फ़रवरी 12, 2026

यूरोपीय पहुंच अधिनियम (EAA) और UNCRPD के अनुरूप उसका ढांचा: समावेशिता की दिशा में एक ठोस कदम

Anoop singh

परिचय: यूरोपीय संघ (EU) ने 2025 में एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार करते हुए यूरोपीय पहुंच अधिनियम (European Accessibility Act – EAA) को प्रभावी रूप से लागू किया है। यह अधिनियम विशेष रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए डिजिटल और भौतिक वातावरण में समावेशिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसकी रचना और संरचना संयुक्त राष्ट्र विकलांगजन अधिकार संधि (UNCRPD) के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।


EAA और UNCRPD: एक समान दृष्टिकोण

1. मानवाधिकार-आधारित दृष्टिकोण: UNCRPD एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो विकलांग व्यक्तियों के समान अधिकार, स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करती है। EAA को इसी दृष्टिकोण को अपनाकर तैयार किया गया है, जिससे यह केवल एक तकनीकी या कानूनी दस्तावेज न रहकर मानवाधिकारों का वाहक बन जाता है।

2. भागीदारी और परामर्श: EAA को तैयार करते समय विकलांग जन संगठनों, नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ गहन संवाद और परामर्श किया गया। यह प्रक्रिया UNCRPD की उस भावना को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें ‘कुछ भी हमारे बिना नहीं’ (Nothing about us without us) का सिद्धांत प्रमुख है।

3. सार्वभौमिक अभिगम्यता (Accessibility for All): UNCRPD के अनुसार सभी सेवाएं, उत्पाद और ढांचे सभी व्यक्तियों के लिए सुलभ होने चाहिए। EAA में यही बात सुनिश्चित की गई है — चाहे वह बैंकिंग सेवा हो, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, स्मार्टफोन, ई-बुक्स या परिवहन व्यवस्था — इन सभी को विकलांग व्यक्तियों के लिए समावेशी और उपयोग योग्य बनाना अनिवार्य किया गया है।


मुख्य विशेषताएँ जो UNCRPD के अनुरूप हैं:

  • डिजिटल समावेशिता: ई-गवर्नेंस, मोबाइल ऐप्स और वेबसाइटों को सुलभ बनाना।
  • उत्पादों की पहुंच: एटीएम, टेलीफोन, टिकट मशीन जैसे रोजमर्रा के उपकरणों को इस तरह डिजाइन करना कि वे विकलांगजन द्वारा इस्तेमाल किए जा सकें।
  • सेवाओं की सुलभता: ऑनलाइन सेवाएं, ई-बुक्स, और ऑडियो-विजुअल मीडिया को सबके लिए उपयोग योग्य बनाना।
  • समान अवसर: रोजगार, शिक्षा और स्वतंत्र जीवन के क्षेत्रों में बिना भेदभाव के भागीदारी सुनिश्चित करना।

भविष्य की दिशा:

EAA केवल एक अधिनियम नहीं, बल्कि एक समावेशी समाज की दिशा में उठाया गया दूरदर्शी कदम है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि तकनीकी प्रगति के युग में कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे, विशेष रूप से वे जो विकलांगता से प्रभावित हैं।

यह कदम न केवल यूरोप में, बल्कि दुनिया भर में एक मिसाल बनकर उभरा है कि कैसे नीतियां, जब मानवाधिकारों के मूल्यों पर आधारित हों, तो वे वंचित समुदायों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकती हैं।


निष्कर्ष: यूरोपीय पहुंच अधिनियम (EAA) और UNCRPD दोनों का उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना है जो समानता, गरिमा और स्वतंत्रता के मूल्यों पर आधारित हो। EAA का ढांचा UNCRPD की भावना और प्रावधानों के अनुरूप होने के कारण यह कानून विकलांग व्यक्तियों के लिए एक नई उम्मीद और अवसरों का द्वार खोलता है।


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