मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म मामले में न्याय: आरोपी को 14 वर्ष की कठोर कैद

पश्चिम बंगाल में एक लंबे समय से चल रहे दर्दनाक मामले में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। महेशतला थाना क्षेत्र में मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म के आरोपी को अदालत ने 14 साल की कठोर सज़ा सुनाई है। इस फैसले ने समाज में यह संदेश दिया है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून से बचना असंभव है।
घटना की पृष्ठभूमि
यह मामला मई 2017 का है, जब 22 वर्षीय मूक-बधिर युवती अपने घर पर अकेली थी। उसी दौरान स्थानीय व्यक्ति गोरा शेख ने उसके घर में घुसकर घिनौनी हरकत की। पीड़िता ने शारीरिक संकेतों और आवाज़ से मदद माँगने की कोशिश की। परिवार के सदस्य दौड़कर पहुँचे, लेकिन तब तक आरोपी उन्हें धक्का देकर भागने की कोशिश कर चुका था। जल्द ही परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और मामला दर्ज किया गया।
पुलिस की जांच और भूमिका
शिकायत मिलते ही महेशतला थाना पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया और जांच की ज़िम्मेदारी उपनिरीक्षक अमृता पाखिरा दास को सौंपी गई। सबूतों को इकट्ठा करने और गवाहों को अदालत में पेश करने में पुलिस ने लगातार मेहनत की। इसी दृढ़ता का परिणाम है कि वर्षों बाद भी न्याय की डोर कमजोर नहीं पड़ी।
अदालत का कठोर निर्णय
लंबी सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। निर्णय में उसे 14 साल का कठोर कारावास और 10 हज़ार रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया गया। यदि जुर्माना नहीं चुकाया जाता है, तो सज़ा में एक वर्ष की अतिरिक्त कैद जोड़ी जाएगी।
समाज के लिए संदेश
यह फैसला न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि महिलाओं और विशेष रूप से दिव्यांगजन के खिलाफ अपराध को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पश्चिम बंगाल पुलिस की सतर्कता और अदालत की सख़्ती ने पीड़ित परिवार में विश्वास जगाया है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन मिलेगा ज़रूर।
