कतरनियाघाट में जंगली जानवरों के खौफ के बीच बिजली कटौती से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी, जेई को सौंपा ज्ञापन

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अमृत पाल बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

बहराइच। कतरनियाघाट वन्यजीव क्षेत्र से सटे कैलाशपुरी रेंज के ग्रामीण इन दिनों जंगली जानवरों की बढ़ती गतिविधियों और बिजली की अनियमित आपूर्ति से दोहरी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय जंगली जानवरों का भय बना रहता है और ऐसे में बिजली कटौती होने से उनकी सुरक्षा संबंधी चिंता और बढ़ जाती है। इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने आज कैलाशपुरी स्थित विद्युत हाउस पहुंचकर अवर अभियंता (जेई) को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में जंगली जानवरों की लगातार आवाजाही और हमलों की घटनाओं के कारण रात के समय लोगों में भय का माहौल रहता है। कई ग्रामीणों को अपने घरों और आसपास के इलाकों में सतर्क रहना पड़ता है। ठंड के मौसम में रातभर जागकर निगरानी करना अपने आप में बड़ी चुनौती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस दौरान बिजली भी चली जाए तो अंधेरे के कारण खतरा और बढ़ जाता है।

बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

कैलाशपुरी रेंज के ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत रात के समय होने वाली बिजली कटौती को लेकर है। उनका कहना है कि जिस समय उन्हें रोशनी और बिजली की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, उसी दौरान आपूर्ति बाधित होने से मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगली क्षेत्र से लगे गांवों में रात का समय सामान्य ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। अंधेरा होने के बाद जंगली जानवरों की गतिविधियों को लेकर पहले से ही आशंका बनी रहती है। ऐसे में बिजली की कटौती के कारण घरों और गांव की गलियों में अंधेरा छा जाने से लोगों की चिंता बढ़ जाती है।

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि रात के समय की लाइन रोस्टिंग को समाप्त कर बिजली कटौती का समय दिन में निर्धारित किया जाए। उनका तर्क है कि दिन में बिजली कटौती होने पर लोगों को अपेक्षाकृत कम परेशानी होगी, जबकि रात में आपूर्ति बनाए रखने से सुरक्षा संबंधी चिंताओं को कम किया जा सकता है।

जंगली जानवरों के भय के बीच रात में पहरा

कतरनियाघाट क्षेत्र के कई गांव जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के आसपास बसे हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, हाल के दिनों में जंगली जानवरों की मौजूदगी को लेकर लोगों में लगातार भय बना हुआ है। शाम होते ही ग्रामीण अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय कई लोग समूह बनाकर आसपास निगरानी करते हैं। ठंड के बीच रातभर जागना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में यदि बिजली की आपूर्ति भी बाधित हो जाए तो निगरानी व्यवस्था प्रभावित होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त रोशनी होने से लोग आसपास की गतिविधियों को आसानी से देख सकते हैं और किसी संदिग्ध हलचल की स्थिति में समय रहते सतर्क हो सकते हैं। हालांकि, बिजली को जंगली जानवरों से सुरक्षा की एकमात्र व्यवस्था नहीं माना जा सकता। ग्रामीण वन विभाग और प्रशासन से भी क्षेत्र में सुरक्षा एवं वन्यजीव निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की अपेक्षा कर रहे हैं।

किसान नेताओं और समाजसेवी ने उठाई ग्रामीणों की आवाज

ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान यूनियन के प्रदेश सचिव मलकीत सिंह और समाजसेवी अमृतपाल सिंह ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। इनके अलावा लखविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह और परमानंद चौहान सहित अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारी के सामने अपनी समस्याएं रखीं और बिजली आपूर्ति के समय में बदलाव की मांग की। उनका कहना था कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और वर्तमान सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए बिजली विभाग को रात की रोस्टिंग व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने अपनी मांग को लिखित रूप में विद्युत विभाग के सामने रखा है। उनका कहना है कि यह केवल बिजली की सामान्य समस्या नहीं है, बल्कि वन क्षेत्र से लगे गांवों में लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।

सात दिन का समय, आठवें दिन बड़े धरने की चेतावनी

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए सात दिन का समय दिया है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर रात के समय होने वाली लाइन रोस्टिंग को बंद करके बिजली कटौती का समय दिन में नहीं किया गया और विद्युत समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आठवें दिन ग्रामीण बड़े स्तर पर धरना शुरू करेंगे।

ग्रामीणों की इस चेतावनी के बाद अब विद्युत विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर समस्या का समाधान नहीं होता है तो क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी मांग को शांतिपूर्ण तरीके से विभाग के सामने रख रहे हैं और चाहते हैं कि अधिकारियों द्वारा उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाए। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि बिजली आपूर्ति को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्थित करवाना है।

वन विभाग से भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की उम्मीद

कैलाशपुरी रेंज के ग्रामीणों की समस्या केवल बिजली विभाग तक सीमित नहीं है। जंगली जानवरों की मौजूदगी को लेकर ग्रामीण वन विभाग से भी प्रभावी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र से सटे गांवों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जानी चाहिए। यदि किसी इलाके में जंगली जानवर की मौजूदगी की सूचना मिलती है तो संबंधित विभाग की टीम को समय पर पहुंचकर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

साथ ही ग्रामीणों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। विशेषज्ञों और वन विभाग की ओर से समय-समय पर ग्रामीणों को यह जानकारी दी जानी चाहिए कि जंगली जानवर दिखाई देने की स्थिति में क्या सावधानियां बरती जाएं और किन परिस्थितियों में तुरंत विभाग को सूचना दी जाए।

ग्रामीणों को समाधान का इंतजार

कैलाशपुरी क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की समस्या का समाधान जल्द किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि रात में पर्याप्त बिजली उपलब्ध रहने से गांवों में रोशनी बनी रहेगी और लोगों को अपनी सामान्य गतिविधियों तथा निगरानी में सुविधा होगी।

हालांकि, जंगली जानवरों की समस्या का स्थायी समाधान केवल बिजली आपूर्ति से संभव नहीं है। इसके लिए विद्युत विभाग, वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। वन्यजीवों की आवाजाही वाले इलाकों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को भी स्थानीय जरूरतों के अनुसार संचालित करना जरूरी है।

फिलहाल ग्रामीणों ने अपना ज्ञापन सौंपकर विभाग के सामने मांग रख दी है और सात दिन की समयसीमा तय की है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विद्युत विभाग उनकी मांग पर क्या कदम उठाता है। यदि निर्धारित समय में समस्या का समाधान हो जाता है तो ग्रामीणों को राहत मिल सकती है, लेकिन मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में आठवें दिन प्रस्तावित धरना क्षेत्र में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों की मुख्य मांग यही है कि रात के समय बिजली की रोस्टिंग बंद कर आपूर्ति बाधित करने का समय दिन में निर्धारित किया जाए, ताकि जंगली जानवरों के भय के बीच उन्हें रात में अंधेरे की अतिरिक्त समस्या का सामना न करना पड़े।

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