ईरान ऑपरेशन के बाद इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दिए संकेत – बंधकों की वापसी को दी जाएगी प्राथमिकता

तेल अवीव, 30 जून 2025:
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अपने बयान में कहा कि ईरान में हुए सैन्य अभियान के बाद “कई नए अवसर खुल गए हैं”, जिनमें गाज़ा में बचे हुए बंधकों की वापसी की संभावना भी शामिल है। यह बयान उन्होंने दक्षिणी इज़राइल स्थित शिन बेट सुरक्षा एजेंसी केंद्र में दिया, जहां उन्होंने संकेत दिया कि सरकार की प्राथमिकताएं अब बदली हुई नजर आ रही हैं।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, इस विजय के बाद कई संभावनाएं खुली हैं। सबसे पहले तो हमें बंधकों को वापस लाना है। साथ ही गाज़ा के मुद्दे को हल करना और हमास को पराजित करना भी जरूरी है। मुझे विश्वास है कि हम दोनों लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे।”
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि अब नेतन्याहू की रणनीति में एक बदलाव आया है — पहले जहाँ उनका मुख्य उद्देश्य हमास का पूरी तरह विनाश था, अब बंधकों की वापसी को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पहली बार है जब नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से बंधकों की रिहाई को हमास के खात्मे से ऊपर स्थान दिया है।
गौरतलब है कि मई की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने हमास की पूर्ण पराजय को सर्वोच्च लक्ष्य बताते हुए बंधकों की रिहाई को प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं किया था। लेकिन हाल ही में बढ़ती आलोचना — विशेषकर बंधकों के परिजनों और विपक्षी नेताओं की ओर से — ने इस नीति को चुनौती दी है।
होस्टेज फैमिली फोरम हेडक्वार्टर्स ने नेतन्याहू के ताजा बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें बचाव नहीं, बल्कि रिहाई चाहिए। एक शब्द का यह अंतर बंधकों के लिए मुक्ति और त्रासदी के बीच का अंतर हो सकता है।” फोरम ने सभी 50 बंधकों की वापसी और संघर्ष की समाप्ति के लिए एक व्यापक समझौते की मांग दोहराई।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि “विस्तृत क्षेत्रीय अवसर खुल रहे हैं”, जिससे संकेत मिलता है कि इज़राइल अब अपने कूटनीतिक दायरे को और बढ़ाने की कोशिश में है।
इस बदली हुई रणनीति को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल इज़राइली घरेलू राजनीति बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इज़राइल बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए कोई नया समझौता करता है या फिर सैन्य कार्रवाई को ही जारी रखता है।
