फ़रवरी 12, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट में तुर्की कंपनी सेलेबी की सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के मामले पर फैसला जल्द

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Anoop singh

नई दिल्ली, 6 जुलाई 2025:
दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को एक अहम फैसले की घोषणा करने वाली है, जिसमें तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी सेलेबी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हुई थी। यह मामला भारत सरकार द्वारा कंपनी की सुरक्षा मंजूरी रद्द किए जाने को चुनौती देने से जुड़ा है। सरकार ने यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों के आधार पर उठाया था।

यह मामला केवल एक व्यावसायिक विवाद नहीं, बल्कि भारत की हवाई अड्डों पर विदेशी कंपनियों की मौजूदगी, सुरक्षा प्रक्रियाओं और कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी सेलेबी दिल्ली कार्गो टर्मिनल मैनेजमेंट इंडिया ने सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। उनकी दलील है कि BCAS (ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी) द्वारा सुरक्षा मंजूरी रद्द करना न केवल अनुचित था, बल्कि यह भारत के कानूनों के खिलाफ भी है।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने 23 मई को इस याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब 8 जुलाई को सुनाया जाएगा।

सेलेबी की दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सेलेबी की ओर से पेश होकर सरकार की कार्रवाई को मनमाना बताया और कहा कि यह “ड्यू प्रोसेस” (न्यायिक प्रक्रिया) का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि:

एयरक्राफ्ट रूल्स 2013 के नियम 12 के तहत सुरक्षा मंजूरी का प्रावधान है, जिसे संसद द्वारा रद्द नहीं किया गया है।

कंपनी को न तो कोई पूर्व सूचना दी गई, न ही सुनवाई का मौका मिला।

कोई ठोस कारण दर्ज किए बिना ही मंजूरी रद्द कर दी गई, जिससे कंपनी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

रोहतगी ने यह भी स्पष्ट किया कि सेलेबी में तुर्की की हिस्सेदारी जरूर है, लेकिन भारत में कंपनी का संपूर्ण स्टाफ भारतीय नागरिकों का है, और उसका कोई राजनीतिक जुड़ाव नहीं है।

सरकार की दलील

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा:

सरकार के पास ऐसे मामलों में पूर्ण अधिकार हैं।

सेलेबी जैसी कंपनियां हवाई अड्डों के संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य करती हैं और उन्हें महत्वपूर्ण सूचनाएं भी प्राप्त होती हैं।

खुफिया एजेंसियों से लाल झंडी (Red Flags) मिलने के बाद ही यह कदम उठाया गया।

उन्होंने कहा कि यह मामला “सुई जेनेरिस” (अद्वितीय) है और इसे सामान्य कानूनी मापदंडों से नहीं मापा जा सकता।

निष्कर्ष

यह मामला निजी कंपनियों की सुरक्षा मंजूरी, विदेशी निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन का एक प्रमुख उदाहरण बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट किस पक्ष में फैसला सुनाती है — क्या सरकार की सुरक्षा चिंताएं प्राथमिक रहेंगी, या सेलेबी को न्यायिक प्रक्रिया में खामी का लाभ मिलेगा?

यह फैसला भारत में कार्यरत विदेशी कंपनियों और भविष्य में होने वाले निवेशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।


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