गया। बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा और अपनी सीमाओं के प्रति जागरूक करते हुए बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज, अनुचित या संदिग्ध महसूस हो तो वे चुप न रहें।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि ऐसी स्थिति में बिना डर और झिझक के माता-पिता, शिक्षक, अभिभावक अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों को अपनी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी चिंता को गंभीरता से लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मांगनी चाहिए।
सोशल मीडिया और साइबर सुरक्षा पर भी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान केवल शारीरिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय निजी जानकारी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, तस्वीरें और अन्य संवेदनशील विवरणों को सार्वजनिक करने से बचने की सलाह दी गई।
विद्यार्थियों को बताया गया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए संदिग्ध लिंक, संदेश या अनुरोध पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। साइबर अपराध अथवा ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी स्थिति सामने आने पर अभिभावकों और शिक्षकों को जानकारी देने के साथ उचित कानूनी माध्यम से सहायता लेने की बात कही गई।
लोक अदालत और समझौता केंद्र की भी जानकारी
शिविर का संचालन पीएलवी महेश सिंह परिहार ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका के साथ-साथ लोक अदालत और सुलह-समझौता केंद्र की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि न्याय व्यवस्था में ऐसे कई माध्यम उपलब्ध हैं, जिनके जरिए संबंधित मामलों में कानून के अनुसार समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। विद्यार्थियों को विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध विभिन्न कानूनी सुविधाओं के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि कानून केवल अदालतों तक सीमित विषय नहीं है। दैनिक जीवन में अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखना भी नागरिक जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यालय प्रबंधन ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधक राजकुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कम उम्र में कानून, सुरक्षा और उनके अधिकारों की जानकारी मिलना बेहद उपयोगी है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में जागरूकता के साथ आत्मविश्वास भी विकसित करने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान देने का स्थान नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शिक्षक और विद्यार्थी रहे मौजूद
विधिक जागरूकता शिविर में डीईओ दीपक नारायण, न्यायालय रीडर शैफाली तिवारी, पीएलवी महेन्द्र कुमार मिश्रा, योगेन्द्र सिंह तखेले, धर्मेन्द्र कुमार और रामदेव चतुर्वेदी सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को पॉक्सो कानून, बाल सुरक्षा, आपातकालीन सहायता, व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर सावधानी और निशुल्क विधिक सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस तरह कार्यक्रम ने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ किसी भी असुरक्षित या अनुचित परिस्थिति में सही समय पर सहायता लेने का संदेश भी दिया।