नींद न आना: एक बढ़ती हुई समस्या

आज की तेज़ रफ़्तार जीवनशैली में नींद न आना यानी अनिद्रा एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन गई है। जहाँ पहले नींद को विश्राम और शांति का पर्याय माना जाता था, वहीं अब बहुत से लोग रात भर करवटें बदलते रहते हैं। यह केवल थकान का कारण नहीं बनता बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है।
नींद न आने के मुख्य कारण
- तनाव और चिंता – काम का दबाव, रिश्तों की परेशानियाँ या आर्थिक तनाव अक्सर दिमाग को शांत नहीं होने देते, जिससे नींद बाधित होती है।
- डिजिटल उपकरणों का प्रयोग – देर रात तक मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का उपयोग आँखों और मस्तिष्क को उत्तेजित करता है, जिससे नींद आने में दिक़्क़त होती है।
- अनियमित जीवनशैली – देर से सोना, कैफीन या शराब का सेवन और गलत खानपान भी नींद की लय बिगाड़ते हैं।
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ – थायरॉइड, डिप्रेशन, श्वसन संबंधी रोग या दर्द जैसी स्थितियाँ भी नींद को प्रभावित करती हैं।
नींद न आने के दुष्परिणाम
- दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन
- एकाग्रता और स्मरणशक्ति में कमी
- हृदय रोग और डायबिटीज़ का खतरा
- मानसिक तनाव और अवसाद की संभावना बढ़ना
नींद लाने के घरेलू उपाय
- सोने का नियमित समय तय करें – रोज़ाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।
- कैफीन और निकोटीन से परहेज़ करें – विशेषकर शाम के बाद चाय, कॉफ़ी और सिगरेट से बचें।
- डिजिटल डिटॉक्स – सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल या टीवी का प्रयोग न करें।
- योग और ध्यान – गहरी साँसों की कसरत, ध्यान या हल्का योग मन को शांत करता है और नींद लाने में मदद करता है।
- गर्म दूध या हर्बल चाय – सोने से पहले गर्म दूध या कैमोमाइल जैसी चाय पीने से शरीर को आराम मिलता है।
निष्कर्ष
नींद न आना कोई मामूली समस्या नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरे की घंटी है। संतुलित दिनचर्या, तनाव-नियंत्रण और सही खानपान से अधिकांश मामलों में इसे रोका जा सकता है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।
स्वस्थ नींद ही स्वस्थ जीवन का आधार है।
