यूक्रेन संकट पर वैश्विक रणनीति तेज़: ‘Coalition of the Willing’ की बैठक और फ्रांस में प्रस्तावित शिखर वार्ता

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति एक बार फिर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने 30 दिसंबर 2025 को घोषणा की कि यूक्रेन के समर्थन में गठित ‘Coalition of the Willing’ से जुड़े देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार 3 जनवरी को यूक्रेन में एक अहम बैठक करेंगे। इसके ठीक तीन दिन बाद, 6 जनवरी को फ्रांस में शीर्ष नेताओं का सम्मेलन आयोजित किए जाने की योजना है।
क्या है ‘Coalition of the Willing’?यहाँ प्रस्तुत
‘Coalition of the Willing’ उन देशों का एक स्वैच्छिक अंतरराष्ट्रीय समूह है, जो यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन में एकजुट हैं। यह गठबंधन औपचारिक सैन्य संगठन नहीं है, बल्कि साझा राजनीतिक इच्छाशक्ति पर आधारित है। ब्रिटेन और फ्रांस इस समूह की अगुवाई कर रहे हैं, जबकि इसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 30 से अधिक देश शामिल माने जाते हैं।
बैठक से क्या उम्मीदें?
यूक्रेन में होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक का फोकस तकनीकी, रक्षा और रणनीतिक समन्वय पर रहेगा। इसमें युद्धविराम की संभावनाओं, सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर ठोस खाका तैयार किया जाएगा।
वहीं फ्रांस में प्रस्तावित नेताओं का शिखर सम्मेलन राजनीतिक स्तर पर सहमति बनाने, दीर्घकालिक सहयोग और साझा जिम्मेदारियों को परिभाषित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका की सक्रियता और ट्रंप टीम की भूमिका
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया है। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन से जुड़ी टीम विभिन्न प्रभावी मंचों पर सक्रिय सहयोग के लिए तैयार है। यह संकेत अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में नए सिरे से ऊर्जा और व्यावहारिक दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है।
ज़ेलेंस्की की कूटनीतिक तेजी
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में समय सबसे बड़ा कारक है, और देश किसी भी स्तर पर देरी नहीं कर सकता। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रुस्तेम उमेरोव के साथ आगे की रणनीति, प्राथमिकताओं और आगामी कदमों पर गहन चर्चा की है। यह दिखाता है कि यूक्रेन सैन्य मोर्चे के साथ-साथ राजनयिक मोर्चे पर भी पूरी तरह सक्रिय है।
अंतरराष्ट्रीय माहौल और संभावित असर
इस पहल को लेकर वैश्विक स्तर पर उत्सुकता बनी हुई है। भले ही भाग लेने वाले देशों की औपचारिक सूची सामने नहीं आई हो, लेकिन यूरोपीय संघ, अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख साझेदारों की मौजूदगी की उम्मीद की जा रही है। यदि यह बैठक सफल रहती है, तो यूक्रेन को सैन्य सहायता के साथ-साथ आर्थिक समर्थन और कूटनीतिक मजबूती भी मिल सकती है।
निष्कर्ष
3 जनवरी को यूक्रेन में होने वाली बैठक और 6 जनवरी को फ्रांस में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन रूस-यूक्रेन संघर्ष के भविष्य को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की सक्रिय कूटनीति और सहयोगी देशों की एकजुटता यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यूक्रेन को लेकर एक नया, अधिक संगठित दृष्टिकोण उभर रहा है।
