फ़रवरी 15, 2026

यमन में संयुक्त राष्ट्र के 59 कर्मियों की गिरफ्तारी ने बढ़ाई अंतरराष्ट्रीय चिंता

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यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र से जुड़े 59 कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना ने वैश्विक स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। यह कदम न केवल मानवीय प्रयासों को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति के लिए भी गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए सभी कर्मियों की तत्काल और सुरक्षित रिहाई की मांग की है।


बिना प्रक्रिया गिरफ्तारी: अंतरराष्ट्रीय मानकों का खुला उल्लंघन

जानकारी के अनुसार, हूती प्रशासन ने विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों में कार्यरत यमनी कर्मियों को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के हिरासत में लिया है। इनमें से कई कर्मचारियों को पिछले काफी समय से बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग रखा गया है।
इसके अलावा, एनजीओ, सामाजिक संगठनों और राजनयिक दफ्तरों से जुड़े कई व्यक्तियों को भी इसी तरह गिरफ्तार किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफ़न दुजारिक ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को उनके आधिकारिक कार्यों के दौरान कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाती है। ऐसे में हूती प्रशासन द्वारा उन्हें विशेष अदालत में पेश करना अंतरराष्ट्रीय ढांचे का सीधा उल्लंघन है।


हूती प्रशासन के आरोप और राजनीतिक वातावरण

हूती समूह का दावा है कि पकड़े गए कर्मचारियों ने इज़राइल के एक हालिया हवाई हमले में सहयोग किया था, जिसमें उनके कई अधिकारियों की मौत हुई। इस आरोप के बाद विद्रोही प्रशासन ने जासूसी के नाम पर बड़ी संख्या में नागरिकों को भी हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
पिछले महीने 17 लोगों को विदेशी देशों के लिए जासूसी करने के आरोप में मौत की सजा तक सुना दी गई, जिससे क्षेत्र की राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है।


संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया

महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोशल मीडिया के माध्यम से हूती नेतृत्व पर तत्काल दबाव बनाया और कहा—

“हम हूती प्रशासन से अपील करते हैं कि सभी संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को विशेष न्यायालय भेजने का निर्णय वापस लिया जाए और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।”

गुटेरेस ने यह भी पुनः आश्वस्त किया कि संयुक्त राष्ट्र यमन की आबादी तक मानवीय सहायता पहुंचाने के अपने मिशन में अडिग है।


यमन का मानवीय संकट और वैश्विक प्रभाव

यमन पिछले कई वर्षों से भयंकर मानवीय आपदा का सामना कर रहा है। देश के लाखों लोग भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कर्मचारियों की गिरफ्तारी उन राहत कार्यों को बाधित कर सकती है, जो यमन की कमजोर आबादी के लिए जीवन रेखा की तरह हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो क्षेत्र में राहत और विकास कार्यक्रमों की गति पर गंभीर असर पड़ेगा।


निष्कर्ष

हूती विद्रोहियों का यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध है, बल्कि यमन की पीड़ित जनता के हितों को भी क्षति पहुंचाता है।
वैश्विक समुदाय को इस मामले पर एकजुट होकर दबाव बनाना होगा, ताकि गिरफ्तार सभी कर्मियों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित हो सके और यमन में जारी मानवीय सहायता कार्य बिना किसी अवरोध के आगे बढ़ते रहें।


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