फ़रवरी 12, 2026

2027 के यूपी चुनाव की बिसात: दलित चेतना और भाजपा की नई राजनीतिक दिशा

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही 2027 में होने हों, लेकिन राज्य की राजनीति अभी से हलचल में है। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक संतुलन की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। इस कवायद के केंद्र में दलित समाज की ऐतिहासिक चेतना, उसके महापुरुष और वैचारिक विरासत को पुनः प्रमुखता देना शामिल है।

दलित प्रतीकों के जरिए सामाजिक संवाद

बीते कुछ समय में भाजपा ने डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, महात्मा फुले और अन्य दलित-बहुजन विचारकों से जुड़ी गतिविधियों को गति दी है। जयंती कार्यक्रम, स्मृति स्थलों का विकास, सांस्कृतिक आयोजन और सरकारी योजनाओं के साथ इन प्रतीकों को जोड़ने का प्रयास पार्टी के व्यापक सामाजिक संवाद का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा केवल प्रतीकात्मक राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दलित समाज के भीतर वैचारिक स्वीकृति और भरोसा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

बसपा के पारंपरिक आधार में सेंध?

उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति का पारंपरिक चेहरा बहुजन समाज पार्टी रही है। ऐसे में भाजपा की यह पहल उस वोट बैंक में पैठ बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है, जो लंबे समय तक बसपा का मजबूत आधार रहा है। हालांकि यह रास्ता आसान नहीं है, क्योंकि दलित राजनीति केवल नारों से नहीं बल्कि सामाजिक अनुभवों और विश्वास से जुड़ी होती है।

सरकार और संगठन की दोहरी रणनीति

भाजपा सरकार स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं—जैसे आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोज़गार—को दलित वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दे रही है। वहीं संगठनात्मक स्तर पर दलित नेताओं की भूमिका को बढ़ाने और जमीनी संपर्क को मजबूत करने की कोशिशें भी तेज हुई हैं।

पार्टी की योजना है कि सामाजिक न्याय के मुद्दों को केवल विरोधियों के हाथ में न जाने दिया जाए, बल्कि उन्हें विकास और सुशासन के एजेंडे से जोड़ा जाए।

2027 की तस्वीर कितनी बदलेगी?

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि दलित विरासत पर केंद्रित यह रणनीति 2027 के चुनाव परिणामों को किस हद तक प्रभावित करेगी। लेकिन इतना तय है कि इससे यूपी की राजनीति में वैचारिक बहस और सामाजिक समीकरण दोनों बदल सकते हैं।

भाजपा की यह पहल चुनावी गणित से आगे बढ़कर सामाजिक पहचान और राजनीतिक संदेश को नए फ्रेम में पेश करने का प्रयास है—जिसका असर आने वाले समय में साफ नजर आएगा।


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