अमेरिका की विदेशी सहायता का नया दौर: तूफान मेलिसा के बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर गहन विश्लेषण

अमेरिकी विदेशी सहायता नीति में हाल ही में ऐसा परिवर्तन देखने को मिला है, जिसने न सिर्फ वॉशिंगटन की परंपरागत व्यवस्थाओं को झकझोरा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता के मॉडल को भी नई दिशा दी है। हैरिकेन मेलिसा द्वारा कैरिबियाई क्षेत्र में मचाई विनाशकारी तबाही के बाद ट्रंप प्रशासन ने जिस नए ढांचे का उपयोग किया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
🌪️ तूफान मेलिसा: कैरिबियाई क्षेत्र में कहर
अक्टूबर 2025 में आए कैटेगरी-5 सुपर तूफान मेलिसा ने कैरिबियाई देशों को बुरी तरह प्रभावित किया।
इस तूफान ने:
- जमैका, क्यूबा, बहामास, हैती और डोमिनिकन रिपब्लिक में व्यापक तबाही मचाई
- 185 मील प्रति घंटे की तेज़ हवाओं से घर, सड़कें, अस्पताल और संचार तंत्र ध्वस्त कर दिए
- लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया
- कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह ठप हो गईं
यह आपदा इतनी गंभीर थी कि प्रभावित देशों को तुरंत अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता पड़ी।
🇺🇸 ट्रंप प्रशासन की नई विदेशी सहायता नीति
तूफान के बाद व्हाइट हाउस ने एक ऐसा कदम उठाया, जो अमेरिकी राहत प्रणाली के इतिहास में असामान्य माना जा रहा है।
जुलाई 2025 में USAID को बंद करने के बाद, यह पहली बार था जब अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) को अकेले राहत कार्यों का दायित्व संभालना पड़ा।
नीति के प्रमुख परिवर्तन:
1. कम नौकरशाही, अधिक तेज़ी
- अनेक पारंपरिक एजेंसियों की मंजूरियों और प्रक्रियाओं को हटाकर तेज़ निर्णय-प्रक्रिया अपनाई गई।
- सहायता सामग्री की डिलीवरी रिकॉर्ड समय में शुरू कर दी गई।
2. डिजास्टर असिस्टेंस टीमों की सीधे तैनाती
- खोज एवं बचाव दल (Search & Rescue) को तत्काल कैरिबियाई क्षेत्र में भेजा गया।
- चिकित्सा और आपूर्ति इकाइयों को स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में लगाया गया।
3. सेना की सक्रिय भागीदारी
- अमेरिकी सेना को राहत सामग्री पहुँचाने, अस्थायी आश्रय बनाने और परिवहन नेटवर्क सुधारने का दायित्व दिया गया।
- सैन्य लॉजिस्टिक्स के कारण सहायता तेज़ी और सटीकता से वितरित हुई।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया: समर्थन और शंकाएँ
नई नीति पर अमेरिकी राजनीति में दो तरह की आवाजें सुनाई दीं:
समर्थन
सेनटर मार्को रुबियो ने इस रणनीति को “अभूतपूर्व दक्षता” बताते हुए कहा कि:
- इससे टैक्सपेयर्स का पैसा बचा
- कई मंजूरियों की देरी खत्म हुई
- राहत कार्यों में स्पष्ट नेतृत्व स्थापित हुआ
आलोचना
लगातार आलोचना करने वालों की दलीलें:
- USAID जैसी अनुभवी संस्था की विशेषज्ञता को अचानक हटाना खतरनाक प्रयोग साबित हो सकता है
- दीर्घकालिक विकास योजनाओं का अभाव
- सैन्यकरण बढ़ने से विदेश नीति के मानवीय स्वरूप पर असर पड़ सकता है
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और नए आयाम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल अमेरिकी विदेशी सहायता का चेहरा बदल सकता है।
कई वैश्विक विश्लेषकों ने माना कि:
- अमेरिका ने राहत कार्यों में कूटनीति और सैन्य संसाधनों को नई तरह से जोड़ा
- स्टेट डिपार्टमेंट को केंद्र में रखकर भविष्य में और अधिक केंद्रीकृत मॉडल देखने को मिल सकते हैं
- अन्य देश भी इस तेज़-प्रतिक्रिया मॉडल से प्रेरणा ले सकते हैं
हालाँकि, यह भी सच है कि दीर्घकालिक विकास कार्यों के लिए केवल केंद्रीकृत आपातकालीन मॉडल पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
🔍 निष्कर्ष
तूफान मेलिसा के बाद अमेरिकी राहत नीति में आया बदलाव केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं बल्कि एक रणनीतिक प्रयोग है।
यह मॉडल:
- तेज़ प्रतिक्रिया
- सैन्य-कूटनीतिक समन्वय
- कम नौकरशाही
जैसे गुणों को बढ़ावा देता है।
अब दुनिया की निगाह इस पर होगी कि क्या यह नीति भविष्य में भी कायम रहती है या अमेरिकी प्रणाली पारंपरिक ढांचे—विशेषकर USAID जैसे संस्थागत तंत्र—की ओर लौटती है। जो भी हो, मेलिसा के बाद की राहत रणनीति ने विदेशी सहायता की बहस को एक नए अध्याय में प्रवेश करा दिया है।
