फ़रवरी 15, 2026

महालया पर ममता बनर्जी का नया पूजा गीत: संस्कृति और सृजनशीलता का अद्भुत संगम

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केवल राजनीति तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि कला और संस्कृति की दुनिया में भी अपनी गहरी रुचि और रचनात्मकता का परिचय देती रही हैं। महालया और शारदीय नवरात्र के शुभ अवसर पर उन्होंने एक बार फिर अपनी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक नया पूजा गीत प्रस्तुत किया है, जिसे उन्होंने स्वयं लिखा और संगीतबद्ध किया है।

शारदीय माहौल में सृजन की धारा

बंगाल में शारदीय दुर्गोत्सव केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जीवन का धड़कता हुआ हिस्सा है। “आकाश है शरद नीला, উঠছে মায়ের আগমন বাণী…” जैसी पंक्तियाँ माँ दुर्गा के आगमन की आहट को दर्शाती हैं। इसी भावभूमि को ध्यान में रखकर ममता बनर्जी का यह गीत तैयार किया गया है। यह गीत बंगाल की सामूहिक चेतना को जगाने वाला है और दुर्गोत्सव की भावनाओं को और गहराई से महसूस कराने का प्रयास करता है।

राजनीति से परे सांस्कृतिक पहचान

राजनीतिक हस्तियों द्वारा कला और साहित्य में योगदान असामान्य नहीं है, लेकिन ममता बनर्जी ने इसे एक निरंतर परंपरा बना दिया है। वह पहले भी कविताएँ लिख चुकी हैं, चित्रकारी कर चुकी हैं और अब संगीत की रचना कर अपने व्यक्तित्व का एक नया आयाम प्रस्तुत कर रही हैं। यह कदम उन्हें केवल एक मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दूत के रूप में भी स्थापित करता है।

बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर का पुनर्पुष्टि

दुर्गापूजा को यूनेस्को द्वारा “Intangible Cultural Heritage” का दर्जा प्राप्त है। ऐसे समय में जब दुनिया भर में बंगाल की पूजा को पहचान मिल रही है, मुख्यमंत्री का यह प्रयास सांस्कृतिक गौरव को और मजबूत करता है। उनका नया गीत न केवल भक्तों के लिए भक्ति और आनंद का माध्यम है, बल्कि बंगाल की समृद्ध परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।

सामाजिक संदेश और सामूहिकता

यह गीत केवल एक पूजा गीत नहीं है, बल्कि सामूहिकता और उत्सवधर्मिता का संदेश भी देता है। जब राजनीतिक नेतृत्व जनता के साथ मिलकर सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल होता है, तो यह समाज को जोड़ने वाली कड़ी बन जाता है। ममता बनर्जी का यह प्रयास एकता, आनंद और भक्ति के भावों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने वाला है।


निष्कर्ष

ममता बनर्जी द्वारा लिखा और संगीतबद्ध किया गया नया पूजा गीत बंगाल की शारदीय संस्कृति का एक अमूल्य उपहार है। यह गीत न केवल माँ दुर्गा के आगमन की ध्वनि को अभिव्यक्त करता है, बल्कि राजनीति से परे एक नेता की मानवीय और रचनात्मक छवि को भी सामने लाता है। यह कहना उचित होगा कि महालया के इस पावन अवसर पर प्रस्तुत यह सांस्कृतिक रचना आने वाले वर्षों तक लोगों के हृदय में गूंजती रहेगी।


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