फ़रवरी 15, 2026

गोवा अर्पोरा क्लब अग्निकांड पर अखिलेश यादव का कड़ा प्रहार: “मानव जीवन से बड़ी कोई राष्ट्रभक्ति नहीं”

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गोवा के अर्पोरा क्षेत्र स्थित नाइट क्लब ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ में लगी भयंकर आग ने देश को गहरी पीड़ा और चिंता में डाल दिया है। इस हादसे में 25 लोगों की जान चली गई—जिनमें 20 कर्मचारी और 5 पर्यटक शामिल थे। यह घटना केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलताओं और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी का गंभीर संकेत बनकर सामने आई है।

अखिलेश यादव का हमला: “यह हादसा राष्ट्रीय शर्म”

समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने इस घटना के मद्देनज़र केंद्र और गोवा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसी भयावह घटना के बाद भी जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश राष्ट्रभक्ति की नहीं, बल्कि मानवता के प्रति असंवेदनशीलता की निशानी है।

यादव ने सवाल उठाया:
“जब 25 लोग जान गंवा बैठे, तब असली राष्ट्रभक्ति क्या है? क्या नारे ही सब कुछ हैं, या नागरिकों की सुरक्षा भी सत्ता की जिम्मेदारी है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की शह पर ही आरोपी देश छोड़कर भागने में सफल हुए। यादव ने पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग दोहराई।

लाइसेंस खत्म, फिर भी क्लब चालू—प्रशासन पर गंभीर सवाल

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

  • क्लब मार्च 2024 में ट्रेड लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी चल रहा था।
  • स्थानीय पंचायत ने पानी, बिजली और मरम्मत जैसी सुविधाओं के लिए NOC जारी कर दी, लेकिन संचालित करने का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराया।
  • गोवा पंचायत राज अधिनियम की धारा 72-A के अनुसार पंचायत को क्लब को सील करना चाहिए था—लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

एक अधिकारी के अनुसार, स्थानीय पुलिस क्लब के संचालन की जांच करना चाहती थी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच रोक दी, जिससे कई अनियमितताएँ जारी रहीं।

आरोपी देश छोड़कर फरार—इंटरपोल से मदद

क्लब के मालिक गौरव और सौरभ लूथरा घटना के बाद थाईलैंड के फुकेट भाग गए।
उनके भागने के बाद गोवा पुलिस ने सीबीआई की इंटरपोल शाखा से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने व दोनों को भारत वापस लाने के लिए संपर्क किया है।

विपक्ष का सरकार पर प्रहार: कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप

हादसे के बाद राजनीतिक हलकों में उबाल है।

  • कांग्रेस ने इसे “शासन की आपराधिक विफलता” बताया।
  • AAP ने सीधे मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की।

विपक्ष का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शिथिलता ने इस त्रासदी को जन्म दिया।

निष्कर्ष: जवाबदेही तय करने का वक्त

अर्पोरा क्लब अग्निकांड यह याद दिलाता है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की कीमत हमेशा जनता को चुकानी पड़ती है। अखिलेश यादव समेत कई नेताओं की कड़ी प्रतिक्रियाएँ इस बढ़ते जनाक्रोश का संकेत हैं।

यह आवश्यक है कि—

  • दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो,
  • सुरक्षा मानकों की सख्ती से समीक्षा की जाए,
  • और पीड़ित परिवारों को न्याय और सहायता मिले।

यह घटना चेतावनी है कि मानव जीवन की सुरक्षा किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


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