फ़रवरी 12, 2026

बंगाल की सियासत और अखिलेश यादव का संदेश: भाजपा के ख़िलाफ़ विपक्षी एकजुटता का संकेत

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नए साल के पहले दिन, 1 जनवरी 2026 को लखनऊ में मीडिया से संवाद करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को जनता का प्रचंड समर्थन मिलेगा और भाजपा की रणनीतियाँ निष्फल साबित होंगी।

बंगाल में चुनावी गर्मी तेज़

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है। भाजपा ने राज्य में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को केंद्र में रखते हुए आक्रामक तेवर अपनाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कोलकाता दौरे के दौरान आरोप लगाया कि राज्य सरकार अवैध घुसपैठ को लेकर गंभीर नहीं है और केंद्र सरकार की योजनाओं में बाधा डाल रही है।

ममता बनर्जी का पलटवार

भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों की भाषा और मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल की जनता बाहरी दबाव को कभी स्वीकार नहीं करेगी। तृणमूल कांग्रेस के स्थापना दिवस पर उन्होंने एक बार फिर “माँ, माटी और मानुष” के सिद्धांत को दोहराते हुए जनता के हितों की रक्षा का संकल्प लिया।

अखिलेश यादव की तीखी टिप्पणी

अखिलेश यादव ने बंगाल की राजनीति को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा की कथित “राजनीतिक चालें” इस बार सफल नहीं होंगी। उनके अनुसार, ममता बनर्जी न सिर्फ़ सरकार बनाएँगी, बल्कि बड़े जनादेश के साथ जीत दर्ज करेंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश में भी सत्ता समीकरण बदलने की ज़मीन तैयार हो रही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से जुड़े SIR आँकड़ों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाया गया। अखिलेश के अनुसार, जब सत्ता पक्ष यह कहता है कि करोड़ों मतदाता सूची से हटाए गए, तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी आँकड़ों और SIR डेटा में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है, तो आयोग को पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची और चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहना अनिवार्य है।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश—दोनों राज्यों में राजनीति एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। भाजपा जहाँ आक्रामक चुनावी रणनीति अपना रही है, वहीं विपक्षी दल एकजुट होकर उसे चुनौती देने का दावा कर रहे हैं। अखिलेश यादव का यह बयान न केवल बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा करता है, बल्कि उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति को भी एक नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


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