रायबरेली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के तीन आरोपी गिरफ्तार, चोरी की कारें बरामद

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रविकांत पाण्डेय

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ रायबरेली

दिनांक 11 सितंबर 2026

रायबरेली। जिले में वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से चलाए जा रहे अभियान के बीच कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मुखबिर की सूचना, सर्विलांस और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए कथित अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई कारें और घटना में इस्तेमाल अथवा संबंधित अन्य सामान बरामद किया गया है।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद वाहन चोरी के मामलों में सक्रिय गिरोहों को लेकर जांच और तेज कर दी गई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए वाहनों को कहां खपाया जाता था और इस नेटवर्क में इनके अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

लखनऊ रोड पर पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, वाहन चोरी के मामलों की जांच के दौरान पुलिस टीम को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया और सर्विलांस के माध्यम से संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी।

इसी क्रम में पुलिस को सूचना मिली कि वाहन चोरी से जुड़े कुछ संदिग्ध लोग शहर के जहानाबाद चौकी के आगे लखनऊ रोड की ओर मौजूद हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान तीन संदिग्धों को पकड़ लिया गया।

पकड़े गए लोगों की पहचान अलग-अलग स्थानों के निवासियों के रूप में हुई है। इससे पुलिस को आशंका है कि वाहन चोरी का यह नेटवर्क एक जिले तक सीमित न होकर अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हो सकता है।

तीन अलग-अलग क्षेत्रों के रहने वाले हैं आरोपी

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में फैजल, निवासी आजम वाली मिलक, थाना मैनाठेर, जनपद मुरादाबाद; अंकुर, निवासी हसनपुर, थाना बछरावां, जनपद रायबरेली; और प्रेमाराम, निवासी गोपालपुरा, नाथड़ऊ, जोधपुर, राजस्थान शामिल हैं।

तीनों के अलग-अलग जिलों और एक दूसरे राज्य से संबंध होने के कारण पुलिस इस मामले को अंतरराज्यीय स्तर से जोड़कर भी जांच कर रही है। हालांकि गिरोह की वास्तविक गतिविधियों और उसके नेटवर्क की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

चोरी की कारों की बरामदगी से अहम सुराग

पुलिस के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ चोरी की गई कारों को बरामद किया गया है। वाहनों की बरामदगी को इस कार्रवाई की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस अब बरामद वाहनों के संबंध में अलग-अलग थानों में दर्ज चोरी की शिकायतों और मुकदमों का रिकॉर्ड खंगाल रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद वाहनों को कब और कहां से चोरी किया गया था। इसके साथ ही यह जानकारी जुटाई जा रही है कि चोरी के बाद वाहनों को किस रास्ते से ले जाया जाता था और उन्हें बेचने या उनके पुर्जे अलग करने के लिए किन लोगों की मदद ली जाती थी।

पूछताछ में सामने आई कई जानकारियां

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने शहर के अलग-अलग इलाकों से कार चोरी करने की बात बताई है। पुलिस अब उनके बयानों का सत्यापन कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ से सामने आने वाली जानकारी को संबंधित मामलों के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है।

जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि गिरोह ने केवल रायबरेली में ही वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया या दूसरे जिलों में भी इसकी गतिविधियां थीं। आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और यात्रा से संबंधित जानकारी की भी जांच किए जाने की संभावना है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके।

दूसरे राज्यों तक नेटवर्क की जांच

तीन आरोपियों में से एक के राजस्थान और दूसरे के मुरादाबाद से होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस के सामने इस गिरोह के संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच का पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों का संपर्क वाहन चोरी से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क से था या वे सीमित स्तर पर ही वारदात करते थे। इसके अलावा चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

यदि जांच के दौरान दूसरे जिलों या राज्यों में वाहन चोरी के मामलों से इनका संबंध सामने आता है, तो पुलिस संबंधित स्थानों की पुलिस से भी संपर्क कर सकती है।

वाहन मालिकों के लिए भी अहम संकेत

वाहन चोरी की घटनाएं रोकने के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ वाहन मालिकों की सतर्कता भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन को सुनसान स्थान पर लंबे समय तक खड़ा करने से बचना, सुरक्षित पार्किंग का इस्तेमाल करना और वाहन में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं को सक्रिय रखना चोरी की आशंका को कम करने में मदद कर सकता है।

वाहन मालिकों को अपने वाहन के दस्तावेज और बीमा संबंधी जानकारी भी सुरक्षित रखनी चाहिए। चोरी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने से वाहन की तलाश और बरामदगी की संभावना बढ़ सकती है।

पुलिस की कार्रवाई से गिरोहों पर बढ़ा दबाव

रायबरेली पुलिस की इस कार्रवाई को वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। तीन संदिग्धों की गिरफ्तारी और चोरी के वाहनों की बरामदगी से पुलिस को आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण आधार मिला है।

हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होती है। फिलहाल पुलिस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

न्यायालय में पेश किए जाएंगे आरोपी

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।

इसके साथ ही पुलिस गिरोह के संभावित अन्य सदस्यों की तलाश और चोरी के वाहनों के नेटवर्क की जांच में जुटी है। बरामद वाहनों से जुड़े पुराने मामलों की जानकारी जुटाकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता था।

आगे की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरोह केवल कुछ लोगों तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस द्वारा की जा रही तकनीकी जांच और पूछताछ से आने वाले दिनों में इस संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

वाहन चोरी के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। अब पुलिस के सामने चुनौती गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े संभावित अन्य लोगों तक पहुंचने और चोरी के वाहनों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की है।

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