फ़रवरी 12, 2026

जन-जन तक टेटनस से सुरक्षा का संदेश: रेडियो से महिला मंडल तक

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Anoop singh

टेटनस — एक ऐसा रोग जो कई दशकों तक भारत में मातृ एवं शिशु मृत्यु का एक बड़ा कारण रहा, आज नियंत्रण के कगार पर है। यह केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि नहीं, बल्कि जनभागीदारी, संचार माध्यमों और स्थानीय समुदायों की जागरूकता का परिणाम है। विशेषकर ग्रामीण भारत में, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित थीं, वहां लोगों तक जानकारी पहुँचाने में रेडियो, दीवार लेखन, ग्राम सभाएं और महिला मंडल जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


रेडियो: गाँव-गाँव गूंजता जागरूकता का स्वर

रेडियो, विशेषकर आकाशवाणी और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के माध्यम से, टेटनस के बारे में लोगों को सरल और स्थानीय भाषाओं में जानकारी दी गई। “टीटी का टीका ज़रूर लगवाएं”, “साफ़ प्रसव स्थल, सुरक्षित माँ और बच्चा” जैसे संदेश बार-बार प्रसारित किए गए, जिससे अनपढ़ या अल्पशिक्षित जनसंख्या तक भी संदेश पहुंचा।


दीवार लेखन: गली-गली में स्वास्थ्य का पाठ

ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में दीवार लेखन एक प्रभावशाली साधन रहा। स्कूलों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों की दीवारों पर रंग-बिरंगे अक्षरों में टेटनस के लक्षण, रोकथाम और टीकाकरण की तारीखें लिखी जाती थीं। स्थानीय कलाकृतियों और चित्रों के माध्यम से संदेश और अधिक प्रभावशाली बनाए गए।


ग्राम सभाएं: सामूहिक चेतना की शक्ति

ग्राम सभाएं केवल पंचायत निर्णयों का मंच नहीं रहीं, बल्कि इन्हें स्वास्थ्य जागरूकता का मंच बनाया गया। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य अधिकारी टेटनस की रोकथाम को लेकर गांववालों से सीधे संवाद करते। सवाल-जवाब के जरिए भ्रांतियों को दूर किया गया। ये सभाएं खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए शिक्षाप्रद रहीं।


महिला मंडल: बदलाव की बुनियाद बनी नारी शक्ति

महिला मंडल और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, जिन्होंने पहले केवल सिलाई या बचत समूहों में भाग लिया था, वे अब स्वास्थ्य अभियानों की अग्रणी बन गईं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को टीटी का टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया, साफ-सफाई का महत्व समझाया और प्रसव पूर्व देखभाल की जानकारी दी। जब महिलाएं महिलाओं से बात करती हैं, तो संवाद अधिक भरोसेमंद और असरदार बनता है।


नतीजा: सामूहिक प्रयास से सुरक्षित मातृत्व

इन जमीनी प्रयासों ने मिलकर टेटनस को एक “रोकथाम योग्य” और लगभग समाप्त रोग बना दिया। यह केवल सरकार की नीतियों का असर नहीं, बल्कि हर गांव, हर महिला, हर संदेश का योगदान था जिसने यह संभव बनाया।


निष्कर्ष

टेटनस उन्मूलन की कहानी, केवल सुई और टीके की नहीं है। यह एक सामाजिक आंदोलन की कहानी है — जहां रेडियो की आवाज़, दीवार की स्याही, सभा का मंच और महिला की चेतना — सबने मिलकर एक अंधेरे कोने को रोशन किया। यह मॉडल अन्य बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में भी प्रेरणा बन सकता है।


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