अमेरिका–पेरू साझेदारी का नया दौर: सुरक्षा, खनिज और कूटनीति में गहरा होता सहयोग

अमेरिका और पेरू के द्विपक्षीय संबंधों में 5 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिला, जब वाशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और पेरू के विदेश मंत्री ह्यूगो डी ज़ेला की मुलाकात हुई। यह बैठक दोनों देशों के बीच सुरक्षा प्रबंधन, महत्वपूर्ण खनिज सहयोग और कूटनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक नया अध्याय खोलती है।
🔰 सुरक्षा सहयोग: अपराध विरोधी अभियान को नया आधार
इस मुलाकात का सबसे अहम पहलू रहा—अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त रणनीति को आगे बढ़ाना।
अमेरिका और पेरू दोनों ही मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और संगठित अपराध के नेटवर्क से प्रभावित हैं। बैठक में निम्न बिंदुओं पर सहमति बनी:
- सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझाकरण
- संयुक्त प्रशिक्षण मिशन और तकनीकी सहायता
- सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उन्नत उपकरण और सामरिक सहयोग
यह कदम न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाएगा, बल्कि अपराधियों की सीमा-पार गतिविधियों पर भी रोक लगाएगा।
⚙️ महत्वपूर्ण खनिज—ऊर्जा परिवर्तन का साझा आधार
पेरू दुनिया के प्रमुख खनिज उत्पादक देशों में से एक है, खासकर लिथियम, तांबा और रेयर-अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में। आधुनिक तकनीक, बैटरी निर्माण और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ये मिनरल अत्यंत आवश्यक हैं।
अमेरिका ने:
- खनिज अन्वेषण में वैज्ञानिक सहयोग
- पर्यावरण-अनुकूल खनन तकनीकों पर संयुक्त कार्य
- वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाने
जैसे बिंदुओं पर पेरू के साथ साझेदारी को बढ़ाने का फैसला किया।
यह वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
🌐 कूटनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एकजुटता
बैठक केवल सुरक्षा और खनिजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें राजनीतिक और कूटनीतिक एकजुटता पर भी विस्तार से बातचीत हुई। दोनों देशों ने:
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती
- मानवाधिकारों की रक्षा
- क्षेत्रीय स्थिरता और संकट प्रबंधन
- संयुक्त राष्ट्र और OAS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
📝 निष्कर्ष
मार्को रुबियो और ह्यूगो डी ज़ेला की यह मुलाकात अमेरिका–पेरू संबंधों को नई दिशा देने वाला निर्णायक क्षण है।
इससे:
- सुरक्षा ढांचा मजबूत होगा
- हरित ऊर्जा के क्षेत्र में खनिज आपूर्ति सुरक्षित होगी
- और लोकतांत्रिक मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलेगी
यह बहुआयामी सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए अवसरों के नए द्वार खोल सकता है।
