चित्रकूट जिला कारागार का जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने किया आकस्मिक निरीक्षण, व्यवस्थाओं को लेकर दिए सख्त निर्देश

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चित्रकूट, 31 अगस्त 2026।
चित्रकूट जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सोमवार को जिला कारागार की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अचानक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने जिला कारागार पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, भोजन, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की। अधिकारियों के अचानक पहुंचने से जेल प्रशासन में भी हलचल रही और विभिन्न व्यवस्थाओं को मौके पर परखा गया।

निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि जेल में निरुद्ध बंदियों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। अधिकारियों ने जेल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए और बंदियों के लिए अनुमन्य सभी सुविधाएं नियमानुसार उपलब्ध कराई जाएं।

सीसीटीवी व्यवस्था का लिया जायजा

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सबसे पहले जेल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी ली। इस दौरान सीसीटीवी कैमरों के संचालन और निगरानी व्यवस्था को भी देखा गया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि जेल परिसर की संवेदनशील गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी बनी रहे।

जेल जैसे संवेदनशील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिकारियों ने जेल प्रशासन से कहा कि निगरानी व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और यदि किसी उपकरण या व्यवस्था में तकनीकी समस्या हो तो उसका समय रहते समाधान कराया जाए।

महिला बैरक में बंदियों से बातचीत

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने महिला बैरक का भी जायजा लिया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने वहां निरुद्ध महिलाओं से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। विशेष रूप से उनसे खान-पान की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं के संबंध में पूछा गया।

महिला बंदियों से बातचीत के दौरान अधिकारियों ने यह समझने का प्रयास किया कि उन्हें जेल प्रशासन की ओर से निर्धारित सुविधाएं नियमित रूप से मिल रही हैं या नहीं। अधिकारियों ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि महिला बंदियों की आवश्यकताओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाए और किसी प्रकार की शिकायत सामने आने पर उसका नियमानुसार समाधान कराया जाए।

फोन पर बातचीत की सुविधा जारी रखने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन को बंदियों के लिए दूरभाष पर बातचीत की सुविधा शासन की गाइडलाइन के अनुसार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि पात्र बंदियों को निर्धारित नियमों के तहत अपने परिजनों से फोन पर बातचीत की सुविधा नियमित रूप से मिलती रहनी चाहिए।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेल में निरुद्ध व्यक्तियों के लिए शासन द्वारा जो सुविधाएं निर्धारित की गई हैं, उनका पालन जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए अनुमन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराने में अनावश्यक बाधा या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

हाई सिक्योरिटी बैरक की भी जांच

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने हाई सिक्योरिटी बैरक का भी निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की गई और बंदियों की तलाशी कराई गई। अधिकारियों ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि संवेदनशील बैरकों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए।

बैरक की सुरक्षा और बंदियों की गतिविधियों पर निगरानी को लेकर भी अधिकारियों ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल परिसर में प्रतिबंधित सामग्री या सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए नियमित जांच और निगरानी जरूरी है।

भोजन की गुणवत्ता और मीनू की हुई समीक्षा

निरीक्षण के दौरान जेल में बंदियों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और नाश्ते की व्यवस्था भी अधिकारियों के निरीक्षण के केंद्र में रही। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने जेल प्रशासन से भोजन की व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली और रसोईघर का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि बंदियों को भोजन और नाश्ता निर्धारित मीनू के अनुसार प्रतिदिन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि खान-पान की व्यवस्था में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

जेल की रसोई में साफ-सफाई, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और खाद्य सामग्री के रखरखाव को लेकर भी सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

आरओ पानी की उपलब्धता पर जोर

निरीक्षण के दौरान आरओ पानी की आपूर्ति की व्यवस्था भी देखी गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जेल में निरुद्ध बंदियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।

अधिकारियों ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि पानी की आपूर्ति और उसकी उपलब्धता की नियमित निगरानी की जाए। यदि किसी स्थान पर व्यवस्था में कमी सामने आती है तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर उसे दूर किया जाए।

शासन द्वारा निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने जेल में निरुद्ध बंदियों को शासन द्वारा निर्धारित सामग्री और अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक बंदी को नियमों के तहत जो सुविधाएं और सामग्री प्रदान किए जाने का प्रावधान है, उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने जेल प्रशासन से कहा कि व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखा जाए। बंदियों की आवश्यकताओं को शासन के नियमों और जेल मैनुअल के अनुरूप पूरा किया जाए।

जेल प्रशासन को लापरवाही से बचने की हिदायत

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि जेल परिसर की सुरक्षा, भोजन, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि निरुद्ध व्यक्तियों को नियमानुसार उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है। व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करते हुए कमियों को समय रहते दूर किया जाना चाहिए।

अचानक निरीक्षण से व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का यह आकस्मिक निरीक्षण जिला कारागार की व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति जानने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों ने अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण कर सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े पहलुओं को परखा।

निरीक्षण के अंत में जेल प्रशासन को शासन के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करने, बंदियों को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन एवं नाश्ता देने, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बनाए रखने, महिला बैरक की आवश्यकताओं पर ध्यान देने और दूरभाष सुविधा को नियमानुसार जारी रखने के निर्देश दिए गए।

प्रशासन की ओर से दिए गए इन निर्देशों का उद्देश्य जिला कारागार में सुरक्षा के साथ-साथ बंदियों के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेल में किसी भी स्तर पर अव्यवस्था या लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा और शासन के मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं बनाए रखना अनिवार्य होगा।

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