यूएनएचआरसी का 59वां सत्र: वैश्विक मानवाधिकार विमर्श का विस्तृत विश्लेषण📍 जिनेवा, 26 जून 2025

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) का 59वां सत्र आज जिनेवा में अत्यंत महत्वपूर्ण चर्चाओं के साथ संपन्न हुआ। 26 जून को आयोजित यह सत्र वैश्विक मानवाधिकार परिदृश्य में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को उजागर करने और समाधान की दिशा में ठोस संवाद स्थापित करने का मंच बना।
🔹 सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता पर विशेष चर्चा
दिन की शुरुआत सुबह 10 बजे से हुई, जिसमें “सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के अधिकार” पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा आयोजित की गई। यह विषय आज भी विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में। चर्चा में यह बात उभरकर सामने आई कि जलवायु परिवर्तन, असमान बुनियादी ढांचा और सुशासन की कमी इस अधिकार की उपलब्धता में बाधक हैं। भारत के जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान की सराहना तो हुई, परंतु यह भी स्वीकार किया गया कि अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
🔹 चरम गरीबी पर संवाद: असमानताओं को समझना
दोपहर 12 बजे, यूएन के विशेष संवाददाता ओलिवियर डी शुटर के साथ एक इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें चरम गरीबी, वैश्विक आर्थिक असमानता और जीवन यापन संकट पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस चर्चा में यह बताया गया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और न्यायसंगत नीतियों के बिना सतत विकास संभव नहीं है। यह भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है जो समावेशी विकास की दिशा में प्रयासरत हैं।
🔹 2030 सतत विकास एजेंडा पर रिपोर्ट प्रस्तुत
दोपहर 3 बजे, सत्र में विभिन्न अंतर-सत्रीय रिपोर्टों का प्रस्तुतीकरण हुआ, जिसमें 2030 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के मानवाधिकार संबंधी पहलुओं पर ज़ोर दिया गया। इसमें बताया गया कि किस प्रकार राष्ट्र अपने मानवाधिकार लक्ष्यों को सतत विकास से जोड़ रहे हैं। रिपोर्ट ने नीति निर्माताओं को वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता का संदेश दिया।
🔹 देश विशेष समीक्षा: बेलारूस और बुरुंडी पर नजर
संध्या 4 बजे के बाद, परिषद ने दो देशों की स्थिति पर केंद्रित सत्रों का आयोजन किया। विशेष दूत निल्स मुझ्निक ने बेलारूस की मानवाधिकार स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि फॉर्च्यून ज़ोंगो ने बुरुंडी की स्थिति पर प्रकाश डाला। दोनों रिपोर्टों ने वैश्विक जवाबदेही और मानवाधिकार उल्लंघनों के प्रति सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित किया।
🔸 भारत और अन्य विकासशील देशों के लिए सीख
UNHRC की कार्यवाही लाइव वेबकास्ट के माध्यम से webtv.un.org/en पर प्रसारित की गई, जिससे दुनियाभर के नागरिक इन महत्वपूर्ण चर्चाओं से सीधे जुड़ सके। भारत सहित विकासशील देशों के लिए यह सत्र न केवल एक वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करता है, बल्कि उन्हें आत्मावलोकन का अवसर भी देता है – यह समझने का कि वे मानवाधिकार के क्षेत्र में कहां खड़े हैं और उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
🔖 निष्कर्ष:
यूएनएचआरसी का 59वां सत्र एक बार फिर इस बात का प्रमाण बना कि मानवाधिकार केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। यह दिन विभिन्न समस्याओं की पहचान, अनुभवों के आदान-प्रदान और समाधान की खोज के लिए समर्पित रहा – एक ऐसा प्रयास जो विश्व को एक न्यायपूर्ण और गरिमापूर्ण भविष्य की ओर ले जा सकता है।
