भारतीय तटरक्षक बल को मिला नया प्रदूषण रक्षक जहाज़ ‘समुद्र प्रताप’

समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की सशक्त छलांग
भारत ने समुद्री पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। 5 जनवरी 2026 को गोवा में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। यह क्षण न केवल तकनीकी सफलता का प्रतीक है, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
🚢 तकनीकी क्षमता और संरचनात्मक मजबूती का संगम
‘समुद्र प्रताप’ को विशेष रूप से बहुउद्देश्यीय समुद्री अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इसे अत्याधुनिक श्रेणी में स्थापित करती हैं:
- कुल लंबाई: 114.5 मीटर
- विस्थापन क्षमता: लगभग 4,200 टन
- अधिकतम गति: 22 नॉट्स से अधिक
- अभियान सीमा: 6,000 समुद्री मील
- निर्माण स्थल: गोवा शिपयार्ड लिमिटेड
- स्वदेशी तकनीक और सामग्री: 60 प्रतिशत से अधिक
यह पोत समुद्री प्रदूषण की घटनाओं, खोज एवं बचाव अभियानों, समुद्री कानूनों के अनुपालन तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी में सक्षम है।
🇮🇳 आत्मनिर्भर भारत का सशक्त प्रतीक
पूरी तरह भारत में निर्मित ‘समुद्र प्रताप’ देश की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाता है। गोवा शिपयार्ड द्वारा विकसित यह पोत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों की सफलता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यह जहाज़ भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और जिम्मेदार वैश्विक भूमिका का प्रतीक है।
🎙️ समारोह और नेतृत्व का संदेश
कमीशनिंग कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ सैन्य और असैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि:
“समुद्र प्रताप हमारी समुद्री सीमाओं के साथ-साथ समुद्री पर्यावरण की रक्षा में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह भारत की तकनीकी दक्षता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को दर्शाता है।”
🌊 समुद्री पर्यावरण सुरक्षा में ऐतिहासिक कदम
‘समुद्र प्रताप’ भारत का पहला ऐसा समर्पित पोत है, जिसे समुद्र में तेल रिसाव, रासायनिक प्रदूषण और औद्योगिक अपशिष्ट जैसी आपदाओं से निपटने के लिए तैयार किया गया है। तटीय क्षेत्रों में आपात स्थितियों के दौरान यह त्वरित राहत और बचाव अभियानों में भी प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
🔍 निष्कर्ष
आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ का भारतीय तटरक्षक बल में शामिल होना देश की समुद्री रणनीति को नई दिशा देता है। यह पोत सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर चलता है। तकनीकी आत्मनिर्भरता, समुद्री संप्रभुता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व—तीनों का समन्वय करता यह जहाज़ भारत को वैश्विक समुद्री शक्तियों की पंक्ति में और सुदृढ़ करता है।
