चित्रकूट में जर्जर सड़क के खिलाफ ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन, गड्ढों में रोपा धान; सात दिन की मोहलत
चित्रकूट ब्यूर रिपोर्ट
दिनांक 31 अगस्त 2026
चित्रकूट। जिले में बदहाल संपर्क मार्ग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। गिरधार बाबा वाया बहिलपुरवा संपर्क मार्ग की लंबे समय से खराब पड़ी स्थिति के विरोध में क्षेत्रवासियों ने बिजहना कोलान मड़ैयन के पास प्रदर्शन किया। बारिश के बाद सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भरने से परेशान ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए इन्हीं गड्ढों में धान की रोपाई की। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि गड्ढों में पानी जमा होने से यह मार्ग सड़क कम और खेत अधिक नजर आने लगा है।
ग्रामीणों के इस प्रदर्शन का उद्देश्य संबंधित विभाग और प्रशासन का ध्यान संपर्क मार्ग की वास्तविक स्थिति की ओर आकर्षित करना था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है और बारिश के मौसम में लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। मार्ग पर बने गहरे गड्ढों में पानी भरने के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

बारिश ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
गिरधार बाबा वाया बहिलपुरवा संपर्क मार्ग आसपास के गांवों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। प्रतिदिन इस रास्ते से ग्रामीणों के अलावा छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर और अन्य लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए आते-जाते हैं। सड़क की खराब हालत के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों और पैदल आने-जाने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है।
बारिश होने के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों में पानी जमा हो जाने से उनकी गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर कीचड़ और जलभराव के कारण रास्ते से गुजरना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा के काम के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है, इसलिए सड़क की बदहाली सीधे उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ समाधान
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क की समस्या को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों को कई बार जानकारी दी जा चुकी है। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। समय बीतने के साथ सड़क की स्थिति और खराब होती चली गई।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि शिकायतों के बाद विभाग सड़क की मरम्मत कराएगा, लेकिन जब समस्या बनी रही तो लोगों का धैर्य जवाब देने लगा। इसी नाराजगी के चलते क्षेत्रवासियों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। धान रोपकर किया गया प्रदर्शन इसी नाराजगी का प्रतीक बताया गया।
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क पर जमा पानी और गड्ढों की वजह से यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में राहगीरों को और अधिक परेशानी हो सकती है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सड़क की मरम्मत का काम जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
मौके पर पहुंचे पीडब्ल्यूडी के जेई
ग्रामीणों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग के जेई विधान सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की तथा संपर्क मार्ग की स्थिति का निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने उन्हें सड़क की समस्याओं से अवगत कराया और बताया कि किन स्थानों पर सबसे अधिक गड्ढे और जलभराव की समस्या है।
जेई के मौके पर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क की स्थिति को लेकर कई बार ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है। अब वे समस्या के स्थायी समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारी के सामने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं है। उनका कहना था कि सड़क की मरम्मत शुरू होने और गड्ढों को भरने का काम दिखाई देना चाहिए, तभी उन्हें भरोसा होगा कि समस्या के समाधान की दिशा में वास्तव में कदम उठाया जा रहा है।
सात दिन की समय सीमा
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने संबंधित विभाग को सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए सात दिन का समय दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में यदि सड़क की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि सात दिनों के भीतर गड्ढों की मरम्मत नहीं होने पर जल आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक यह आंदोलन सड़क की समस्या को लेकर उनके लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का अगला चरण होगा।
ग्रामीणों की इस चेतावनी के बाद अब निगाहें लोक निर्माण विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि विभाग उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए सड़क की मरम्मत के लिए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा।
धान रोपकर दिया अलग संदेश
सड़क के गड्ढों में धान रोपने का तरीका ग्रामीणों के प्रदर्शन को खास बना रहा। सामान्य तौर पर धान की रोपाई खेतों में की जाती है, लेकिन यहां ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों में जमा पानी के बीच धान लगाकर सड़क की दुर्दशा को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखा।
ग्रामीणों का कहना था कि जब सड़क पर इतने बड़े गड्ढे हैं और बारिश का पानी उनमें लंबे समय तक जमा रहता है, तो वहां खेत जैसा दृश्य दिखाई देता है। इसी स्थिति को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क की मरम्मत कराने और आवागमन को सुगम बनाने की मांग उठाई। उनका कहना है कि अच्छी सड़क केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के विकास और लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है।
बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी रहे मौजूद
विरोध प्रदर्शन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान अमित सिंह, विपिन, शिवपूजन, जानकी, अंकित विश्वकर्मा, विनोद, छोटू, हनुमान पटेल, उमेश, सौखीलाल कोल, शिवप्रसाद, राकेश पटेल, निलांशु पटेल, नत्थू, जानकी पटेल, हर्ष, मुकेश सिंह, ददन कोल, अभिषेक कोल, शिवलाल कोल, गोमती, माया, सुनीता, सुमन, कैलाश, राजू, गंगादीन, आलोक, ठाकुर राजेन्द्र प्रसाद और मुन्नू काक्षी समेत अन्य क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रदर्शन से स्पष्ट है कि संपर्क मार्ग की बदहाली अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। सात दिन की समय सीमा और जल आंदोलन की चेतावनी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग सड़क की मरम्मत को लेकर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि बरसात के दौरान आवागमन को सुरक्षित बनाने के लिए गड्ढों की तत्काल मरम्मत की जाए और भविष्य में सड़क की स्थिति दोबारा खराब न हो, इसके लिए आवश्यक स्थायी व्यवस्था की जाए।