प्रयागराज में आस्था का महासंगम: 44 दिवसीय माघ मेला भव्य शुभारंभ के साथ शुरू

प्रयागराज की पावन धरती एक बार फिर श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपराओं की साक्षी बनी है। त्रिवेणी संगम के तट पर 44 दिनों तक चलने वाले माघ मेले का शुभारंभ हो चुका है। मकर संक्रांति से पूर्व आरंभ हुए इस महापर्व में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।
🌊 संगम पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मेले के पहले ही दिन सुबह से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। साधु-संतों के अखाड़ों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार और हर-हर गंगे के जयकारों के बीच पवित्र स्नान किया। सूर्य की पहली किरण के साथ संगम तट आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
🏕️ व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम
प्रशासन ने इस भव्य आयोजन को सुचारु बनाने के लिए व्यापक तैयारियाँ की हैं। मेला क्षेत्र को सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जहाँ स्वच्छ जल, चिकित्सा सुविधा, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। कल्पवासियों के लिए अस्थायी आवास, भोजनालय और धार्मिक प्रवचनों की व्यवस्था भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
📜 धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अनूठा संगम
माघ मेला केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि यह तप, त्याग और साधना का प्रतीक भी है। कल्पवास के दौरान श्रद्धालु संयमित जीवन जीते हुए ध्यान, यज्ञ और सत्संग में समय व्यतीत करते हैं। विद्वानों के प्रवचन, धार्मिक कथाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले की गरिमा को और बढ़ा रहे हैं।
✨ आस्था के साथ सामाजिक चेतना
इस वर्ष माघ मेले में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता अभियानों पर भी विशेष जोर दिया गया है। गंगा स्वच्छता संदेश, प्लास्टिक-मुक्त क्षेत्र और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश दिया जा रहा है।
प्रयागराज का माघ मेला सदियों से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक रहा है। 44 दिनों तक चलने वाला यह महापर्व न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि भारत की समृद्ध परंपराओं को भी नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य करता है।
