रविदास नगर में तेंदुए की दस्तक से दहशत, शाम ढलते ही घरों में सिमट रहे ग्रामीण
कमलेश कुमार बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
सुजौली। ग्राम सभा सुजौली के रविदास नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तेंदुए की लगातार गतिविधियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आबादी के नजदीक बार-बार तेंदुआ दिखाई देने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। स्थिति यह है कि शाम होते ही लोग अपने बच्चों को घरों से बाहर निकलने से रोक रहे हैं और ग्रामीण अंधेरा होने के बाद अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बच रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कुछ समय से सुजौली क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में तेंदुए की मौजूदगी देखी जा रही है। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए जंगली जानवरों की आवाजाही नई बात नहीं है, लेकिन आबादी के करीब तेंदुए के बार-बार दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों, बुजुर्गों और पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
पत्रकार के घर के पीछे पहुंचा तेंदुआ
बुधवार शाम करीब सात बजे रविदास नगर में उस समय हड़कंप मच गया, जब पत्रकार कमलेश कुमार मौर्य के घर के पीछे तेंदुआ दिखाई देने की सूचना सामने आई। शाम का समय होने के कारण आसपास के लोगों में अचानक भय का माहौल बन गया। तेंदुए को आबादी के बीच देखकर ग्रामीणों ने एक-दूसरे को सतर्क किया और लोगों से घरों के अंदर रहने की अपील की।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से हाका लगाकर तेंदुए को आबादी वाले क्षेत्र से दूर भगाने का प्रयास किया। ग्रामीणों के शोर और एकजुटता के बाद तेंदुआ वहां से जंगल की दिशा में चला गया। हालांकि इस घटना के बाद इलाके में दहशत और बढ़ गई।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए का आबादी के आसपास आना लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। लोगों को आशंका है कि यदि तेंदुआ इसी तरह गांव के आसपास घूमता रहा तो किसी दिन इंसान या पालतू पशु पर हमला हो सकता है।
सूचना मिलने पर पहुंची वन विभाग की टीम
घटना की जानकारी ग्रामीणों की ओर से वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने के बाद वन दरोगा अनिल कुमार, रामनरेश और वेफई सहित वन विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम ने क्षेत्र का जायजा लिया और तेंदुए की गतिविधि के संबंध में ग्रामीणों से जानकारी प्राप्त की।
ग्रामीणों के अनुसार, तेंदुए को आबादी से दूर रखने के लिए मौके पर निगरानी और सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाने की जरूरत है। लोगों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी के दौरान सामान्य तरीके से उसे भगाना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित वनकर्मियों की मौजूदगी और उचित सुरक्षा उपकरण बेहद जरूरी हैं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तेंदुए को भगाने के लिए आवश्यक गोला-पटाखे अथवा अन्य सुरक्षा सामग्री की जरूरत महसूस हुई, लेकिन मौके पर मौजूद वनकर्मियों के पास पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं थी। इससे ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली।
संसाधनों की उपलब्धता को लेकर ग्रामीणों में चिंता
तेंदुए की लगातार गतिविधियों के बीच वन विभाग की तैयारियों को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जंगली जानवर बार-बार आबादी के करीब पहुंच रहा है तो पहले से आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था होनी चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक वन विभाग को क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने के साथ-साथ संभावित संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखनी चाहिए। खासकर शाम और रात के समय उन इलाकों में विशेष सतर्कता की जरूरत है, जहां तेंदुए की गतिविधियां देखी गई हैं।
लोगों का कहना है कि केवल तेंदुआ दिखाई देने के बाद मौके पर पहुंचना पर्याप्त नहीं है। उसकी आवाजाही पर नजर रखने और उसके आबादी की ओर आने के संभावित रास्तों की पहचान करने की जरूरत है। इससे वन विभाग को आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
बच्चों और पालतू पशुओं की सुरक्षा बनी चिंता
तेंदुए की मौजूदगी से सबसे अधिक चिंता बच्चों और पालतू पशुओं को लेकर जताई जा रही है। ग्रामीण परिवार शाम के बाद बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। कई लोग अपने पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर रखने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास रहने वाले परिवारों की दिनचर्या पर भी इसका असर पड़ा है। खेतों में काम करने वाले लोग अंधेरा होने से पहले घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, महिलाओं और बुजुर्गों को भी अकेले बाहर निकलने में डर महसूस हो रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि तेंदुए को पकड़ने या जंगल की ओर सुरक्षित तरीके से वापस भेजने के लिए विशेषज्ञ स्तर की कार्रवाई आवश्यक है। ग्रामीण खुद तेंदुए के करीब जाकर उसे भगाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे उनके लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों ने की प्रभावी कार्रवाई की मांग
रविदास नगर और आसपास के ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए की समस्या को गंभीरता से लेने की मांग की है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी बढ़ाई जाए और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए।
इसके अलावा ग्रामीण चाहते हैं कि तेंदुए की गतिविधियों वाले इलाकों में पर्याप्त सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाए। यदि विभागीय जांच में तेंदुए की लगातार मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने अथवा आबादी से दूर करने के लिए नियमानुसार प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना ज्यादा जरूरी है। समय रहते निगरानी और आवश्यक उपाय किए जाने से इंसानों और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
वन्यजीव और ग्रामीणों के बीच संतुलन जरूरी
तेंदुए जैसे वन्यजीवों का जंगल से निकलकर आबादी के आसपास पहुंचना कई बार भोजन, आवास क्षेत्र में बदलाव या प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ा हो सकता है। ऐसे मामलों में ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी भी जंगली जानवर को खुद पकड़ने, घेरने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों के लिए जरूरी है कि तेंदुआ दिखाई देने पर भीड़ न लगाएं, उसे घेरने की कोशिश न करें और बच्चों तथा पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें। घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग या संबंधित प्रशासन को देना अधिक सुरक्षित तरीका है।
रविदास नगर में सामने आई घटना ने एक बार फिर आबादी के आसपास वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। लोगों को उम्मीद है कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाएगी और तेंदुए की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भय का माहौल कम हो और ग्रामीण सामान्य जीवन जी सकें।