राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि: दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्की कंपनी चेलेबी की सुरक्षा मंजूरी रद्द करने को ठहराया उचित

दिल्ली, 7 जुलाई 2025 – दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी Çelebi की याचिका को खारिज करते हुए केंद्र सरकार के उस फैसले को वैध ठहराया है, जिसमें कंपनी की सुरक्षा मंजूरी को रद्द किया गया था। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने कहा कि यह निर्णय “गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं” पर आधारित है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
फैसले का सार: सुरक्षा बनाम प्रक्रिया
न्यायालय ने कहा कि यद्यपि विधिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत महत्त्वपूर्ण हैं, परंतु जब मामला देश की आंतरिक सुरक्षा और संवेदनशील ढांचों की रक्षा से जुड़ा हो, तब सरकार के पास कार्रवाई की व्यापक शक्ति होनी चाहिए। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में खुफिया सूचनाओं का पूरा खुलासा संभव नहीं होता और इसकी अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।
पूर्व-सुनवाई का सवाल: अपवादस्वरूप स्थिति
चेलेबी द्वारा यह तर्क दिया गया था कि उन्हें सुनवाई का उचित अवसर नहीं मिला। परंतु अदालत ने कहा कि विमान अधिनियम, 1937 के नियम 12 के तहत पूर्व-सुनवाई हर स्थिति में अनिवार्य नहीं मानी जा सकती। यदि सुरक्षा एजेंसियां किसी विदेशी कंपनी के खिलाफ गंभीर आशंका प्रकट करें, तो सरकार को यह अधिकार है कि वह बिना पूर्व सूचना के भी कार्रवाई करे।
हवाई अड्डों पर विदेशी कंपनियों की भूमिका पर चिंतन
ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं हवाई अड्डों के सबसे संवेदनशील कार्यों में शामिल होती हैं। इनमें कार्गो संचालन, विमान सेवा, ईंधन भराई, यात्री जानकारी, और प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच जैसी जिम्मेदारियां शामिल होती हैं। जब ऐसी सेवाओं में विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियां संलग्न होती हैं, तो उनके संचालन की अनुमति देने से पहले सरकार को अत्यंत सतर्क रहना पड़ता है।
सुरक्षा दस्तावेज सार्वजनिक न करने की विवशता
न्यायालय ने सरकार की उस दलील को स्वीकार किया कि सुरक्षा से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करना राष्ट्रीय हित को क्षति पहुँचा सकता है। इन दस्तावेजों में खुफिया सूचनाएं, जासूसी गतिविधियों की आशंकाएं, या विदेशी प्रभाव की विस्तृत जानकारियाँ हो सकती हैं, जिनका खुलासा करना देश की रणनीतिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) द्वारा दो भारतीय उपकंपनियों – Çelebi Airport Services India Pvt. Ltd. और Çelebi Delhi Cargo Terminal Management India Pvt. Ltd. – को दी गई सुरक्षा मंजूरी को रद्द करने के निर्णय से उत्पन्न हुआ था। यह मंजूरी आवश्यक होती है ताकि कोई भी कंपनी संवेदनशील हवाई अड्डा परिसरों में अपनी सेवाएं प्रदान कर सके।
निष्कर्ष: सुरक्षा सर्वोपरि
यह निर्णय देश की न्यायिक व्यवस्था द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के सिद्धांत को सर्वोपरि मानने का स्पष्ट संकेत है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि किसी भी विदेशी संस्था को भारतीय संरचनात्मक तंत्र में शामिल करते समय राष्ट्रहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
लेखक की टिप्पणी
यह फैसला भविष्य में ऐसी सभी विदेशी कंपनियों के लिए एक चेतावनी है, जो भारत में कार्य करना चाहती हैं – उन्हें भारत की सुरक्षा नीतियों, जांच प्रक्रियाओं और विश्वास-आधारित स्वीकृति प्रणाली को पूरी तरह स्वीकार करना होगा।
